
ट्विशा केस: आरोपी पति समर्थ 10 दिन बाद गिरफ्तार, पुलिस ने कोर्ट से दबोचा
भोपाल पुलिस ने जबलपुर कोर्ट परिसर से समर्थ सिंह को हिरासत में लिया. दहेज उत्पीड़न और चरित्र हनन के गंभीर आरोप. हाई कोर्ट पहुंचा पूर्व जज की बेल का मामला.
Twisha Sharma Case: ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में 10 दिनों से फरार चल रहे मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है. पेशे से वकील समर्थ सिंह शुक्रवार को पूरी तरह भेष बदलकर जबलपुर कोर्ट रूम में सरेंडर करने पहुंचा था. उसने चेहरे पर मास्क, टोपी और धूप का चश्मा लगा रखा था. साथ ही अपने कंधे पर एक कपड़ा डाल रखा था जिससे उसका चेहरा पूरी तरह छिपा हुआ था.
कोर्ट परिसर से ही दबोचा गया
समर्थ सिंह ने सरेंडर करने से ठीक पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली थी. जब वह जबलपुर जिला अदालत के सामने पेश हुआ, तो कोर्ट ने उसे भोपाल की अदालत में ही सरेंडर करने के सख्त निर्देश दिए. इसी दौरान कोर्ट परिसर में पहले से मौजूद भोपाल पुलिस की मुस्तैद टीम ने फुर्ती दिखाते हुए समर्थ सिंह को तुरंत अपनी कस्टडी में ले लिया.
दहेज और उत्पीड़न के संगीन आरोप
नोएडा की रहने वाली 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा का शव 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित उनके घर में फंदे से लटका मिला था. शुरुआत में इसे आत्महत्या माना जा रहा था, लेकिन धीरे-धीरे इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. ट्विशा के परिवार का सीधा आरोप है कि ससुराल में उसे दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया जाता था. उसे मानसिक और शारीरिक रूप से बार-बार जलील किया जाता था.
पूर्व जज सास पर जांच प्रभावित करने का आरोप
ट्विशा के परिजनों ने शुरुआत से ही भोपाल पुलिस की जांच पर भी गंभीर सवाल उठाए थे. पीड़ित परिवार ने शव को लेने से साफ इनकार कर दिया था और दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग पर अड़ गया था. ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने आरोप लगाया है कि समर्थ की मां और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह लगातार अपने रसूख का इस्तेमाल करके इस पूरी पुलिसिया जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं.
नवजात बच्चे पर भी उठाए थे सवाल
मेजर हर्षित शर्मा ने भावुक होते हुए बताया कि ट्विशा अपनी शादीशुदा जिंदगी से बेहद नाखुश थी और खुद को पूरी तरह फंसा हुआ महसूस कर रही थी. उन्होंने बताया कि हद तो तब हो गई जब ट्विशा के पति और उसकी पूर्व जज सास ने उसके चरित्र पर कीचड़ उछाला. ससुराल वालों ने ट्विशा के होने वाले बच्चे की वैधता (लेजिटिमेसी) पर भी बेहद शर्मनाक और घिनौने सवाल खड़े किए थे, जिससे वह अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी.
मृतका के चरित्र पर लगाया था लांछन
दूसरी तरफ, आरोपी सिंह परिवार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने ट्विशा को डिप्रेशन का शिकार बताते हुए उस पर नशीले पदार्थों के सेवन का आरोप मढ़ दिया था. इतना ही नहीं, उन्होंने मृतका के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की थीं. गिरिबाला सिंह ने ट्विशा पर ड्रामा करने का आरोप लगाया था और पूछा था कि क्या वह निजी फायदे के लिए पुरुषों के साथ संबंध बनाती थी.
एम्स के डॉक्टर भोपाल में करेंगे दोबारा पीएम
इस पूरे विवाद के बीच शुक्रवार को कानूनी मोर्चे पर दो बहुत बड़े घटनाक्रम हुए हैं. सबसे पहले, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पीड़ित परिवार की याचिका को स्वीकार करते हुए ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की इजाजत दे दी है. हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि यह संवेदनशील पोस्टमॉर्टम दिल्ली एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों की एक विशेष टीम द्वारा भोपाल में ही संपन्न किया जाएगा.
पहले पोस्टमॉर्टम में मिली थीं कई कमियां
ट्विशा के परिवार ने आरोप लगाया था कि भोपाल में हुए पहले पोस्टमॉर्टम में भारी लापरवाही बरती गई थी. रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर मौजूद चोट के निशानों का कोई जिक्र नहीं किया गया था. इसके अलावा, पहले पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में दर्ज की गई ट्विशा की लंबाई और पुलिस की शुरुआती जांच रिपोर्ट में दर्ज की गई लंबाई के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर पाया गया था, जिससे शक गहरा गया था.
पूर्व जज की जमानत रद्द कराने पहुंची पुलिस
शुक्रवार को हुआ दूसरा बड़ा कानूनी घटनाक्रम पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत से जुड़ा है. भोपाल पुलिस ने गिरिबाला सिंह को मिली अंतरिम राहत के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. पुलिस ने कोर्ट में मजबूती से तर्क दिया है कि निचली सत्र अदालत ने फैसला सुनाते वक्त ट्विशा और उसके माता-पिता के बीच हुए व्हाट्सएप चैट्स (WhatsApp Chats) पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया था.
सबूतों से छेड़छाड़ का गंभीर आरोप
हाई कोर्ट में दाखिल अपनी अर्जी में पुलिस ने साफ कहा है कि उन व्हाट्सएप चैट्स में गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ के खिलाफ प्रताड़ना के बिल्कुल साफ और पुख्ता सबूत मौजूद हैं. पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि पूर्व जज ने अपनी अग्रिम जमानत की शर्तों का खुला उल्लंघन किया है. उन्होंने इस हाई प्रोफाइल केस से जुड़े अहम सबूतों को नष्ट करने और जांच को गुमराह करने की कोशिश की है.
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