Elvish Yadav को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, स्नेक वेनम केस में FIR रद्द
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Elvish Yadav को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, स्नेक वेनम केस में FIR रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर एल्विश यादव को 2023 के स्नेक वेनम केस में बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की चार्जशीट और अन्य कार्यवाहियों को भी खारिज कर दिया है।


Elvish Yadav: मशहूर यूट्यूबर और बिग बॉस OTT-2 के विजेता एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के चर्चित 'स्नेक वेनम' (सांप का जहर) मामले में एल्विश यादव के खिलाफ दर्ज FIR और उसके बाद की सभी कानूनी कार्यवाहियों को पूरी तरह रद्द कर दिया है। अदालत ने माना कि यह पूरा मामला कानूनी तौर पर टिकने योग्य नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने क्या कहा?

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए साफ किया कि वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत दर्ज की गई शिकायत कानूनन सही नहीं थी। अदालत ने नोट किया कि यह शिकायत किसी 'अधिकृत व्यक्ति' द्वारा दर्ज नहीं कराई गई थी, जो कानूनन अनिवार्य है।

इसके अलावा, अदालत ने पाया कि एल्विश यादव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की जो धाराएं लगाई गई थीं, वे गुरुग्राम में दर्ज एक पुरानी FIR पर आधारित थीं, जिसमें पहले ही 'क्लोजर रिपोर्ट' दाखिल की जा चुकी है। यानी जिस आधार पर नया केस बनाया गया, वह आधार पहले ही खत्म हो चुका था।

NDPS एक्ट पर अदालत की सख्त टिप्पणी

इस मामले में एल्विश पर NDPS (नारकोटिक्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) एक्ट की धाराएं भी लगाने की कोशिश की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। बेंच ने कहा कि सह-आरोपियों से जो तरल पदार्थ (एंटी-वेनम) बरामद किया गया था, वह किसी भी तरह से 'शेड्यूल्ड ड्रग' या प्रतिबंधित नशीले पदार्थ की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए, NDPS एक्ट के प्रावधान इस मामले में लागू ही नहीं होते।

क्या था पूरा मामला?

यह विवाद 22 नवंबर, 2023 को शुरू हुआ था जब नोएडा के एक 'रेव पार्टी' में सांप के जहर के कथित इस्तेमाल को लेकर FIR दर्ज की गई थी। आरोप था कि एल्विश यादव पार्टियों में सांप का जहर सप्लाई करने और उसके इस्तेमाल में शामिल थे। इस मामले में लंबी जांच के बाद 17 मार्च, 2024 को एल्विश यादव को गिरफ्तार किया गया था।

एल्विश ने इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन हाई कोर्ट ने चार्जशीट रद्द करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। पिछले साल 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी और अब अंतिम फैसला सुनाते हुए पूरी FIR ही रद्द कर दी है।

एल्विश के वकील की दलीलें

अदालत में एल्विश यादव के वकील ने मजबूती से पक्ष रखते हुए कहा कि उनके मुवक्किल के पास से न तो कोई सांप मिला, न ही कोई ड्रग्स या नशीला पदार्थ। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जिस व्यक्ति ने खुद को 'एनिमल वेलफेयर ऑफिसर' बताकर FIR दर्ज कराई थी, वह वास्तव में उस पद पर नहीं था। वकील ने कोर्ट को बताया कि एल्विश एक जाने-माने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं और उन्हें केवल मीडिया का ध्यान खींचने के लिए इस मामले में घसीटा गया था।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब एल्विश यादव पर इस मामले से जुड़ा कोई भी कानूनी दबाव नहीं रहेगा। निचली अदालत द्वारा संज्ञान लेने के आदेश और चार्जशीट को भी रद्द कर दिया गया है। यह फैसला उन लोगों के लिए भी एक मिसाल है जो बिना कानूनी आधार के बड़े चेहरों को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं।

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