
कैसे बॉलीवुड फिल्में लाती हैं असली सेना की जंग का अनुभव? Border 2, Ikkis और 120 Bahadur में दिखा अंदाज
Indian Army Day 2026 पर जानिए कैसे मिलिट्री कंसल्टेंट्स ने Border 2, Ikkis और 120 Bahadur जैसी फिल्मों में वास्तविकता और सेना की सटीकता लाने में मदद की.
भारतीय सिनेमा हमेशा से ही हमारी सेना और डिफेंस फोर्सेस की वीरता और बहादुरी से प्रेरित रहा है. पहले जहां फिल्मों में ड्रामा और रोमांच ज्यादा दिखाया जाता था, वहीं अब रीयलिटी पर ध्यान देने की प्रवृत्ति बढ़ी है. इसका मुख्य कारण है मिलिट्री कंसल्टेंट्स का फिल्मों में शामिल होना. आज Indian Army Day 2026 के मौके पर हम जानेंगे कि ये कंसल्टेंट्स किस तरह से काम करते हैं और उनकी मदद से फिल्मों में सेना की वास्तविकता कैसे दिखती है. Col Manish Sarin (Retd), जिन्होंने Sam Bahadur, Sarzameen, 120 Bahadur और आने वाली Subedar जैसी फिल्मों में कंसल्टेंट की भूमिका निभाई, कहते हैं, हर सीन के लिए मैं अलग तालिकाएं बनाता हूं. हथियार, यूनिफॉर्म, डायलॉग्स और हर चीज पर ध्यान देता हूं. कहानी पर समझौता नहीं करना और रियलिज़्म भी बनाए रखना महत्वपूर्ण है. पुराने ऐतिहासिक घटनाओं के लिए रिसर्च करता हूं और हाल की घटनाओं के लिए फील्ड में काम करने वाले लोगों से बात करता हूं.
Major Sandeep Sangwan (Retd), जो Pippa, Emergency और Border 2 पर काम कर चुके हैं, बताते हैं कि उनका काम स्क्रिप्टिंग स्टेज से शुरू होता है. हम स्क्रिप्ट में किसी भी चीज़ को सेना के नियमों के हिसाब से गलत पाएं तो उसे सुधारते हैं. सिनेमा में कुछ आज़ादी होती है, लेकिन कुछ चीज़ें गैर-समझौता होती हैं. शूट पर हम यूनिफॉर्म और रैंकिंग की सटीकता पर नजर रखते हैं. Brigadier Brijendra Singh (Retd) ने Ikkis में कंसल्टेंट की भूमिका निभाई. Poona Regiment से आने वाले ब्रिगेडियर सिंह का अनुभव Second Lieutenant Arun Khetarpal से जुड़ा था. उन्होंने कहा, सेना बदल रही है, यूनिफॉर्म और बोलने का तरीका बदल रहा है. इसीलिए पुराने समय का अनुभव फिल्म में सही नजरिया लाता है. Ikkis में टैंक को यथासंभव असली जैसा दिखाने में मेरी सलाह ली गई.
Bollywood कहां गलत होता है?
Col Sarin बताते हैं कि पहले फिल्मों में अक्सर ज़्यादा जिंगोइज़्म और उग्र देशभक्ति दिखाई जाती थी. नई पीढ़ी के निर्देशक समझदार हैं. वो जानते हैं कि हर चीज़ में जोर-शोर नहीं होना चाहिए. कंसल्टेंट्स उनकी मदद करते हैं. Major Sangwan कहते हैं, पहले फिल्मों में ऐसा दिखाया जाता था कि एक ग्रेनेड पूरे टैंक को उड़ा देता है. असल में ऐसा नहीं होता. अब निर्माता यथार्थवाद की ओर बढ़ रहे हैं और यह शुरुआत Lakshya जैसी फिल्मों से हुई. 120 Bahadur के निर्देशक Razneesh Ghai कहते हैं, अगर फिल्म सच्चाई और ईमानदारी से बनाई गई है तो फिल्म और कंसल्टेंट्स के बीच ज्यादा संघर्ष नहीं होता. कभी-कभी रिसर्च अलग हो सकती है, लेकिन टीम मिलकर सर्वोत्तम समाधान निकालती है.
Director Tejas Vijay Deoskar, जिन्होंने Ground Zero (2025) बनाई, कहते हैं, फिल्म को कंसल्टेंट्स के दिशानिर्देशों के अनुसार बनाना पड़ता है. आप ऐसी आज़ादी नहीं ले सकते जो उनके मार्गदर्शन के खिलाफ हो. ये सहयोग का काम है, रचनात्मक स्वतंत्रता और वास्तविकता का संतुलन बनाए रखता है. Major Sangwan भी ये कहते हैं कि रोमांस जैसी चीज़ों के लिए क्रिएटिव लिबर्टी होती है, लेकिन सेना का हिस्सा हमेशा वास्तविकता के अनुसार रखा जाता है.
फिल्म और सेना पर असर
Brigadier Singh बताते हैं, सही तरीके से सेना का चित्रण करने में मदद मिलती है. हमें हास्य का पात्र नहीं बनाना चाहिए. इसलिए कंसल्टेंट्स हर फिल्म में ज़रूरी हैं, चाहे फिल्म में सेना का हिस्सा छोटा ही क्यों न हो. मिलिट्री कंसल्टेंट्स बॉलीवुड की युद्ध फिल्मों में वास्तविकता, सटीकता और भावनात्मक प्रभाव लाने में बेहद अहम हैं. Border 2, Ikkis और 120 Bahadur जैसी फिल्में दर्शकों को सिर्फ मनोरंजन नहीं देतीं, बल्कि वास्तविक सेना जीवन और घटनाओं का सम्मान भी करती हैं.

