Hello आपने वोट किसे दिया, सियासी दल इस तरह टटोल रहे नब्ज, जायज कितना?
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Hello आपने वोट किसे दिया, सियासी दल इस तरह टटोल रहे नब्ज, जायज कितना?

मतदान के बाद अब जनता ने किसे मत दिया उसे एग्जिट पोल के जरिए सर्वे कंपनिया पेश करती हैं। लेकिन अब तो राजनीतिक दल भी इस कवायद में कूद चुके हैं। सवाल यह है कि क्या यह जायज है।


Delhi Election 2025: चुनावी प्रचार के समय आपने भी अपने फोन पर कुछ इस तरह की आवाज सुनी होगी, नमस्कार मैं फलां बोल रहा हूं.. आप अपनी बेहतरी के लिए राज्य और देश के बेहतरी के लिए हमारी पार्टी के निशान पर बटन दबाएं। इसमें किसी तरह का सवाल भी नहीं उठता है क्योंकि कोई पार्टी या कोई नेता अपने पक्ष में वोट करने के लिए आग्रह करता है। लेकिन अगर फोन कर कोई पूछे कि आपने वोट किसे दिया है तो उससे कई तरह के सवाल पैदा होते हैं, क्यों वोट गुप्त दान है यानी कोई किसी से यह नहीं पूछ सकता कि आपने किसे मत दिया है। लेकिन दिल्ली चुनाव के बाद कुछ ऐसे फोन आए जिसमें लोगों से यह पूछा जा रहा था कि आपने किसको वोट दिया। अब इसका मतलब क्या है

मतदान के बाद मिजाज समझने की कोशिश
इस कवायद को समझने के लिए द फेडरल देश कुछ खास नंबरों के बारे में बता रहा है जिससे लोगों के पास फोन आए। उनसे वोटिंग के बारे में पूछा गया। उन्होंने वोट किसे दिया। अगर फलां पार्टी को मत दिया तो उसके पीछे की वजह क्या थी।

+91 92402 36489

‎+91 79713 19050

‎+91 86453 78755

ये वो नंबर हैं जिसके जरिए पूछा गया कि क्या आप वोटर हैं, क्या आपने मत दिया है और यदि दिया है तो किस दल को वोट किया है। आमतौर पर कोई भी शख्स बता ही देता है कि उसने किस दल को मत दिया है। इसका अर्थ यह हुआ कि अगर उसने पार्टी ए को मत दिया है तो उसकी प्रोफाइल बन जाएगी। अगर उसने मत नहीं भी दिया है उस सूरत में भी प्रोफाइल बनेगा। यानी कि उसके निजता का उल्लंघन हुआ। इन नंबरों पर द फेडरल देश ने खुद डायल करने की कोशिश की ये नंबर किसी राजनीतिक दल से तो जुड़े नहीं। लेकिन इनमें से कुछ नंबर स्विच्ड ऑफ मिले। कुछ नंबर पर रिंग हो रही थी। लेकिन कोई अटेंड नहीं कर रहा था। ऐसे में हमने अंदाजा लगाया कि टेलीकॉलर के जरिए वोटर्स के मन की बात समझने की कोशिश हुई है।

एग्जिट पोल का हिसाब अलग
आम तौर पर मतदान की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आते हैं, जिसमें सैंपल साइज का जिक्र होता है। लेकिन वोट देने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाती है। लेकिन कोई भी राजनीतिक दल किसी संस्था या एजेंसी के जरिए जब इस तरह से वोटर्स के मिजाज को समझने की कोशिश करेगा उस सूरत में आप की पहचान सार्वजनिक हो जाती है। इसे आसान तरीके से आप ऐसे समझ सकते हैं। जैसे लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए फोन आते हैं जिसमें टेलीकॉलर या तो नाम से या नाम पूछकर आप से बात करने की कोशिश करते हैं। वो आपसे तरह तरह की जानकारी लेते हैं और वो उनके डेटाबैंक में रिकार्ड हो जाता है।

क्या कहता है कानून
मतदान करने के अधिकार के साथ-साथ मतदान न करने के अधिकार को भी जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) की धारा 79(d) और नियम 41(2) व (3) तथा नियम 49-O के तहत कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त है। कोई मतदाता अपना वोट डालने का निर्णय ले या न डालने का, दोनों ही परिस्थितियों में गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य है।

यह नहीं कहा जा सकता कि यदि कोई मतदाता मतदान करता है, तो उसकी गोपनीयता RP अधिनियम की धारा 128 और नियम 39 व 49M के तहत सुरक्षित रहेगी, लेकिन यदि वह मतदान न करने का निर्णय लेता है, तो उसकी गोपनीयता भंग हो जाएगी। इसलिए, नियम 49-O का वह हिस्सा, जो फॉर्म 17-A के साथ मिलकर ऐसे मतदाताओं के साथ भेदभाव करता है जो मतदान नहीं करना चाहते और उनकी गोपनीयता का उल्लंघन करता है, वह मनमाना, अनुचित और संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन करने वाला है। साथ ही, यह RP अधिनियम की धारा 79(d) और 128 के भी विरुद्ध है।

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