भारत- अमेरिकी ट्रेड डील पर घमासान, टैरिफ रद्द होते ही कांग्रेस का प्रहार
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भारत- अमेरिकी ट्रेड डील पर घमासान, टैरिफ रद्द होते ही कांग्रेस का प्रहार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ रद्द होने के बाद कांग्रेस ने मोदी से भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता रोकने और आयात उदारीकरण पर स्पष्टीकरण की मांग की।


कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि वे भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की शर्तों पर पुनर्विचार करें और इसे फिलहाल स्थगित रखें। यह मांग ऐसे समय में उठी है जब एक दिन पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को रद्द कर दिया। कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जब तक ट्रंप प्रशासन स्थिति स्पष्ट नहीं करता, तब तक आयात प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

रमेश ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे ट्रंप के इस बयान से सहमत हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा। कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि भारत-अमेरिका अंतरिम समझौता किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा और जब तक पूरी स्पष्टता नहीं मिलती, तब तक इस समझौते को रोक दिया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण की मांग

रमेश ने कहा, “हम मांग करते हैं कि प्रधानमंत्री स्पष्ट रूप से कहें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हम आयात उदारीकरण नहीं करेंगे। भारत की नीति पर पुनर्विचार हो रहा है और जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक आयात उदारीकरण नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 2 फरवरी को राष्ट्रपति ट्रंप ने समझौते की घोषणा करते हुए कहा था कि वे इस डील से खुश हैं और प्रधानमंत्री के अनुरोध पर यह तत्काल प्रभाव से लागू हो रही है। उन्होंने जोर दिया कि घटनाक्रम की समय-रेखा महत्वपूर्ण है।

‘प्रधानमंत्री ने जल्दबाजी क्यों की?’

जयराम रमेश ने सवाल उठाया, “प्रधानमंत्री को इस घोषणा में इतनी जल्दबाजी क्यों थी?” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा चीन और पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरावणे की किताब को लेकर उठाए गए मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए ट्रंप से यह घोषणा करने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि यह लोकसभा में राहुल गांधी की टिप्पणियों से जुड़ा था। उस मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए प्रधानमंत्री ने ट्रंप से यह घोषणा करने का आग्रह किया।

कानूनी अड़चनों के बावजूद समझौता क्यों?

रमेश ने कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया है। उन्होंने सवाल किया कि जब प्रधानमंत्री और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को दिसंबर से ही पता था कि कभी भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ सकता है और टैरिफ रद्द हो सकते हैं, तो फिर इतनी जल्दबाजी में समझौता क्यों किया गया? उन्होंने कहा कि 10 प्रतिशत टैरिफ आयात पर लगाया जाना था, जो कानून के तहत 150 दिनों के लिए प्रभावी रहता। “ट्रंप ने कहा है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हम प्रधानमंत्री से पूछना चाहते हैं कि क्या वे अपने मित्र के इस बयान से सहमत हैं?”

पृष्ठभूमि

रमेश ने बताया कि समझौते के ढांचे में यह प्रावधान है कि यदि किसी भी पक्ष की ओर से कोई बदलाव होता है तो अमेरिका और भारत अपने दायित्वों में संशोधन कर सकते हैं।इस बीच, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ रद्द किए जाने के बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर समझौता करने का आरोप लगाया और कहा कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में उनका विश्वासघात उजागर हो गया है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह व्यापार समझौता प्रधानमंत्री की “बेताबी और आत्मसमर्पण” का परिणाम है, जो देश के लिए “कठिन परीक्षा” बन गया है।

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के प्रमुख आर्थिक एजेंडे को झटका देते हुए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से, मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स द्वारा लिखे गए फैसले में कहा कि दुनिया भर के देशों पर लगाए गए टैरिफ अवैध थे और राष्ट्रपति ने व्यापक शुल्क लगाते समय अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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