Success Story: बिहार के बढ़ई के बेटे जयप्रकाश साह ने UPSC ISS परीक्षा में पाई सफलता
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Success Story: बिहार के बढ़ई के बेटे जयप्रकाश साह ने UPSC ISS परीक्षा में पाई सफलता

UPSC द्वारा आयोजित भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा में जयप्रकाश साह ने अखिल भारतीय स्तर पर 27वीं रैंक हासिल कर एक शानदार उपलब्धि अपने नाम की है.


कड़ी मेहनत और अटूट संकल्प की मिसाल बने जयप्रकाश साह ने तीन बार प्रयास करने के बाद आखिरकार UPSC द्वारा आयोजित भारतीय सांख्यिकी सेवा (ISS) परीक्षा में ऑल इंडिया 27वीं रैंक हासिल की. बिहार के एक गरीब परिवार से आने वाले जयप्रकाश की ये सफलता कई छात्रों के लिए प्रेरणा है.

गरीबी में पला, लेकिन हिम्मत नहीं हारी

बेतिया जिले के माझौलिया प्रखंड के जोकटिया पंचायत (वार्ड-6) के रहने वाले 26 साल के जयप्रकाश साह का सफर आसान नहीं था. उनके पिता कन्हैया साह एक छोटे बढ़ई हैं, जो मजदूरी करने के लिए दूसरे राज्यों में काम करते हैं. उनकी मां गायत्री देवी घर संभालने के साथ-साथ बकरियां चराती थीं ताकि परिवार की आर्थिक मदद कर सकें. बावजूद इसके, उनके माता-पिता ने कभी उनके सपनों को टूटने नहीं दिया.

शिक्षा और संघर्ष की कहानी

साल 2012 में गांव से मैट्रिक पास करने के बाद जयप्रकाश ने पटना साइंस कॉलेज में दाखिला लिया. वहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से MAC (सांख्यिकी में मास्टर डिग्री) पूरी की. इस दौरान, उनके पिता ने उनकी पढ़ाई का खर्च उठाया, लेकिन MAC पूरा करने के बाद जयप्रकाश ने खुद फ्रीलांसिंग करके अपनी आर्थिक जरूरतें पूरी कीं.

चार साल तक नहीं गए घर, सिर्फ एक लक्ष्य था

जयप्रकाश का सपना सरकारी अधिकारी बनना था. उन्होंने ISS परीक्षा के तीन प्रयास किए और अंत में सफलता हासिल की. इस दौरान उन्होंने पूरा ध्यान पढ़ाई पर रखा और पिछले चार सालों तक घर नहीं गए. उनका संकल्प था कि वो तभी गांव लौटेंगे, जब वो अधिकारी बन जाएंगे. अब न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा गांव उनकी सफलता का जश्न मना रहा है.

भविष्य की राह

ISS परीक्षा में पूरे भारत से केवल 29 उम्मीदवार चुने गए, जिसमें जयप्रकाश ने 27वीं रैंक हासिल की. अब दो साल की ट्रेनिंग के बाद उन्हें किसी मंत्रालय में जिम्मेदारी दी जाएगी. जयप्रकाश की सफलता दिखाती है कि संकल्प और मेहनत से किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है. उनकी ये यात्रा उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं.

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