350 दुश्मनों पर भारी पड़े ‘परम वीर’ मेजर होशियार सिंह, Border 2 में दिखेगी शौर्यगाथा
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350 दुश्मनों पर भारी पड़े ‘परम वीर’ मेजर होशियार सिंह, Border 2 में दिखेगी शौर्यगाथा

फिल्म बॉर्डर 2 में वरुण धवन निभा रहे हैं परमवीर चक्र विजेता मेजर होशियार सिंह का किरदार. जानिए 1971 के युद्ध में 350 दुश्मनों पर भारी पड़े इस भारतीय वीर की सच्ची कहानी.


साल 1997 में आई सुपरहिट फिल्म ‘बॉर्डर’ ने देशभक्ति की भावना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया था. अब करीब तीन दशक बाद, उसी जज्बे और गर्व को फिर से जीवित करने आ रही है फिल्म ‘बॉर्डर 2’, जो 23 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. इस बार फिल्म में सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी जैसे सितारे नजर आएंगे. ‘बॉर्डर 2’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सेना के शौर्य और बलिदान की सच्ची कहानी है. ये फिल्म भी 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर आधारित है, लेकिन इस बार कहानी को और बड़े पैमाने पर दिखाया गया है. फिल्म में थलसेना, नौसेना और वायुसेना—तीनों की ताकत और समन्वय को दर्शाया जाएगा. इस फिल्म का सबसे खास पहलू है वरुण धवन का किरदार. वरुण इस बार रोमांटिक या कॉमेडी नहीं, बल्कि एक असली युद्ध नायक की भूमिका में नजर आएंगे. वो फिल्म में परमवीर चक्र विजेता मेजर होशियार सिंह दहिया का किरदार निभा रहे हैं.

कौन थे मेजर होशियार सिंह?

मेजर होशियार सिंह भारतीय सेना की 3 ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट से जुड़े थे. साल 1971 के भारत-पाक युद्ध में उन्होंने ऐसी बहादुरी दिखाई, जिसे आज भी भारतीय सेना गर्व से याद करती है. उनकी वीरता के लिए उन्हें देश का सर्वोच्च युद्ध सम्मान परमवीर चक्र दिया गया. होशियार सिंह ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में बसंतर की लड़ाई की पूरी कहानी साझा की थी. यही लड़ाई ‘बॉर्डर 2’ की आत्मा मानी जा रही है.

बसंतर की लड़ाई और खतरनाक मिशन

1971 के युद्ध के दौरान होशियार सिंह को एक बेहद अहम और जोखिम भरा मिशन सौंपा गया था. उन्हें पाकिस्तान की सीमा के भीतर जाकर बसंतर नदी पर पुल बनाने की जिम्मेदारी मिली थी. ये पुल सीमा से करीब 20 किलोमीटर अंदर था, ताकि भारतीय टैंक आगे बढ़ सकें. मेजर होशियार सिंह बाईं ओर की कमान संभाल रहे थे. उन्हें आदेश मिला था कि उन्हें जरपाल गांव पर कब्जा करना है, जिस पर पाकिस्तानी सेना ने कब्जा कर रखा था. इस इलाके में दुश्मन ने बारूदी सुरंगें, टैंक और भारी हथियार तैनात कर रखे थे.

केवल 2 घंटे में दुश्मन का किला ढहाया

15 दिसंबर की रात 10 बजे, होशियार सिंह को नदी पार कर गांव पर कब्जा करने का आदेश मिला. हालात बेहद मुश्किल थे अंधेरा, ठंड और चारों ओर दुश्मन की गोलाबारी. इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. रात 12 बजे तक, यानी सिर्फ 2 घंटे के भीतर, उन्होंने जरपाल गांव पर कब्जा कर लिया. ये इसलिए भी जरूरी था क्योंकि भोर तक नदी पर पुल बनना था, ताकि भारतीय टैंक आगे बढ़ सकें. इसी दौरान उन्हें इलाके की सभी बारूदी सुरंगें भी हटानी थीं.

पाकिस्तानी सेना के लगातार टैंक हमले

गांव पर कब्जा होते ही पाकिस्तानी सेना ने जोरदार जवाबी हमला शुरू कर दिया. पहला हमला: 16 दिसंबर सुबह 8 बजे, दूसरा हमला: दोपहर 12 बजे, ज्यादा टैंकों के साथ और तीसरा हमला: शाम 4 बजे, फिर से भारी टैंक हमला. मेजर होशियार सिंह ने बताया था कि इन हमलों में भारतीय सेना ने 40-45 दुश्मन टैंकों को तबाह कर दिया. इसी लड़ाई के दौरान सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल वीरगति को प्राप्त हुए. अरुण खेतरपाल की जिंदगी पर बनी फिल्म ‘इक्कीस’ हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई है.

300 से 350 दुश्मन सैनिकों का हुआ अंत

16 और 17 दिसंबर को पाकिस्तानी सेना ने दो तरफ से हमला किया. एक ओर टैंक और दूसरी ओर पैदल सेना। इसके बावजूद भारतीय जवान डटे रहे. मेजर होशियार सिंह के मुताबिक, इस भीषण युद्ध में पाकिस्तान के 300 से 350 सैनिक मारे गए और कई टैंक नष्ट कर दिए गए. उन्होंने बताया कि बाद में उन्हें 97 पाकिस्तानी सैनिकों के शव इकट्ठा कर सौंपे गए. इस दौरान वह खुद भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे, लेकिन उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा.

सफेद झंडा और जीत की घोषणा

18 दिसंबर को पाकिस्तानी सेना के एक ब्रिगेड कमांडर ने सफेद झंडा लहराते हुए आत्मसमर्पण किया और अपने सैनिकों के शव मांगे. तब तक दोनों देशों के बीच युद्धविराम की घोषणा हो चुकी थी. भारतीय ब्रिगेड कमांडर जब मौके पर पहुंचे, तब मेजर होशियार सिंह घायल अवस्था में पड़े थे, लेकिन सभी ने माना कि गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने अद्भुत बहादुरी दिखाई.

रिटायरमेंट और अंतिम सफर

मेजर होशियार सिंह 1988 में भारतीय सेना से रिटायर हुए. साल 1998 में 61 साल की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन उनका साहस और बलिदान आज भी हर भारतीय के दिल में जिंदा है. ‘बॉर्डर 2’ के जरिए एक बार फिर देश को अपने असली हीरो की कहानी देखने का मौका मिलेगा. एक ऐसा सैनिक, जो 350 दुश्मनों पर भारी पड़ा और इतिहास में अमर हो गया.

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