आरोपमुक्त केजरीवाल, सवाल पर सवाल :  क्या बीजेपी की राजनीति का आखिरी हथियार भी कुंद हो गया?
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आरोपमुक्त केजरीवाल, सवाल पर सवाल : क्या बीजेपी की राजनीति का आखिरी हथियार भी कुंद हो गया?

द फेडरल देश के खास डिबेट शो 'निष्पक्ष' में विशेषज्ञों ने दिल्ली के कथित शराब घोटाला केस में अरविंद केजरीवाल समेत 23 लोगों के आरोपमुक्त होने को बीजेपी की राजनीति के लिए बड़ा झटका बताया।


दिल्ली शराब घोटाला केस में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 लोगों के बरी होने के फैसले के क्या राजनीतिक मायने हैं? इस पर द फेडरल देश के डिबेट शो 'निष्पक्ष' की होस्ट वरिष्ठ पत्रकार नीलू व्यास ने रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी विभूति नारायण राय, सुप्रीम कोर्ट के वकील सर्वेश त्रिपाठी और राजनीतिक टिप्पणीकार मनीष शर्मा से चर्चा की। चर्चा के दौरान ये बात निकलकर आई कि विपक्ष के नेताओं पर सरकारी एजेंसियों के जरिये शिकंजा कसने की बीजेपी की राजनीति को बहुत बड़ा झटका लगा है।

रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी विभूति नारायण राय ने तो इसे 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' केस माना और कहा कि यह फैसला देकर जज ने बड़ी हिम्मत का काम किया है। राय ने कहा, "इस केस के फैसले से साबित हो गया कि मोदी और शाह की जोड़ी संस्थाओं को नष्ट करने में विश्वास करती रही है।" पूर्व आईपीएस अफसर ने कहा, "लेकिन मुझे इस बात का दुख हुआ कि इस मामले में सिर्फ जांच अधिकारी पर गाज गिराई जा रही है। वह तो बहुत छोटी इकाई है। इस मामले में उससे ज्यादा उन बड़े अफसरों का दोष है जोकि सीबीआई मुख्यालय में बैठे हैं। और उन अधिकारियों को वो आका जोकि नॉर्थ ब्लॉक में बैठे हैं।"

विभूति नारायण राय ने आगे कहा, "यह लोकतंत्र के लिए बड़ा घातक है कि जिस-जिस राज्य में चुनाव हों, वहां विपक्षी नेताओं के पीछे आप सरकारी एजेंसियों को लगा दें।"

सुप्रीम कोर्ट के वकील और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सर्वेश त्रिपाठी ने कहा,"इस केस में राजनीतिक बदले की भावना से किया गया, कोर्ट के फैसले से यह साफ हो गया।" उन्होंने कहा, "कोर्ट के पहले के फैसलों में भी एक साफ बात नजर आती है कि चाहे वो केजरीवाल का मामला हो या राहुल गांधी का मामला हो, विपक्ष के नेताओं पर दोष साबित नहीं होता बल्कि वे बरी होते हैं। लेकिन जिन विपक्षी नेताओं पर दोष सिद्ध होने की आशंका रहती है, वो बीजेपी में शामिल हो जाते हैं।" त्रिपाठी ने कहा कि यूपी में शंकराचार्य मामले में भी सिर्फ आरोप लगाकार उन्हें गुनहगार साबित करने की कोशिश हो रही है, उसका भी यही हश्र होगा।

राजनीति तौर पर यह कितना बड़ा टर्निंग पॉइन्ट है?, इस सवाल पर राजनीतिक टिप्पणीकार मनीष शर्मा ने कहा, "हाल के दिनों में तीन बड़े मामले में विपक्ष के नेताओं को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हरियाणा में भूपिंदर सिंह हुड्डा का मामला हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सुप्रीम कोर्ट से बरी हो गए। अब केजरीवाल भी कोर्ट से आरोप मुक्त हो गए। इससे पहले सोनिया गांधी और राहुल गांधी के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने चार्जशीट का संज्ञान लेने से मना कर दिया था। इसे बीजेपी की राजनीति को बहुत बड़ा झटका लगा है। अलग-अलग अदालतों ने इन सभी मामलों में जांच एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई है।"

मनीष शर्मा ने कहा,"असल में बीजेपी हिंदुत्व की राजनीति, अतिराष्ट्रवाद और विपक्षी दलों को भ्रष्ट और वंशवादी बताकर उनकी छवि को धूल धूसरित करने पर ही फोकस रही है। उसकी हिंदुत्व की राजनीति को 2024 के लोकसभा चुनाव में बड़ा झटका लगा। उसके अतिराष्ट्रवाद की ट्रंप ने हवा निकाल दी। अब सारे विपक्ष को भ्रष्ट बताने का उसका खेल कोर्ट में मुंह के बल गिर गया है। इससे बीजेपी की राजनीति ही संकट में पड़ गई है। अब अगर आने वाले समय में आप इसी तरह जांच एजेंसियों के जरिये विपक्ष के नेताओं को टारगेट करेंगे, वो बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से आत्महत्या करने जैसी बात होगी

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