
गार्ड की पोस्ट के लिए इंटरव्यू में हुए थे रिजेक्ट, आज चलाते हैं 2 बड़ी कंपनियां
हौसला हो तो कुछ भी मुमकिन है. ऐसी ही कहानी दिलखुश कुमार की है. दिलखुश बिहार के मधेपुरा में रहते हैं.
दिलखुश कुमार बिहार के रहने वाले हैं. उनके गांव ने देश को न जाने कितने आईएएस और आईपीएस दिए हैं. लेकिन, पढ़े-लिखों के इस गांव में दिलखुश कुमार ने बिल्कुल नया रास्ता चुना. दिलखुश कुमार चपरासी की नौकरी के लिए रिजेक्ट किए गए थे. इन दिनों दिलखुश के पास एक नहीं, दो नहीं बल्कि कई कंपनियां हैं. दिलखुश कुमार की कहानी आप को प्रेरणा दे सकती है.
दिलखुश कई लोगों को रोजगार मुहैया करा रहे हैं. दिलकुश सबसे पहले काल की ड्राइवरी की नौकरी करना चाहते थे. उनके पिता बिहार में ड्राइवरी का काम करते थे, लेकिन ड्राइवरी करने से पहले उन्होंने सबसे पहले पटना में चपरासी की नौकरी के लिए इंटरव्यू दिया था, हालांकि वो इस चीज में रिजेक्ट हो गए थे. रिजेक्ट होने के बाद वो नौकरी करने दिल्ली आ गए. दिल्ली में भी उनको कोई नौकरी नहीं मिली और विफलता ही हाथ लगी. फिर हार मानकर उन्होंने पैडल वाला रिक्शा चलाना शुरु कर दिया.
पैडल रिक्शा चलाने के बाद उनकी तबीयत खराब रहने लगी. तबीयत खराब होने के चलते उनके घर वालों ने उन्हें वापस बुला लिया. तबीयत ठीक होने के बाद एक मारुति 800 चलाने की नौकरी मिली. दिलखुश 12वीं में सेकंड डिविजन और 10वीं में थर्ड डिविजन से पास हुए थे. 18 साल की उम्र में उन्होंने शादी कर ली थी. दिलखुश ने साल 2016 में अपनी कंपनी AryaGo की शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने RodBez नाम के कैब कंपनी की भी शुरुआत की. आज उनकी कंपनी के नेटवर्क में करीब 4000 कार हैं. अपनी इस कंपनी से वो आज 500 लोगों को घर चलाते हैं.