कांग्रेस ने INDIA ब्लॉक दलों को रामलीला मैदान की रैली में नहीं बुलाया, विपक्षी एकता पर उठे सवाल
x

कांग्रेस ने INDIA ब्लॉक दलों को रामलीला मैदान की रैली में नहीं बुलाया, विपक्षी एकता पर उठे सवाल

INDIA गठबंधन के कई दल कांग्रेस की लगातार चुनावी हार से निराश हैं। लोकसभा में थोड़ी सफलता के बाद फिर से कांग्रेस की कमजोरी ने साथियों का भरोसा कम किया है।


Click the Play button to hear this message in audio format

कांग्रेस 14 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ एक बड़ी रैली आयोजित करने जा रही है। SIR की देशव्यापी प्रक्रिया के विरोध में होने वाली इस रैली का नाम "वोट चोर गद्दी छोड़" रखा गया है। लेकिन कांग्रेस ने इस कार्यक्रम में INDIA गठबंधन के किसी भी साथी दल को आमंत्रित नहीं किया, जिससे विपक्षी एकता पर सवाल उठने लगे हैं।

कांग्रेस का फैसला

कांग्रेस के सूत्रों ने पुष्टि की कि अभी तक INDIA गठबंधन के किसी भी सहयोगी दल को 14 दिसंबर की रैली में आने का निमंत्रण नहीं भेजा गया है। यह कदम इसलिए अधिक चौंकाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि बिहार SIR के बाद कांग्रेस और उसके सहयोगियों को भारी चुनावी नुकसान हुआ। कांग्रेस ने अपनी हार के लिए खुले तौर पर BJP-नीत NDA पर “इलेक्शन इंजीनियरिंग” का आरोप लगाया। तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल जैसी विपक्ष-शासित सरकारें SIR को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रही हैं। INDIA गठबंधन के कई नेता इसे कांग्रेस की "एकजुट विपक्ष" नीति से पीछे हटने की तरह देख रहे हैं।

विपक्ष की साझा लड़ाई

बिहार में SIR शुरू होने के बाद ही विपक्ष ने संसद के मानसून सत्र में मिलकर केंद्र सरकार पर हमला बोला था। “वोट चोरी” के आरोपों को लेकर विपक्ष ने संसद में लंबा गतिरोध पैदा किया था। अब INDIA दलों को समझ नहीं आ रहा कि वही मुद्दा, जिसने विपक्ष को एकजुट किया था, उसी पर कांग्रेस ने एकल प्रदर्शन का रास्ता क्यों चुना। एक INDIA ब्लॉक नेता ने कहा कि कांग्रेस को सभी सहयोगी दलों को बुलाना चाहिए था… यह एक मौका खो दिया गया।

कांग्रेस की चुप्पी

रैली में सहयोगियों को नहीं बुलाने पर कांग्रेस की ओर से कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। लोकसभा में कांग्रेस के चीफ व्हिप मणिकम टैगोर ने केवल इतना कहा कि यह पार्टी का निर्णय है। अगस्त सत्र के बाद हमने तय किया था कि वोट चोरी के खिलाफ तीन महीने का अभियान चलाया जाएगा। 14 दिसंबर की रैली उसी अभियान का अंतिम चरण है। एक अन्य कांग्रेस नेता ने दावा किया कि SIR के खिलाफ आंदोलन शुरू से ही कांग्रेस का अपना अभियान था, जिसमें “5 करोड़ हस्ताक्षर” जुटाए गए थे और इसमें “दूसरी कोई पार्टी इतनी सक्रिय नहीं थी।

गठबंधन समीकरणों का डर?

कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि सहयोगियों को बुलाने से राजनीतिक जटिलताएं पैदा हो सकती थीं, क्योंकि बंगाल में कांग्रेस बनाम TMC है। केरल में कांग्रेस बनाम वामदल है और असम, पुडुचेरी और तमिलनाडु में भी अगले साल चुनाव होने हैं। इसीलिए कुछ दल भी संभवतः इस रैली में भाग लेने से कतराते।

सहयोगियों की बेचैनी

INDIA गठबंधन के कई दल कांग्रेस की लगातार चुनावी हार से निराश हैं। लोकसभा में थोड़ी सफलता के बाद फिर से कांग्रेस की कमजोरी ने साथियों का भरोसा कम किया है। ऐसे में कुछ सहयोगी दल शायद निमंत्रण मिल भी जाता, तब भी रैली से दूरी बनाए रखते।

‘संभावना’ बाकी

कांग्रेस के कुछ सूत्रों का कहना है कि संभव है कि संसद के शीतकालीन सत्र से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे INDIA दलों के शीर्ष नेताओं से बातचीत कर रैली में शामिल होने का निमंत्रण दे दें। अभी तक कोई निमंत्रण नहीं भेजा गया है, लेकिन पार्टी में इस पर विचार चल रहा है।

दिल्ली की हवा बनेगी बड़ी चुनौती?

INDIA गठबंधन की राजनीति से अलग, रैली को लेकर कांग्रेस के भीतर एक और चिंता बढ़ रही है। दिल्ली का प्रदूषण और GRAP-4 प्रतिबंध है। कांग्रेस को आशंका है कि केंद्र सरकार या दिल्ली की BJP-नेतृत्व वाली एजेंसियां “प्रदूषण” का कारण बताकर रैली की अनुमति रद्द कर सकती हैं या कड़े प्रतिबंध लगा सकती हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि BJP इस मुद्दे का इस्तेमाल रैली को नाकाम करने के लिए कर सकती है।

Read More
Next Story