
पटना NEET छात्रा मौत: पहले बताया सुसाइड, अब पोस्टमार्टम ने खोली पोल; किसे बचा रहा प्रशासन?
Patna girls hostel death: यह घटना सिर्फ़ एक छात्रा की मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल है। अब सबकी नजर SIT की जांच पर है कि क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा या नहीं।
Patna NEET student death case: एक तरफ सरकार बेटी बचाने के नारे लगाती है, दूसरी तरफ बिहार की राजधानी पटना के एक हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत को पहले 'सुसाइड' बताकर फाइल बंद करने की कोशिश होती है। सवाल यह नहीं है कि छात्रा की मौत कैसे हुई, सवाल यह है कि सच सामने आने में इतना वक़्त क्यों लगा और अगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट न आती तो क्या यह मामला हमेशा के लिए दफन कर दिया जाता? पटना की यह घटना महज एक अपराध नहीं, बल्कि शासन और सिस्टम की संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है।
पटना में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत के मामला में शुरुआत में पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब परिजन इसे बलात्कार के बाद हत्या बता रहे हैं और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
घटना की शुरुआत: छात्रा की हालत कैसे बिगड़ी?
6 जनवरी 2026 को पटना के चित्रगुप्त नगर इलाके में स्थित एक निजी गर्ल्स हॉस्टल ‘शंभू गर्ल्स हॉस्टल’ में रहने वाली 17–18 साल की छात्रा बेहोशी की हालत में पाई गई। वह जहानाबाद जिले की रहने वाली थी और NEET की तैयारी कर रही थी। छात्रा को पहले कंकड़बाग के सहजानंद अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे प्रभात मेमोरियल प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत और बिगड़ने पर उसे बड़े अस्पताल मेदांता रेफर किया गया, जहां 11 जनवरी 2026 को उसकी मौत हो गई।
आत्महत्या का दावा
मामले की शुरुआती जांच के बाद पटना पुलिस ने कहा कि छात्रा के शरीर पर हमले के स्पष्ट निशान नहीं मिले। उसने ज़्यादा मात्रा में नींद की गोलियां खाई थीं। उसके शरीर में टाइफाइड जैसे संक्रमण के लक्षण थे। पुलिस ने यह भी दावा किया कि हॉस्टल के CCTV फुटेज, हॉस्टल स्टाफ के बयान और शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर यह मामला आत्महत्या का लग रहा है और यौन शोषण के कोई सबूत नहीं हैं। लेकिन छात्रा का परिवार शुरू से ही इस दावे को गलत बताता रहा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पलट दी कहानी
14 जनवरी 2026 को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले को पलट दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। शरीर पर कई चोटों और खरोंच के निशान हैं। जबरदस्ती बल प्रयोग के संकेत मिले हैं। इस रिपोर्ट के बाद पुलिस की आत्महत्या वाली थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए, क्योंकि पुलिस पहले ही दुष्कर्म से इनकार कर चुकी थी।
साजिश और दबाव का दावा
मृतक छात्रा के पिता ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी पुलिस, अस्पताल और हॉस्टल संचालक की मिलीभगत का शिकार हुई है। परिवार को धमकाया जा रहा है। मामले को दबाने के लिए लालच भी दिए जा रहे हैं। परिजनों ने सरकार और पुलिस से न्याय की मांग की है।
FIR और SIT का गठन
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद छात्रा के पिता ने चित्रगुप्त नगर थाने में FIR दर्ज कराई। FIR में आरोप लगाया गया कि हॉस्टल में छात्रा के साथ दुष्कर्म किया गया, फिर उसकी हत्या कर दी गई। मामले में लापरवाही के आरोप लगने और दबाव बढ़ने के बाद बिहार सरकार ने SIT का गठन किया। गृह मंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर डीजीपी को जांच की निगरानी सौंपी गई। पटना आईजी जितेंद्र राणा को SIT का प्रमुख बनाया गया। SIT में वरिष्ठ अधिकारी, महिला पुलिस अफसर और फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हैं।
अब तक की कार्रवाई
हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को गिरफ्तार किया गया है। सबूतों से छेड़छाड़ रोकने के निर्देश दिए गए हैं। घटनास्थल की दोबारा फॉरेंसिक जांच हुई। मोबाइल लोकेशन डेटा और दस्तावेज खंगाले गए। प्रभात मेमोरियल अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विस्तृत समीक्षा के लिए उसे पटना एम्स भेजा गया है। FSL रिपोर्ट का इंतज़ार है।
मौत पर राजनीति और विरोध
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद परिजनों और छात्रों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया। गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने दोषियों को सख़्त सज़ा देने की बात कही। विपक्ष भी सरकार पर हमलावर है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने परिवार से मुलाकात की। कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह और सांसद पप्पू यादव ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

