बजट 2026: AI और सेमीकंडक्टर बनेंगे भारत की नई ताकत, युवाओं के लिए अवसर
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बजट 2026: AI और सेमीकंडक्टर बनेंगे भारत की नई ताकत, युवाओं के लिए अवसर

वित्त मंत्री ने न्यू एज इकॉनमी के लिए खोला खजाना। AI, चिप मेकिंग और डीप टेक को बढ़ावा देने से देश में पैदा होंगी लाखों हाई-स्किल नौकरियां। जानें क्या है खास।


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Budget 2026 For AI : केंद्रीय बजट 2026-27 के जरिए केंद्र सरकार ने भारत की आर्थिक दिशा को पूरी तरह बदलने का संकेत दे दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि भारत अब पारंपरिक उद्योगों से आगे निकलकर 'न्यू एज इकॉनमी' का ग्लोबल हब बनेगा। सरकार का पूरा ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बिग टेक, सेमीकंडक्टर और डीप टेक जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर है। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि आने वाले दशक में नौकरियों का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता युवाओं को उन तकनीकों के लिए तैयार करना है, जिनकी मांग पूरी दुनिया में होगी। सरकार का लक्ष्य है कि भारतीय युवा केवल नौकरी ढूंढने वाले न रहें, बल्कि वे भविष्य की तकनीकों के निर्माता और रोजगार देने वाले बनें।



भारत बनेगा टेक्नोलॉजी का नया पावरहाउस
बजट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भविष्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार माना गया है। सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योगों में AI आधारित समाधानों को बढ़ावा देने के लिए रिसर्च फंडिंग बढ़ाने का बड़ा ऐलान किया है। इसके लिए देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में 'AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित किए जाएंगे। यहां उद्योग जगत और वैज्ञानिक मिलकर नई तकनीकों पर रिसर्च करेंगे। सरकार का मानना है कि डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और साइबर सिक्योरिटी जैसी स्किल्स युवाओं के लिए सफलता की नई कुंजी साबित होंगी। बिग टेक कंपनियों के साथ स्टार्टअप्स की साझेदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।


सेमीकंडक्टर मिशन: आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम
डिजिटल युग में सेमीकंडक्टर चिप्स की भूमिका वही है, जो औद्योगिक युग में स्टील की हुआ करती थी। स्मार्टफोन से लेकर कारों और रक्षा उपकरणों तक, सब कुछ चिप्स पर निर्भर है। बजट 2026 में सरकार ने चिप डिजाइन और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए भारी निवेश का वादा किया है। इसके तहत देश में ही चिप डिजाइनर और प्रोसेस इंजीनियर तैयार करने के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे। जानकारों के मुताबिक, यदि भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनता है, तो यह वैश्विक सप्लाई चेन में एक बड़ी शक्ति बनकर उभरेगा और लाखों हाई-स्किल नौकरियां पैदा करेगा।


भविष्य की नौकरियों के लिए युवाओं की तैयारी
न्यू एज इकॉनमी की नींव अब स्कूल और कॉलेज स्तर से ही रखी जाएगी। सरकार ने शिक्षा प्रणाली में कोडिंग, रोबोटिक्स, गेमिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे विषयों को मजबूती से शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। 'स्किल इंडिया मिशन' के तहत टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवाओं को डिजिटल इकॉनमी से जोड़ने के लिए हाइब्रिड ट्रेनिंग मॉडल अपनाए जाएंगे। सरकार का विशेष फोकस महिलाओं और ग्रामीण युवाओं पर है, ताकि वे भी तकनीक की इस दौड़ में पीछे न रहें। इसके लिए विभिन्न स्कॉलरशिप और स्टार्टअप सपोर्ट योजनाओं का विस्तार किया गया है।


स्टार्टअप और 'ब्रेन गेन' का नया रोडमैप
बजट में स्टार्टअप्स को न्यू एज इकॉनमी का इंजन बताया गया है। डीप टेक सेक्टर जैसे स्पेस टेक और बायोटेक में काम करने वाले स्टार्टअप्स को आसान फंडिंग और रेगुलेटरी सपोर्ट देने की बात कही गई है। वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि इन योजनाओं से भारत 'ब्रेन ड्रेन' (प्रतिभा पलायन) की समस्या को 'ब्रेन गेन' में बदल देगा। यानी अब दुनिया भर का टैलेंट भारत में आकर काम करना चाहेगा। युवाओं के लिए संदेश साफ है कि जो आज नई स्किल्स सीखेंगे, वे कल की ग्रोथ स्टोरी के असली हीरो होंगे। अब नौकरियां केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि लैब और चिप फैक्ट्रियों में भी बड़े अवसर मिलेंगे।


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