लद्दाख के पास शक्सगाम घाटी में चीन की हलचल, क्यों अहम है ये इलाका?
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लद्दाख के पास शक्सगाम घाटी में चीन की हलचल, क्यों अहम है ये इलाका?

शक्सगाम घाटी पर चीन के दावे और सड़क निर्माण से भारत की चिंता बढ़ी है। सियाचिन के करीब यह इलाका भारत-चीन सीमा पर नए तनाव की वजह बन सकता है।


Shaksgam Valley: भारत से चीन कहता है कि दोनों देशों के बीच मतभेद के मुद्दे को मिलजुल कर सुलझाने की जरूरत है। यह बात अलग है कि चीन शायद अपनी बातों पर टिका रहता हो। ताजा मामला लद्दाख स्थित शक्सगाम घाटी का है। चीन के मुताबिक शक्सगाम उसका हिस्सा है और वो उस इलाके में किसी भी तरह के निर्माण कार्य के लिए आजाद है। भारत के ऐतराज का कोई मतलब नहीं है और ना ही उसे ऐसे ऐतराज करना चाहिए। हालांकि भारत ने भी साफ कर दिया है कि शक्सगाम हमारा है और चीन की दखलंदाजी स्वीकार्य नहीं है। ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि शक्सगाम की पूरी कहानी क्या है।

1947 में भारतीय उपमहाद्वीप में दो बड़ी घटनाएं हुईं। एक तरफ भारत आजाद हुआ और साथ ही बंटवारा हुआ। दुनिया के मानचित्र पर पाकिस्तान का उदय हुआ। भारत में जब रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई तो कुछ विवादित रियासतों में से एक जम्मू-कश्मीर था। 1948 में जब पाकिस्तानी फौज ने कबायलियों के भेष में आक्रमण किया तो जम्मू-कश्मीर का कुछ हिस्से पर उसका अवैध नियंत्रण हुआ जिसमें काराकोरम रेंज के उत्तर दिशा स्थित शक्सगाम की घाटी थी। समय गुजरने के साथ पाकिस्तान ने शक्सगाम को 1963 में चीन के हवाले कर दिया। लेकिन भारत का स्पष्ट मत है कि शक्सगाम, जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा था और वर्तमान में लद्दाख का एक इलाका है।

कहां है शक्सगाम घाटी

काराकोरम रेंज से उत्तर में है शक्सगाम घाटी

पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगिट-बाल्टिस्तान के करीब

सियाचिन/अक्साई चिन के करीब

इस इलाके पर चीन का कब्जा, चीन इसे झिजिंयाग का हिस्सा बताता है।

शक्सगाम घाटी का स्थान भारत की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। यह क्षेत्र काराकोरम दर्रे और सियाचिन ग्लेशियर के बेहद करीब स्थित है। सियाचिन, दुनिया का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र है और यहां किसी भी तरह की गतिविधि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ जाती है। अगर चीन इस इलाके में सड़कें या अन्य बुनियादी ढांचा विकसित करता है, तो इससे क्षेत्र में उसकी सैन्य और रणनीतिक मौजूदगी बढ़ना तय है। यह स्थिति भारत के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती बन सकती है।

शक्सगाम घाटी में चीन की बढ़ती गतिविधि

भारत की चिंता केवल आशंका नहीं, बल्कि जमीनी हालात पर आधारित है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन शक्सगाम घाटी में हर मौसम में इस्तेमाल होने योग्य सड़क का निर्माण कर रहा है। बताया जा रहा है कि करीब 75 किलोमीटर लंबी और लगभग 10 मीटर चौड़ी सड़क पहले ही बनाई जा चुकी है। यह इलाका भारत के लिए इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि यहां से सियाचिन ग्लेशियर मात्र 50 किलोमीटर की दूरी पर है। पाकिस्तान पिछले पांच दशकों से सियाचिन पर नजरें गड़ाए हुए है और ऐसे में चीन की मौजूदगी हालात को और जटिल बना सकती है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शक्सगाम घाटी चीन के कानूनी दावे और बुनियादी ढांचे के विस्तार के चलते गलवान घाटी जैसा एक नया संघर्ष क्षेत्र बन सकती है? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चीन ने इस इलाके में अपनी गतिविधियां और तेज कीं, तो भारत-चीन सीमा पर तनाव एक बार फिर गंभीर रूप ले सकता है।

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