
Bollywood का सांप्रदायिकरण? ए आर रहमान बोले, नहीं मिल रहा पहले जैसा काम, VHP ने कहा, करें घर वापसी
रहमान से जब सवाल किया गया कि 1990 के दशक में बालीवुड में आने के बाद क्या उन्हें कभी भेदभाव का सामना करना पड़ा है तो उन्होंने कहा, तब उन्हें ऐसा कुछ महसूस नहीं हुआ. लेकिन पिछले आठ सालों में हालात बदल गए हैं.”
ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान ने कहा है कि पिछले कुछ सालों में उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से पहले की तुलना में कम काम मिल रहा है. उनका कहना है कि बीते आठ सालों में इंडस्ट्री के भीतर ताकत का संतुलन बदल गया है. ए.आर. रहमान ने कहा कि शायद सांप्रदायिकता भी इसकी वजह हो सकती है, हालांकि उन्होंने ये स्पष्ट किया कि उन्होंने सामने से ये बातें कभी महसूस नहीं की है.
8 सालों में बदल गया बॉलीवुड
ए.आर. रहमान ने बीबीसी एशियन नेटवर्क को इंटरव्यू दिया है. उन्होंने इस इंटरव्यू में कहा उन्हें यह बातें अक्सर कानाफूसी के जरिए पता चलती हैं. रहमान ने कहा,“मैं काम ढूंढने नहीं जाता हूं. मैं चाहता हूं कि काम खुद मेरे पास आए. मुझे लगता है कि काम के पीछे भागना मेरे लिए उचित नहीं है.” रहमान से जब सवाल किया गया कि 1990 के दशक में बालीवुड में आने के बाद क्या उन्हें कभी भेदभाव का सामना करना पड़ा है तो उन्होंने कहा, तब उन्हें ऐसा कुछ महसूस नहीं हुआ. “शायद उस समय मुझे इन बातों का पता ही नहीं चला, या भगवान ने मुझे इससे दूर रखा. लेकिन पिछले आठ सालों में ऐसा महसूस हुआ है कि हालात बदल गए हैं.”
रहमान ने कहा, “आजकल ऐसे लोग फैसले ले रहे हैं जो खुद रचनात्मक नहीं हैं. यह भी हो सकता है कि इसमें कोई सांप्रदायिक सोच शामिल हो, लेकिन ये बातें खुलकर सामने नहीं आती है. कभी-कभी मुझे बताया जाता है कि मुझे फिल्म के लिए चुना गया था, लेकिन बाद में म्यूज़िक कंपनी ने अपने ही पांच संगीतकारों को काम दे दिया. मैंने सोचा ठीक है, मुझे थोड़ा आराम मिल गया, परिवार के साथ समय बिता लूंगा.”
रहमान ने कई सुपरहिट हिंदी फिल्मों में दिया संगीत
ए आर रहमान ने कहा कि दक्षिण भारत से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में आने वाले वे पहले ऐसे संगीतकार थे, जो बॉलीवुड में लंबे समय तक टिक पाए. उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए बिल्कुल नई दुनिया थी. मुझसे पहले इलैयाराजा सर ने कुछ हिंदी फिल्में की थीं, लेकिन वे ज्यादा मशहूर नहीं थीं. ऐसे में मुझे वहां अपनाया जाना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी.” रहमान ने कहा, कि मणिरत्नम की फिल्में ‘रोज़ा’, ‘बॉम्बे’ और ‘दिल से’ जरूर पसंद की गईं, लेकिन उत्तर भारत में असली पहचान उन्हें सुभाष घई की फिल्म ‘ताल’ (1999) से मिली. उन्होंने कहा, “‘ताल’ आज भी उत्तर भारत में यह लोगों की यादों और दिलों में बसी हुई है.”
सुभाष घई के कहने पर सीखी हिंदी
रहमान ने बताया कि सुभाष घई ने उन्हें एक सलाह दी थी. उन्होंने कहा, “मैं हिंदी नहीं बोल पाता था. तमिल लोगों के लिए हिंदी सीखना आसान नहीं होता. लेकिन सुभाष घई ने मुझसे कहा अगर तुम्हें यहां लंबे समय तक काम करना है तो हिंदी सीख लें. इसके बाद मैंने न सिर्फ हिंदी, बल्कि उर्दू भी सीखने का फैसला किया, क्योंकि पुराने हिंदी गीतों की जड़ें उर्दू में हैं.”
छावा पर रहमान की सफाई
कलाकार के तौर पर रहमान ने कहा एक कलाकार के तौर पर वह उन फिल्मों से दूरी बनाने की कोशिश करते हैं, जिनकी नीयत में खोट है. इंटरव्यू में उनसे विक्की कौशल की फिल्म ‘छावा’ के बारे में भी पूछा गया, जिसे कुछ लोग विवादित मानते हैं. इस फिल्म में संगीत देने पर रहमान ने कहा, “यह फिल्म कुछ हद तक लोगों को बांटने वाली है, लेकिन इसका मकसद बहादुरी दिखाना था. मैंने निर्देशक से पूछा था कि आपको मेरी जरूरत क्यों है. उन्होंने कहा, हमें सिर्फ आप ही चाहिए. ” रहमान ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि लोग फिल्मों से आसानी से बहक जाते हैं. लोगों के पास अपनी समझ होती है. वे जानते हैं कि क्या सच है और क्या दिखावा.”
वीएचपी बोली, रहमान कर लें घर वापसी
ए आर रहमान के इस बयान पर उनकी आलोचना भी शुरू हो चुकी है. विश्व हिंदु परिषद के नेता विनोद बंसल ने कहा, रहमान भी उस पंक्ति में शामिल हो गए जिसमें पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी थे. विनोद बंसल ने कहा, रहमान बॉलीवुड को बदनाम कर रहे हैं. उन्हें घर वापसी कर लेना चाहिए फिर काम मिलने लगेगा.

