P Chidambaram And Shashi Tharoor On Budget 2026 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए 'बजट 2026-27' पर देश के शीर्ष विपक्षी नेताओं ने तीखा हमला बोला है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार की आर्थिक नीतियों को पूरी तरह दिशाहीन करार दिया। चिदंबरम ने तो यहाँ तक कह दिया कि सरकार ने अपने ही 'आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26' की सिफारिशों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट भाषण केवल नए शब्दों और जटिल संक्षिप्ताक्षरों (acronyms) का एक मायाजाल था, जिसमें देश की गिरती मुद्रा, बढ़ते व्यापार घाटे और विदेशी निवेश की कमी जैसे गंभीर संकटों के लिए कोई जगह नहीं थी। विपक्ष के अनुसार, यह बजट न तो विकास की कोई स्पष्ट रणनीति पेश करता है और न ही इसमें वैश्विक चुनौतियों से निपटने की कोई दूरदर्शिता दिखाई देती है।
चिदंबरम का सवाल: क्या वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण पढ़ा है?
पी. चिदंबरम ने बजट की समीक्षा करते हुए कहा कि बजट 2026 'इकोनॉमिक स्टेट्समैनशिप' की कसौटी पर पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा, "मुझे यकीन नहीं है कि सरकार और वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पढ़ा भी है। यदि उन्होंने पढ़ा होता, तो वे उन खतरों को नजरअंदाज नहीं करतीं जो भारतीय अर्थव्यवस्था के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं।"
चिदंबरम ने तीन मुख्य बिंदुओं पर सरकार की घेराबंदी की:
वैश्विक तनाव और निर्यात: अमेरिका द्वारा लगाए गए दंडात्मक टैरिफ से भारतीय निर्यातकों के लिए जो संकट पैदा हुआ है, बजट उस पर पूरी तरह मौन है।
चीन के साथ व्यापार घाटा: भारत का चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा अर्थव्यवस्था को खोखला कर रहा है, लेकिन इसे कम करने की कोई ठोस योजना नहीं दिखी।
विदेशी निवेश का संकट: एफडीआई (FDI) के प्रवाह में अनिश्चितता और पिछले कई महीनों से भारतीय बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का पलायन एक बड़ी चिंता है, जिसे बजट ने छुआ तक नहीं।
रुपये की गिरावट और उबाऊ बजट भाषण
पूर्व वित्त मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि वित्त मंत्री ने अपने लंबे भाषण में रुपये की गिरती कीमत (Depreciation of Rupee) पर एक शब्द नहीं कहा। उन्होंने संसद के भीतर की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि बजट भाषण इतना प्रभावहीन था कि खुद सत्ता पक्ष की तालियाँ भी महज रस्म अदायगी लग रही थीं। यहाँ तक कि 'संसद टीवी' के प्रसारण ने भी कई बार अपनी प्रासंगिकता खो दी क्योंकि लोग इस उबाऊ बजट से जुड़ाव महसूस नहीं कर पा रहे थे।
शशि थरूर ने उठाए तटीय सुरक्षा और केरल की अनदेखी के सवाल
तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने बजट को 'सौतेला व्यवहार' करार दिया। उन्होंने विशेष रूप से केरल और देश की विशाल तटरेखा के प्रति सरकार की बेरुखी पर हमला किया। थरूर ने कहा, "हमारी तटरेखा लगातार खत्म हो रही है। हम समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण अपनी वास्तविक भारतीय भूमि खो रहे हैं। यदि यह हमारी जमीनी सीमा पर घुसपैठ होती, तो इसे 'डिफेंस इमरजेंसी' माना जाता, लेकिन तटीय इलाकों के प्रति सरकार का रवैया उदासीन है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि तटीय समुदायों की सुरक्षा के लिए किसी 'वॉर-फुटिंग' पैकेज की घोषणा न करना यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार केरल की भौगोलिक स्थिति और मछुआरों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है।
आर्थिक रणनीति में फेल रहा बजट 2026
विपक्ष द्वारा बजट का जो आंकलन किया गया है, उसका निष्कर्ष यह है कि ये बजट केवल योजनाओं के नाम बदलने और नए 'हब' बनाने की घोषणाओं तक सीमित है। चिदंबरम के शब्दों में, "एक साधारण अकाउंटेंट के नजरिए से भी यह 2025-26 के सार्वजनिक वित्त प्रबंधन का एक बहुत ही घटिया लेखा-जोखा है।" विपक्ष का मानना है कि यह बजट मध्यम वर्ग और आम आदमी की जेब को राहत देने के बजाय केवल आंकड़ों की बाजीगरी बनकर रह गया है।