तुर्कमान गेट पर खाकी का कड़ा पहरा, अफवाहों ने बिगाड़ा अमन-चैन का माहौल
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तुर्कमान गेट पर 'खाकी' का कड़ा पहरा, अफवाहों ने बिगाड़ा अमन-चैन का माहौल

तुर्कमान गेट पर हाईकोर्ट के आदेश पर धव्स्तीकरण की हुई कार्रवाई के बाद पथराव, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले; इलाके में धारा 144 लागू, 5 गिरफ्तार और कई हिरासत में लिए गए।


Turkman Gate Riot : पुरानी दिल्ली का ऐतिहासिक तुर्कमान गेट इलाका मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर दरगाह फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास से अवैध अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। देखते ही देखते इलाके में 'मस्जिद ढहाने' की अफवाह जंगल की आग की तरह फैली, जिसके बाद भड़की भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। फिलहाल पूरा इलाका छावनी में तब्दील है और चप्पे-चप्पे पर अर्धसैनिक बलों और दिल्ली पुलिस की तैनाती की गई है।

इस दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने ये दावा किया है कि दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ अपील की गयी थी और उस पर सुनवाई 22 फरवरी को होनी थी, लेकिन इसके बावजूद आधी रात के बाद कार्रवाई की गयी, आखिर क्यों?


आधी रात की कार्रवाई और अचानक भड़का आक्रोश

मामला रामलीला मैदान से सटी दरगाह फैज-ए-इलाही मस्जिद के इर्द-गिर्द बने अवैध निर्माण का है। एमसीडी (MCD) के मुताबिक, मस्जिद के पास स्थित डिस्पेंसरी और बारात घर हॉर्टिकल्चर विभाग की जमीन पर कब्जा करके बनाए गए थे। मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां से इन्हें ध्वस्त करने का फरमान जारी हुआ। पुलिस ने पहले ही स्थानीय अमन कमिटी और जिम्मेदार लोगों के साथ बैठक कर स्पष्ट कर दिया था कि कार्रवाई सिर्फ अवैध कब्जों पर होगी, मस्जिद को आंच नहीं आएगी।

सर्द रात के सन्नाटे को चीरते हुए रात करीब 2 बजे के बाद जब बुलडोजर की गड़गड़ाहट शुरू हुई, तो माहौल गरमा गया। आरोप है कि कुछ शरारती तत्वों ने सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो साझा कर यह अफवाह फैला दी कि मस्जिद को तोड़ा जा रहा है। इस चिंगारी ने ऐसा काम किया कि देखते ही देखते तुर्कमान गेट पर सैकड़ों की भीड़ जमा हो गई और पुलिस बल पर पत्थरों की बारिश शुरू कर दी।

प्रकरण में हाई कोर्ट के आदेश से लेकर तुर्कमान गेट में दंगे तक की टाइम लाइन

अक्टूबर से दिसम्बर के बीच मस्जिद के पास अवैध कब्जे का सर्वे हुआ.
सर्वे में बारात घर, क्लिनिक डिस्पेंसरी को अवैध पाया गया.
सर्वे के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने 3 महीने के अन्दर अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया
6 जनवरी को मस्जिद कमिटी ने आदेश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की
6 जनवरी को अपील की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने शहरी विकास मंत्रालयऔर MCD को नोटिस जारी किया
6 जनवरी को हुई सुनवाई ने दिल्ली हाई कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के आदेश पर कोई रोक नहीं लगायी


पुलिस की जवाबी कार्रवाई और गिरफ्तारियां

भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दिल्ली पुलिस को कड़े तेवर अख्तियार करने पड़े। पुलिस ने पहले लाठीचार्ज किया और फिर स्थिति बेकाबू होते देख आंसू गैस के कई गोले दागे। सेंट्रल रेंज के जॉइंट सीपी मधुर वर्मा ने बताया कि "इस उपद्रव में पुलिस के 5 जवान जख्मी हुए हैं। अफवाह फैलाने और हिंसा करने के आरोप में काशिफ, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद आरीब, अदनान और समीर को गिरफ्तार किया गया है।"





पुलिस अब ड्रोन कैमरों, बॉडी वॉर्म कैमरों और सीसीटीवी फुटेज के जरिए अन्य उपद्रवियों की शिनाख्त कर रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच जिले के 'स्पेशल स्टाफ' को सौंप दी गई है।

स्थानीय निवासियों का दर्द: "अपील पेंडिंग थी, फिर भी हुई कार्रवाई"

इलाके के निवासी शेख फारुकी का दावा कुछ अलग है। उनका कहना है कि "हमने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की थी जिसकी सुनवाई फरवरी में होनी थी, लेकिन एमसीडी और पुलिस ने आधी रात का वक्त चुना।" वहीं, मोहम्मद आदिल जैसे कई लोग अपने अपनों की सलामती को लेकर डरे हुए हैं। आदिल के दो भतीजे, जो शादी से लौट रहे थे, पुलिस की कार्रवाई के बाद से लापता हैं। परिजनों का कहना है कि अगर वे हिरासत में हैं, तो पुलिस कम से कम इसकी सूचना साझा करे।

इलाके में होटल चलाने वाले मोहम्मद हनीफ कहते हैं, "कार्रवाई की जानकारी थी, लेकिन रात के अंधेरे में जिस तरह से कार्रवाई की गई, उससे लोगों में शक पैदा हुआ। उपद्रवी बाहर के थे या यहीं के, यह जांच का विषय है, लेकिन खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है।"

वर्तमान स्थिति: धारा 144 और सन्नाटा

फिलहाल इलाके में बीएनएस की धारा 189 (पुरानी सीआरपीसी 144) लागू है। बाजार पूरी तरह बंद हैं और गलियों में सन्नाटा पसरा है। पुलिस केवल जरूरी सामान लाने-ले जाने वालों को ही आवाजाही की अनुमति दे रही है। पुलिस का कहना है कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक सुरक्षा घेरा कम नहीं किया जाएगा।


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