रोया-गिड़गिड़ाया,लेकिन राजपाल यादव ने पैसे वापस नहीं किए : राजपाल को जेल भेजने वाले का दावा
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माधव गोपाल अग्रवाल ने दावा किया कि कई बार वे राजपाल यादव के घर जाकर भुगतान की तारीख तय करने की गुहार लगाते रहे। उनके सामने रोए भी।

"रोया-गिड़गिड़ाया,लेकिन राजपाल यादव ने पैसे वापस नहीं किए" : राजपाल को जेल भेजने वाले का दावा

जिस व्यवसायी माधव गोपाल ने अभिनेता राजपाल यादव को पैसे दिए थे, उन्होंने दावा किया है कि वो राजपाल यादव के सामने रोए भी, लेकिन उन्होंने 9 करोड़ रुपये वापस नहीं लौटाए।


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9 करोड़ रुपये के कर्ज मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद अभिनेता राजपाल यादव आज तिहाड़ जेल से बाहर आ रहे हैं। इस बीच,अदालत से मिली इस राहत के बीच उन्हें 5 करोड़ रुपये की मूल राशि उधार देने वाले व्यवसायी माधव गोपाल अग्रवाल ने पूरे विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी है।

एक इंटरव्यू में अग्रवाल ने बताया कि उनकी मुलाकात राजपाल यादव से सांसद मिथिलेश कुमार कठेरिया के जरिए हुई थी। उस समय अभिनेता ने कहा था कि उनकी फिल्म अता पता लापता लगभग पूरी हो चुकी है और यदि फंडिंग नहीं मिली तो प्रोजेक्ट अधूरा रह जाएगा।

अग्रवाल के अनुसार,उन्होंने यह रकम खुद दूसरों से उधार लेकर दी थी। उन्होंने दावा किया कि कई बार वे राजपाल यादव के घर जाकर भुगतान की तारीख तय करने की गुहार लगाते रहे। उनके सामने रोए भी। जब उन्होंने आगे पैसा देने से इनकार किया, तो अभिनेता की पत्नी राधा ने उन्हें संदेश भेजकर भावनात्मक अपील की, जिसके बाद वे दोबारा मदद के लिए तैयार हुए।

बिजनेसमैन अग्रवाल का कहना है कि समझौते में स्पष्ट रूप से लिखा था कि फिल्म की सफलता, सेंसर प्रमाणपत्र या किसी अन्य कारण से भुगतान पर कोई असर नहीं पड़ेगा और तय समय पर पूरी राशि लौटानी होगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि राजपाल यादव ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि यह निवेश नहीं बल्कि कर्ज था, क्योंकि निवेश में व्यक्तिगत गारंटी या चेक नहीं दिए जाते।

समय पर पैसा न मिलने पर उन्होंने अभिनेता से संपर्क किया। उनके मुताबिक, राजपाल यादव ने धन की कमी बताई, जिसके बाद तीन बार पूरक समझौते किए गए और नए चेक जारी किए गए।

इस बीच जब अमिताभ बच्चन ने फिल्म का संगीत लॉन्च किया, तब अग्रवाल को पता चला कि समझौते के अनुसार फिल्म पूरी होने पर नेगेटिव और भुगतान किया जाना था। इसके बाद उन्होंने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने के लिए अदालत का रुख किया।

बाद में राजपाल यादव ने रिलीज से पहले भुगतान में असमर्थता जताई। समझौते के बाद फिल्म की रिलीज पर लगी रोक हटाई गई, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही।

2013 में भी समाधान न निकलने पर अग्रवाल फिर अदालत पहुंचे। अदालत के हस्तक्षेप के बाद 10.40 करोड़ रुपये पर समझौता हुआ, लेकिन जमा किए गए सभी चेक बाउंस हो गए और मामला आगे बढ़ता गया।

माधव गोपाल अग्रवाल का कहना है कि वे एक व्यवसायी हैं और उन्हें केवल अपनी बकाया राशि की वापसी चाहिए।

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