
‘किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा’, UGC नियम विवाद पर केंद्र सरकार ने तोड़ी चुप्पी
UGC 2026: विवाद के बीच सरकार ने छात्रों को भेदभाव से बचाने का आश्वासन दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर निगरानी शुरू कर दी है। लेकिन फिलहाल देशभर में चर्चा और प्रदर्शन जारी है।
Controversy over UGC new rules: कभी-कभी एक नियम सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि पूरे देश के छात्रों की भावनाओं में भूचाल ला देता है। UGC के नए 2026 नियम ने ठीक ऐसा ही किया। दिल्ली से लेकर छोटे शहरों तक छात्र सड़कों पर उतर आए हैं, धरने और प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए छात्रों को आश्वासन दिया कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह विवाद सिर्फ नियमों का है या कुछ और गहरी चिंता भी इससे जुड़ी है?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सभी छात्रों और अभ्यार्थियों को भरोसा दिलाया है कि किसी के साथ भेदभाव या उत्पीड़न नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कानून का कोई भी दुरुपयोग नहीं किया जाएगा। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि मैं सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी के साथ उत्पीड़न या भेदभाव नहीं होगा। कोई भी कानून का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकेगा, चाहे वह UGC हो, राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार। जो भी होगा, संविधान के दायरे में होगा। किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट भी इस पूरे मामले पर निगरानी रख रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी को डिस्क्रिमिनेशन के नाम पर परेशान नहीं किया जाएगा और सभी व्यवस्था संविधान के अनुसार ही लागू होगी।
विवाद का कारण
UGC ने 2026 में ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता बढ़ाने के नियम’ (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) जारी किए हैं। इसके मुख्य बिंदु हैं:-
1. हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में Equity Committees और Equity Squads बनाए जाएंगे।
2. सभी संस्थानों में 24x7 हेल्पलाइन और शिकायत प्रणाली स्थापित होगी।
3. SC और ST वर्ग के छात्रों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिलेगा।
4. नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों की मान्यता रद्द की जा सकती है या उनके फंड पर रोक लगाई जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
UGC के नियम 3(सी) के खिलाफ याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि नए नियम जनरल (अनारक्षित) वर्ग के अभ्यार्थियों और शिक्षकों के साथ जाति आधारित भेदभाव कर रहे हैं। याचिका के अनुसार, नए नियम SC, ST और OBC वर्ग को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं, जबकि जनरल वर्ग के अभ्यार्थियों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। इसके कारण कई छात्रों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

