
शिक्षा-स्वास्थ्य ही नहीं हर खेल में केजरीवाल माहिर, नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने खोली पोल
Arvind Kejriwal अपनी सरकार के कसीदे पढ़ने से थकते नहीं। लेकिन दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने शिक्षा-स्वास्थ्य से लेकर हर मुद्दे पर पोल खोल दी।
Delhi Assembly Election 2025: दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को हमारी सरकार ने वर्ल्ड क्लास बना दिया है, दिल्ली की स्वास्थ्य सेवा तो देश में किसी भी राज्य से अच्छी है, भ्रष्टाचार से समझौता नहीं। इन्हीं तकरीरों के साथ आप के संयोजक जनता से रूबरू होते हैं। वो ये कहते हैं कि हमारी सरकार देश की अकेली सरकार है जिसने अधिकतर वायदों को पूरे किए हैं। बदलहाल दिल्ली हमें मिली जिसे सजाने संवारने की कोशिश की। अब जो कुछ काम रह गए हैं उसे अगली दफा पूरी करेंगे। यानी कि 8 फरवरी के बाद जब नतीजे आ जाएंगे। अब उनकी इस तकरीरों पर विपक्षी दल कहते हैं कि हकीकत ये है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी, मोहल्ला क्लिनिक 24 घंटे बंद रहते हैं, यमुना नदी का हाल देखिए। इन सबके बीच दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और रोहिणी विधानसभा से उम्मीदवार विजेंद्र गुप्ता (Vijender Gupta) ने अरविंद केजरीवाल और आप सरकार पर कटाक्ष किया।
शिक्षा व्यवस्था का यह है हाल
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार (Aam Aadmi Party Government)) की तथाकथित 'विश्व स्तरीय शिक्षा क्रांति' की पोल खोलते हुए कहा कि यह सरकार बड़े जोर-जोर से घोषणाएं करती है, नए-नए स्कूल खोलने के लिए बिल्डिंगें बनवाती है और फिर निर्माण के नाम पर भ्रष्टाचार करके इन बिल्डिंगों को लावारिस हालत में छोड़ देती है। धीरे-धीरे इमारतें खंडहरों में तब्दील हो जाती हैं। आप सरकार का एकमात्र लक्ष्य 'निर्माण से पैसे कमाना' रह गया है। उन्होंने सिलसिलेवार आरोप लगाए।
- बवाना में 55 करोड़ रुपये से नवनिर्मित 'स्कूल आफ स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस' की 2 साल पहले बनी बिल्डिंग आज धूल चाट रही है
- बवाना के उस स्कूल में एक भी छात्र का न तो एडमिशन हुआ और न ही स्कूल के लिए स्टाफ रखा गया ।
- बिल्डिंग को लावारिस हालत में छोड़ दिया गया। दस साल में एक ही परिसर में स्कूल के नाम पर तीन-तीन बिल्डिगें बनाकर भ्रष्टाचार के पैसे की बंदरबाट हुई है ।
- भव्य इमारत को बनाने के लिए सरकार ने 55 करोड़ रुपए खर्च कर दिए।
- हैरानी की बात यह है कि इस 55 करोड़ की इमारत में एक भी बच्चा पढ़ने नहीं आया और इस स्कूल में ना तो कोई टीचर रखा गया और न ही कोई प्रिंसिपल।
- 55 करोड़ के इस स्कूल के नाम पर स्कूल के विज्ञापन पर सरकार ने करोड़ों रुपए बर्बाद कर दिए।
- विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह सरकार 9वीं और 11वीं क्लास के डेढ़ लाख बच्चों को हर साल फेल कर देती है
- सरकार का मसकद सिर्फ यह होता है कि स्कूलों का 10वीं और 12वीं का रिजल्ट अच्छा बनाया जा सके।
- बच्चों को फेल कर यह सरकार देश के नौनिहालों का भविष्य चौपट कर रही है और उनके सपनों को तोड़ रही है।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार की दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी की असलियत उजागर करते हुए कहा कि इस यूनिवर्सिटी को एक स्कूल की इमारत में मात्र चार कमरों में चलाया जा रहा है और इन चार कमरों में भी केवल 12 बच्चे ही पढ़ रहे हैं और वह भी कोई टीचर ट्रेनिंग का कोर्स नहीं बल्कि साधारण पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने भाजपा के शासनकाल में खोले गये 29 प्रतिभा विद्यालयों को बंद करके उनमें पढ़ रहे हजारों बच्चों का भविष्य अंधकारमय कर दिया। इसी तरह दिल्ली सरकार द्वारा वित्तपोषित डीयू के 12 कॉलेजों को ग्रांट न देकर उन्हें बंद करने का षड्यंत्र रचने का भी सरकार पर आरोप लगाया।
विश्व स्तरीय स्वास्थ्य व्यवस्था का यह है हाल
आम आदमी पार्टी के 'वर्ल्ड क्लास हेल्थ मॉडल' (Delhi Mohalla Clinics) की पोल खोलते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि 5,590 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत 24 अस्पताल परियोजनाओं में से कई अभी तक अधूरी पड़ी हैं, जिस कारण इनकी लागत में बेतहाशा वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि 1,125 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले सात आईसीयू अस्पतालों के निर्माण में भारी वित्तीय अनियमितताएं बरती गईं और करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किया गया। उन्होंने कहा कि आज तीन साल बीत जाने के बावजूद इन अस्पतालों का निर्माण कार्य 50 फीसदी ही हुआ है, जिससे इनकी निर्माण लागत में दुगनी से ज्यादा बढ़ोत्तरी हो गई है। गुप्ता ने एलएनजेपी अस्पताल में एक ब्लॉक के निर्माण में भी भारी धांधली का आरोप लगाया। इस ब्लॉक के निर्माण का ठेका 465 करोड़ रुपये था।लेकिन काम चार साल मे 60 प्रतिशत भी पूरा नहीं हुआ और लागत बढ़कर 1,125 करोड़ रुपये हो गई। और काम पिछले छह महीने से ठप पड़ा है।