
राघव चड्ढा अब राज्यसभा में आप के उपनेता नहीं, जानें- कैसे होता है चुनाव
आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया है। आखिर उपनेता का चयन कैसे होता है और कैसे काम करता है।
आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में अपने उपनेता राघव चड्ढा को हटा दिया है और उनकी जगह अशोक मित्तल को जिम्मेदारी है। पार्टी के फैसले पर तंज कसते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि उन्हें भले ही खामोश कराया गया हो लेकिन वो हारे नहीं हैं। वहीं आप के प्रवक्ता अनुराग ढांढा ने कहा, '' तुम डर गए हो राघव, मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो।'' ढांढा ने यह भी कहा कि, '' राघव, आप बंगाल के मुद्दे को नहीं उठाते, गुजरात पर कुछ नहीं बोलते, सीईसी के खिलाफ अभियोग वाले प्रस्ताव पर दस्तखत नहीं करते। कहने का अर्थ यह है कि आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा पर पलटकर वार किया है। इन सबके बीच आपको बताएंगे कि संसद के दोनों सदनों में किसी राजनीतिक दल के उपनेता की भूमिका क्या होती है। उनका चयन कैसे होता है और अधिकार क्या हैं।
कोई भी राजनीतिक दल, राज्यसभा या लोकसभा में अपने किस सदस्य को सदन का नेता या उपनेता बनाएगा, यह उसका अधिकार होता है। यानी कि पार्टी का नेतृत्व सदन के नेता और उपनेता का चुनाव करता है। डिप्टी लीडर के चुनाव के लिए पार्टी अपने संसदीय दल की बैठक करती है। इसमें पार्टी ही तय करती है कि किस सांसद की डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी दी जाए। इसके लिए सार्वजनिक तौर पर चुनाव नहीं होता है। सियासी दल उप नेता का चुनाव करने के बाद राज्यसभा सचिवालय को जानकारी देते हैं। ऐसे ही जब उप नेता को हटाया जाता है तब राज्यसभा सचिवालय को पत्र के जरिए जानकारी दी जाती है।
डिप्टी लीडर, सामान्य तौर पर सदन में तब काम करता है जब सदन में पार्टी का मुख्य नेता किसी भी वजह से गैरमौजूद रहता है। यह विधायी कार्यों में सामंजस्य बनाने का काम करता है। डिप्टी लीडर, सदन में पार्टी के स्टैंड को तय करने में मदद करता है। इसके साथ ही पार्टी और राज्यसभा सचिवालय के बीच पुल का काम करता है।
राज्यसभा सचिवालय हर सियासी दल को बोलने के लिए समय तय करता है। इस समय को राजनीतिक दलों की संख्या के आधार पर बांटा जाता है। जिस दल के सदस्य ज्यादा होंगे उस दल को बोलने के लिए ज्यादा समय मिलता है। सदन में पार्टी के नेता या उपनेता राज्यसभा सचिवालय को जानकारी देते हैं कि उक्त विषय पर कौन सांसद बोलेगा। अगर किसी भी सांसद का नाम उस सूची में शामिल नहीं है तो उसके लिए सदन में बोलना संभव नहीं होता।

