इतिहास रचते-रचते क्यों अटक गया ISRO का ये रॉकेट? PSLV की नई चुनौती
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इतिहास रचते-रचते क्यों अटक गया ISRO का ये रॉकेट? PSLV की नई चुनौती

ISRO का चार स्टेज का रॉकेट 90% सही काम करता है, फिर फेल हो जाता है. तीसरे स्टेज में रोल रेट डिस्टर्बेंस और फ्लाइट पाथ डिस्टर्ब होने के कारण 16 सैटेलाइट्स सही ऑर्बिट में नहीं पहुंचे.


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ISRO mission fails: जिस रॉकेट को भारत की अंतरिक्ष सफलता की रीढ़ माना जाता है, उसी ने इस बार उम्मीदों को झटका दे दिया। साल 2026 की पहली उड़ान पर निकला PSLV-C62 लक्ष्य से भटक गया और उसके साथ ही अंतरिक्ष में खो गए देश के 16 अहम सैटेलाइट। तीसरे स्टेज में आई तकनीकी गड़बड़ी ने न सिर्फ एक मिशन रोका, बल्कि ISRO के भरोसे और रणनीति पर भी नए सवाल खड़े कर दिए।

रॉकेट ने सुबह 10:18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से उड़ान तो भरी, लेकिन उड़ान के तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी आ गई। इस गड़बड़ी के कारण रॉकेट अपने तय रास्ते से भटक गया और जरूरी रफ्तार हासिल नहीं कर पाया। नतीजतन, DRDO का मुख्य सैटेलाइट EOS-N1 (अन्वेषा) और उसके साथ भेजे गए 15 अन्य सैटेलाइट्स सही कक्षा (ऑर्बिट) में नहीं पहुंच सके। माना जा रहा है कि ये सैटेलाइट्स या तो अंतरिक्ष में खो गए हैं या वायुमंडल में जलकर नष्ट हो चुके हैं।

तीसरे स्टेज में आई तकनीकी समस्या

ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने बताया कि रॉकेट के तीसरे स्टेज (PS3) के आखिर में समस्या सामने आई। उन्होंने कहा कि शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन बाद में रॉकेट की घूमने की गति (रोल रेट) में गड़बड़ी आई और उसका फ्लाइट पाथ बदल गया। इसरो का चार स्टेज का रॉकेट 90% सही काम करता है, फिर फेल हो जाता है. तीसरे स्टेज में रोल रेट डिस्टर्बेंस और फ्लाइट पाथ डिस्टर्ब होने के कारण 16 सैटेलाइट्स (अन्वेषा सहित) सही ऑर्बिट में नहीं पहुंचे. यह लगातार दूसरी असफलता (C61 के बाद) है। ISRO ने कहा है कि पूरे मिशन के डेटा का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है और इसके लिए एक फेलियर एनालिसिस कमिटी बनाई गई है।

आखिर खराबी क्यों आई?

ISRO के शुरुआती संकेतों के मुताबिक समस्या तीसरे स्टेज में लगी सॉलिड फ्यूल मोटर से जुड़ी हो सकती है। संभावित कारण ये हो सकते हैं:-

* रॉकेट की घूमने की गति में अचानक बदलाव

* तय रास्ते से भटकना

* सॉलिड मोटर में दबाव (प्रेशर) कम होना

* नोजल कंट्रोल या कंट्रोल सिस्टम में गड़बड़ी

* कंपन (वाइब्रेशन) की समस्या

यह ध्यान देने वाली बात है कि मई 2025 के PSLV-C61 मिशन में भी तीसरे स्टेज में ऐसी ही समस्या आई थी।

लगातार दूसरी बार तीसरे स्टेज में फेलियर

PSLV-C61 मिशन में तीसरे स्टेज के दौरान चैंबर प्रेशर गिरने से EOS-09 सैटेलाइट खो गया था। उस घटना के बाद ISRO ने पूरे PSLV सिस्टम की समीक्षा की, सुधार किए और रॉकेट को दोबारा उड़ान के लिए तैयार किया, लेकिन PSLV-C62 में भी वही समस्या दोहराई गई। इससे अब PSLV के तीसरे स्टेज की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।

कितना नुकसान?

यह मिशन ISRO के साथ-साथ DRDO, NSIL, भारतीय स्टार्टअप्स और रक्षा क्षेत्र के लिए भी बड़ा झटका है।

PSLV लॉन्च की लागत: 250–300 करोड़ रुपये

DRDO का EOS-N1 (अन्वेषा) सैटेलाइट: 200–400 करोड़ रुपये

15 सह-यात्री सैटेलाइट्स (स्टार्टअप्स, नेपाल, स्पेन आदि): 100–200 करोड़ रुपये

कुल अनुमानित नुकसान: 500 से 800 करोड़ रुपये से ज्यादा

ISRO की साख को भी झटका

PSLV को ISRO का वर्कहॉर्स रॉकेट कहा जाता है। इसकी अब तक करीब 95% सफलता दर रही है और 60 से ज्यादा मिशन सफल रहे हैं। लेकिन लगातार दो असफलताओं (C61 और C62) से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसे को नुकसान हो सकता है। विदेशी ग्राहक कमर्शियल लॉन्च को लेकर दोबारा सोच सकते हैं। भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स का भरोसा प्रभावित हो सकता है और DRDO के लिए अहम रक्षा निगरानी क्षमता में देरी होगी।

देश और रक्षा तैयारियों पर असर

अन्वेषा सैटेलाइट से पाकिस्तान और चीन की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलनी थी। अब यह क्षमता मिलने में देरी होगी। इसके अलावा अंतरिक्ष मलबा (स्पेस डेब्री) बढ़ने का खतरा है, साथ ही 2026 के अन्य बड़े मिशनों जैसे गगनयान और चंद्रयान पर भी असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं

ISRO ने PSLV-C61 मिशन की पूरी फेलियर रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की है। अगस्त 2025 में ISRO प्रमुख ने बताया था कि रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को सौंप दी गई है, लेकिन जनवरी 2026 तक इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि तीसरे स्टेज की सॉलिड मोटर में डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग या टेस्टिंग से जुड़ी कमजोरी हो सकती है, जिस पर और गहराई से काम करने की जरूरत है।

ISRO का भरोसा

ISRO का कहना है कि यह बड़ा झटका जरूर है, लेकिन संगठन पहले भी असफलताओं से सीखकर मजबूत वापसी करता रहा है। डेटा का पूरा विश्लेषण किया जा रहा है और आगे के मिशनों में जरूरी सुधार लागू किए जाएंगे। हालांकि, लगातार तीसरे स्टेज में आई खराबी ने पारदर्शिता और तकनीकी सुधारों को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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