
अहमदाबाद विमान हादसा: 10 महीने बाद PM को पत्र, ब्लैक बॉक्स डेटा की मांग
260 लोगों की जान लेने वाले AI 171 हादसे के पीड़ितों ने सत्य जानने के लिए प्रधानमंत्री से लगाई गुहार। कहा- मुआवजा नहीं, हमें हादसे का असली कारण जानना है।
AI 171 Crash : अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए दर्दनाक एयर इंडिया विमान हादसे के 10 महीने बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवारों का दर्द कम नहीं हुआ है। 260 लोगों की जान लेने वाली इस त्रासदी के पीड़ितों ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर 'ब्लैक बॉक्स' (Flight Data Recorder) और 'कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर' (CVR) का डेटा सार्वजनिक करने की मांग की है। शनिवार को गुजरात भर से जुटे करीब 30 परिवारों ने एक सुर में कहा कि उन्हें मुआवजा नहीं, बल्कि उस सच की तलाश है जिसने उनके अपनों को उनसे छीन लिया।
क्या था वो खौफनाक मंजर?
12 जून 2025 को एयर इंडिया की उड़ान AI 171 (बोइंग 787-8) अहमदाबाद से लंदन के लिए रवाना हुई थी। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद विमान एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में जा गिरा।
भयानक तबाही: विमान में सवार 242 में से 241 लोगों की मौत हो गई, जबकि जमीन पर मौजूद 19 अन्य लोग भी इस आग की चपेट में आकर जान गंवा बैठे।
जांच की स्थिति: विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने पिछले साल जुलाई में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी। अंतिम रिपोर्ट इस साल जून में हादसे की पहली बरसी के आसपास आने की उम्मीद है।
पीड़ितों की मांग: "हमें पैसा नहीं, सच चाहिए"
अहमदाबाद में जुटे परिवारों ने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि वे तकनीकी कारणों को जानना चाहते हैं।
गोपनीयता और पारदर्शिता: पत्र में मांग की गई है कि यदि डेटा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, तो कम से कम पीड़ित परिवारों के साथ इसे निजी तौर पर साझा किया जाए।
भावुक अपील: हादसे में अपने 24 साल के बेटे को खोने वाले नीलेश पुरोहित ने कहा, "मेरा घर अब खाली महसूस होता है। कोई भी मुआवजा इस कमी को पूरा नहीं कर सकता। हम बस यह जानना चाहते हैं कि उस दिन वास्तव में क्या हुआ था।"
सिस्टम की संवेदनहीनता पर उठे सवाल
परिजनों ने एयर इंडिया और प्रशासन द्वारा दिए जा रहे सहयोग पर भी नाराजगी जताई है।
पहचान में मुश्किल: वासद की किंजल पटेल ने बताया कि एयर इंडिया ने सामान की पहचान के लिए जो वेबसाइट बनाई है, वह बेहद जटिल है। 25,000 से अधिक वस्तुओं की तस्वीरें इतनी धुंधली हैं कि कुछ भी पहचानना नामुमकिन है।
डिजिटल बाधा: खेड़ा के रोमिन वोरा, जिन्होंने अपनी मां, भाई और बेटी को खोया, ने कहा कि ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए केवल ईमेल के जरिए संपर्क करना कठिन है। जवाब मिलने में 15-15 दिन लग रहे हैं।
निजता का हनन: परिजनों ने पीड़ितों के निजी सामान को सार्वजनिक पोर्टल पर प्रदर्शित करने को भी संवेदनहीन करार दिया है।
प्रधानमंत्री को भेजे गए इस पत्र की प्रतियां नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को भी भेजी गई हैं। अब सबकी नजरें केंद्र सरकार के रुख पर टिकी हैं।
(हेडलाइन को छोड़कर, इस स्टोरी को द फेडरल स्टाफ ने एडिट नहीं किया है और यह सिंडिकेटेड फ़ीड से ऑटो-पब्लिश की गई है।)
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