वंदे मातरम् के विरोध में उतरा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, कोर्ट में देगा चुनौती
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वंदे मातरम् गाने के विरोध में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बयान जारी किया

वंदे मातरम् के विरोध में उतरा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, कोर्ट में देगा चुनौती

वंदे मातरम् के छह छंद गाने के केंद्र सरकार के आदेश का विरोध करते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ और असंवैधानिक बताया है।


ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र सरकार द्वारा वंदे मातरम् को गाने का आदेश जारी करने का विरोध किया है।बोर्ड ने एक बयान जारी कर कहा कि यह आदेश असंवैधानिक है और इसको स्वीकार नहीं किया का सकता।इसमें कई छंद धार्मिक हैं और मुसलमान सिर्फ़ अल्लाह को मानता है।हाल ही में एक अधिसूचना जारी कर केंद्र सरकार ने वंदे मातरम् को सरकारी समारोहों, आयोजनों में अनिवार्य रूप से गाने का आदेश जारी किया है।बोर्ड ने इसे न्यायालय में चुनौती देने की बात की है।

मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ है आदेश: बोर्ड-

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र सरकार के उस आदेश पर सवाल उठाते हुए विरोध किया है जिसमें एक अधिसूचना जारी कर सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और आधिकारिक आयोजनों में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के पूरे छह छंदों को गाना अनिवार्य कर दिया गया है।यह निर्देश 6 फरवरी को जारी किया गया था और इसमें ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ से पहले गाने का प्रावधान है।

इस फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने तीखा विरोध जताया है। बोर्ड ने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा है कि इसको स्वीकार नहीं किया जा सकता।बोर्ड ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ बताया है।AIMPLB के अनुसार यह अधिसूचना तुरंत वापस ली जानी चाहिए अन्यथा वे इसे अदालत में चुनौती देंगे।

किसी भी तरह से इसे स्वीकार नहीं किया का सकता: मौलाना फ़ज़लुर्रहीम-

बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद फ़ज़लुर्रहीम मुज़ाद्दीदी ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी कर इसका कड़ा विरोध किया है।मुजाहिदी ने इसे असंवैधानिक और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के ख़िलाफ़ बताया है।साथ ही उसे धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के ख़िलाफ़ भी बताया है।बोर्ड ने इसे मुसलमानों के विश्वास के विपरीत बताते हुए कहा है कि इसको किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता।बोर्ड द्वारा जारी रिलीज़ में मौलाना मुजाहिदी की तरफ़ से यह बताया गया है कि ‘संविधान सभा में रबींद्रनाथ टैगोर के सुझाव पर प्रथम दो पैरा गाने पर ही सहमति बनी थी।यह गीत बंगाल के संदर्भ में लिखा गया है और इसमें दुर्गा और अन्य देवी देवताओं की स्तुति है।’

आदेश वापस नहीं हुआ तो बोर्ड कोर्ट में चुनौती देगा-

बोर्ड द्वारा जारी मौलाना मुज़ाद्दीदी के बयान में बंगाल चुनाव का हवाला देते हुए कहा है कि बंगाल चुनाव को देखते हुए भले ही इसे लागू किया गया हो पर कोई सेक्युलर सरकार एक मत की धार्मिक मान्यताओं को दूसरे पर नहीं थोप सकती है।किसी भी तरह से मुसलमान इसको स्वीकार नहीं कर सकते क्योंकि यह उनकी धार्मिक मान्यताओं से सीधा टकराव है।एक मुसलमान सिर्फ़ अल्लाह को मानता है उसके अलावा किसी को नहीं पूज सकता।कोर्ट का हवाला देते हुए बयान में बताया गया है कि इसके कई पैराग्राफ को धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के ख़िलाफ़ बताए हुए उनको गाने पर रोक लगायी थी।AIMPLB ने कानूनी कार्रवाई की तैयारी की बात कही है और कहा है सरकार इसको तुरंत वापस ले नहीं तो बोर्ड इस आदेश को न्यायालय में चुनौती देगा।

इससे पहले जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बयान जारी कर कहा था कि मुसलमान किसी को ‘वंदे मातरम’ गाने से नहीं रोकते, लेकिन गीत के कुछ छंदों में मातृभूमि को देवी के रूप में चित्रित किया गया है जो इस्लाम के एकेश्वरवाद के सिद्धांत से टकराता है।उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ बताया था और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया था।

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