
‘खामोश’ अब शत्रुघ्न सिन्हा का पर्सनैलिटी राइट्स, हाईकोर्ट ने दुरुपयोग पर लगाई रोक
अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने कुछ दिन पहले अपनी पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकार) की सुरक्षा के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें उनके मशहूर डायलॉग ‘खामोश’ को भी शामिल किया गया था।
जिस अंदाज़ में अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा अपना मशहूर डायलॉग ‘खामोश’ कहते रहे हैं, उस पर उनकी अनुमति के बगैर कोई भी व्यक्ति या कंपनी ऑनलाइन कंटेंट तैयार नहीं कर पाएगी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने ये निर्देश दिए हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि ‘खामोश’ सिग्नेचर डायलॉग विशेष रूप से सिन्हा की शख्सियत से जुड़ा हुआ है।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीरों, आवाज और अन्य व्यक्तिगत विशेषताओं का उपयोग कर ऑनलाइन कंटेंट तैयार नहीं किया जा सकता।
बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला क्या रहा?
अदालत ने कहा, “यह दोहराने की आवश्यकता नहीं है कि ‘खामोश’ शब्द, जिसे वादी (सिन्हा) ने अपनी एक फिल्म में अपने विशिष्ट और अनूठे अंदाज में कहा था, वह विशेष रूप से उनकी शख्सियत से जुड़ा हुआ है।”
सिन्हा द्वारा दायर याचिका पर 16 फरवरी को न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए सभी वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाने का निर्देश दिया। साथ ही भविष्य में बिना अनुमति ऐसे सामग्री अपलोड करने पर भी रोक लगा दी गई। आदेश की विस्तृत प्रति शनिवार (21 फरवरी) को उपलब्ध हुई।
वरिष्ठ अभिनेता की ओर से अधिवक्ता हिरेन कामोद के माध्यम से दायर याचिका में उनके नाम, छवि, व्यक्तित्व और प्रसिद्ध पंचलाइन ‘खामोश’ (जिसका अर्थ है ‘चुप रहो’) के अनधिकृत उपयोग पर स्थायी रोक लगाने की मांग की गई थी।
‘अभिनेता की संवाद अदायगी की अपनी अलग शैली है’
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभिनेता की संवाद अदायगी की अपनी विशिष्ट शैली है और वह विशेष रूप से पर्दे पर ‘खामोश’ कहने के अपने अनूठे अंदाज के लिए जाने जाते हैं।
अदालत ने आगे कहा कि प्रथम दृष्टया (prima facie) उसे लगता है कि सिन्हा का नाम, व्यक्तित्व, छवि आदि संरक्षण के योग्य हैं, क्योंकि प्रस्तुत सामग्री से यह स्पष्ट होता है कि उनके नाम और तस्वीरों का दुरुपयोग कर उनके व्यक्तित्व अधिकारों, सार्वजनिक अधिकारों और निजता का उल्लंघन किया गया है।
सभी ऐसे ऑनलाइन कंटेंट को हटाने का आदेश देते हुए अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को निर्धारित की है।
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर व्यावसायिक लाभ के लिए प्रसिद्ध व्यक्तियों के व्यक्तित्व अधिकारों के अनधिकृत दोहन के कारण इन अधिकारों की अवधारणा को हाल के वर्षों में अधिक महत्व मिला है।
अदालत ने कहा, “व्यक्तित्व अधिकारों में किसी व्यक्ति के अपने नाम, शैली, आवाज और व्यक्तित्व के विशिष्ट उपयोग का अधिकार शामिल है। AI के आगमन के साथ डिजिटल माध्यमों पर डिजिटल जालसाजी की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।”

