यूपी के इंजीनियर और उसकी पत्नी को फांसी होगी: बच्चों का यौन शोषण करके वीडियो बनाकर बेचता था
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दुर्गावती और रामभवन बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत में पेशी के दौरान

यूपी के इंजीनियर और उसकी पत्नी को फांसी होगी: बच्चों का यौन शोषण करके वीडियो बनाकर बेचता था

सीबीआई के अनुसार, अभियुक्त लैपटॉप कैमरे से अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें डार्क वेब के जरिए अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक पहुंचाते थे।


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उत्तर प्रदेश के बांदा स्थित पॉक्सो कोर्ट ने बच्चों के यौन शोषण और अश्लील सामग्री बनाकर डार्क वेब पर बेचने के मामले में पति-पत्नी को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि दोनों दोषियों को “मरते दम तक फांसी पर लटकाया जाए।”

विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 18 फरवरी को दोनों को दोषी ठहराने के बाद शुक्रवार को सजा का ऐलान किया। दोषी रामभवन सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात था, जबकि उसकी पत्नी दुर्गावती गृहिणी थी। सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस दोनों को जेल ले गई।

50 से अधिक बच्चों का शोषण

जांच में सामने आया कि दंपती 5 से 16 वर्ष तक के बच्चों को लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। गरीब परिवारों के बच्चों को खिलौने, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान का प्रलोभन दिया जाता था। विरोध करने पर बच्चों के साथ मारपीट की जाती थी और उन्हें धमकाकर चुप कराया जाता था।

सीबीआई के अनुसार, आरोपी लैपटॉप कैमरे से अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें डार्क वेब के जरिए अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक पहुंचाते थे। जांच एजेंसी ने 31 अक्टूबर 2020 को मामला दर्ज किया और 17 नवंबर 2020 को दोनों को गिरफ्तार कर लिया था।

इंटरपोल से मिला था इनपुट

मामले की शुरुआत इंटरपोल से मिली सूचना के आधार पर हुई। जानकारी मिली थी कि कुछ मोबाइल नंबरों से बच्चों के अश्लील वीडियो इंटरनेट पर अपलोड किए जा रहे हैं। जांच के दौरान एक पेन ड्राइव से 34 बच्चों के वीडियो और 679 फोटो बरामद हुईं। ये बच्चे बांदा, चित्रकूट और आसपास के जिलों के रहने वाले थे।

700 पन्नों की चार्जशीट, 74 गवाह

गिरफ्तारी के 88 दिन बाद सीबीआई ने करीब 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। मेडिकल रिपोर्ट, पीड़ितों के बयान और डिजिटल साक्ष्यों को आधार बनाया गया। ट्रायल के दौरान 74 गवाह पेश किए गए। बच्चों से जुड़े मामले को देखते हुए सुनवाई पॉक्सो कोर्ट में हुई।

अधिवक्ता कमल सिंह ने अदालत से मांग की कि जिला प्रशासन को पत्र लिखकर पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा दिलाने की व्यवस्था की जाए।

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