बजट 2026: शिक्षा में AI पर बड़ा दांव, लेकिन ग्रामीण छात्रों की बढ़ी चिंता
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बजट 2026: शिक्षा में AI पर बड़ा दांव, लेकिन ग्रामीण छात्रों की बढ़ी चिंता

शिक्षा बजट में AI और डिजिटल इंफ्रा के लिए भारी फंड आवंटित, पर कनेक्टिविटी और शिक्षकों की ट्रेनिंग को लेकर सवाल। क्या तकनीक का यह पुश बढ़ाएगा शिक्षा की असमानता?


Budget 2026 For Education : केंद्रीय बजट 2026-27 में शिक्षा क्षेत्र के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सबसे ऊपर रखा गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार शैक्षणिक डिजिटल बुनियादी ढांचे और AI-आधारित पहलों के आवंटन में भारी बढ़ोतरी की है। हालांकि, विशेषज्ञों और विपक्ष का मानना है कि तकनीक पर यह अत्यधिक जोर जमीनी हकीकत से दूर हो सकता है। छात्रों के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी, उपकरणों की उपलब्धता और शिक्षकों की तैयारी के लिए पर्याप्त बजट प्रावधान न होने से शिक्षा प्रणाली में असमानता (Inequality) बढ़ने का डर है। कुल शिक्षा बजट पिछले साल के संशोधित अनुमान (RE) से बढ़कर ₹1.39 लाख करोड़ हो गया है, लेकिन इसे महंगाई के अनुपात में वास्तविक कटौती के रूप में देखा जा रहा है।


AI और डिजिटल इंफ्रा पर भारी निवेश
बजट में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के लिए ₹250 करोड़ और शिक्षा में अन्य AI पहलों के लिए ₹100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। पिछले संशोधित अनुमानों में यह क्रमशः ₹120 करोड़ और ₹17 करोड़ ही था। इसके अलावा, 'पीएम वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' (PM-ONOS) योजना के लिए ₹2,200 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इस योजना का लक्ष्य शोध पत्रिकाओं और अनुसंधान प्रकाशनों तक छात्रों की पहुंच को आसान बनाना है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बिना बेहतर इंटरनेट और डिवाइस के ग्रामीण छात्र इसका लाभ कैसे उठा पाएंगे?

क्या जमीन पर दिखेंगे बदलाव?
तकनीक पर करोड़ों खर्च करने के बावजूद, बजट में सरकारी संस्थानों, विशेषकर ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाले क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है। शिक्षकों को नई तकनीक के लिए तैयार करने वाला 'मालवीय मिशन' अभी भी ₹70 करोड़ पर ही टिका हुआ है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर का तर्क है कि बजट में बढ़ोतरी वर्तमान महंगाई दर (5-6%) से भी कम है। उनके मुताबिक, सरकार प्रति छात्र वास्तविक खर्च में कमी कर रही है, जिससे उच्च शिक्षण संस्थानों के संचालन और वेतन तक का संकट खड़ा हो सकता है।

स्कूली शिक्षा और राज्यों पर बोझ
स्कूल शिक्षा विभाग को ₹83,562 करोड़ मिले हैं, जो पिछले साल के संशोधित अनुमान से अधिक है। 'समग्र शिक्षा' अभियान ₹42,100 करोड़ के साथ मुख्य आधार बना हुआ है। वहीं, 'पीएम पोषण' (मिड-डे मील) के लिए ₹12,750 करोड़ और 'पीएम श्री' स्कूलों के लिए ₹7,500 करोड़ दिए गए हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि केंद्र द्वारा राज्यों को दी जाने वाली अनुदान राशि में कटौती से राज्यों की शिक्षा पर खर्च करने की क्षमता कम होगी। 1985 से शिक्षा पर जीडीपी का 6% खर्च करने का लक्ष्य रहा है, जो कभी 4% भी पार नहीं कर पाया।

उच्च शिक्षा और नई घोषणाएं
उच्च शिक्षा को ₹55,727 करोड़ आवंटित किए गए हैं, लेकिन यह अब भी स्कूली शिक्षा से काफी पीछे है। वित्त मंत्री ने औद्योगिक गलियारों के पास पांच 'यूनिवर्सिटी टाउनशिप' बनाने और हर जिले में लड़कियों के लिए एक हॉस्टल बनाने की घोषणा की है। साथ ही खगोल विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए चार नई दूरबीनें और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। हालांकि, 'फेडरेशन ऑफ सेंट्रल यूनिवर्सिटीज टीचर्स एसोसिएशन' के अध्यक्ष सुरजीत मजूमदार का कहना है कि पिछले नौ वर्षों में कई योजनाएं घोषित हुईं, लेकिन उनका जमीन पर उतरना अभी बाकी है। स्कॉलरशिप और फेलोशिप में कोई बड़ा विस्तार न होना भी छात्रों के लिए निराशाजनक है।


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