UGC नियमों पर विरोध, क्या है विवाद की असली वजह? AI WITH SANKET
x

UGC नियमों पर विरोध, क्या है विवाद की असली वजह? AI WITH SANKET

UGC के नए नियम भेदभाव को रोकने और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं। जनरल कैटेगरी छात्रों और कुछ नेताओं ने भेदभाव का आरोप लगाया है। नियम लागू हो चुके हैं, लेकिन विवाद और राजनीतिक बहस अभी भी जारी है।


Click the Play button to hear this message in audio format

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (UGC) के नए नियमों पर बहस तेज हो गई है। 'The Federal' से बातचीत में विशेषज्ञ अरन्या शंकर ने बताया कि UGC ने कैंपसों में भेदभाव को रोकने के लिए “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” लागू किए हैं। इसके तहत नए संरचनात्मक नियम बनाए गए हैं, लेकिन इसका विरोध जनरल कैटेगरी के छात्रों द्वारा किया जा रहा है। इस विवाद को कई लोग अलग उच्च शिक्षा सुधार प्रस्ताव (VBSA/HECI) से भी जोड़कर देख रहे हैं, जिससे भ्रम बढ़ा है।

नया UGC नियम

इसे “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” कहा गया है। समानता नियम 2012 से मौजूद हैं, लेकिन नया नियम ROHITH Vemula और Payal Tadvi जैसे मामलों और कोर्ट की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। नए नियमों का उद्देश्य जाति, वर्ग, लिंग, आर्थिक स्थिति, धर्म, जन्मस्थान आदि के आधार पर भेदभाव को पूरी तरह खत्म करना है। भेदभाव की परिभाषा को विस्तारित किया गया है यानी इसमें केवल स्पष्ट भेदभाव ही नहीं, बल्कि असपष्ट/गुप्त भेदभाव भी शामिल होगा।


कैंपसों का स्ट्रक्चर

1. Equal Opportunity Centre

हर उच्च शिक्षा संस्थान में स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र नीति बनाएगा और भेदभाव कम करने के लिए पहल करेगा।

2. Equity Committee

10 सदस्यीय समिति, अध्यक्ष संस्थान का प्रमुख (ex-officio) होगा। सदस्यों में फैकल्टी, गैर-शिक्षण स्टाफ, छात्र प्रतिनिधि, सिविल सोसायटी के सदस्य और Equal Opportunity Coordinator शामिल होंगे।

3. Equity Squad और Equity Ambassadors

Equity Squad कैंपस में संवेदनशील जगहों पर निगरानी करेगा। वहीं, Equity Ambassadors हॉस्टल और विभागों में नोडल अधिकारी होंगे और रिपोर्ट Equal Opportunity Coordinator को देंगे।

भेदभाव की शिकायत आने पर प्रक्रिया

शिकायत 24x7 हेल्पलाइन या गोपनीय रूप से भी आ सकती है। Equity Committee को शिकायत मिलने के 24 घंटे में बैठक करनी होगी। समिति को 15 कार्यदिवसों में रिपोर्ट तैयार कर प्रमुख को सौंपनी होगी। रिपोर्ट मिलने के 7 दिनों में संस्थान प्रमुख कार्रवाई शुरू करेंगे। यदि मामला आपराधिक हो तो पुलिस को भी रिपोर्ट किया जा सकता है। समय सीमा न पालन करने पर संस्थान को UGC स्कीम से बाहर किया जा सकता है या डिग्री-संबंधी कार्यों पर रोक लगाई जा सकती है।

विरोध क्यों?

मुख्य विरोध जनरल कैटेगरी छात्रों से है। छात्रों का कहना है कि इसमें “कुछ भी शामिल हो सकता है” और बिना ठोस कारण शिकायतें हो सकती हैं। OBC, SC, ST, महिलाओं और विकलांगों का जिक्र है, लेकिन “जनरल कैटेगरी” का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। 15 दिन में रिपोर्ट, 7 दिन में कार्रवाई – छात्रों का कहना है कि संस्थान सिर्फ दिखावे के लिए कार्रवाई कर सकते हैं। नियम जातिगत असमानता को कम करने के लिए बनाए गए हैं, समिति में 10 सदस्य हैं और जरूरी नहीं कि केवल सूचीबद्ध समूहों तक ही सीमित रहे।

झूठी शिकायतों का प्रावधान

2025 के ड्राफ्ट में झूठी शिकायतों पर जुर्माना और अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान था। वर्तमान नियमों में यह क्लॉज हटा दिया गया, जिससे कुछ लोग दुरुपयोग की चिंता जता रहे हैं। 2012 से अपील प्रणाली मौजूद है और अब भी जारी है।

नियम लागू

UGC के ये नए इक्विटी नियम तुरंत लागू हो गए हैं। “रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन” आरोप पर UGC या शिक्षा मंत्रालय की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि आरोप गलत हैं और यदि कोई समस्या होगी तो उसका समाधान किया जाएगा। शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने समान आरोप उठाए हैं।

शिकायत निवारण

अपील प्रक्रिया अभी भी है। रिपोर्ट मिलने के 30 दिन के भीतर ओम्बड्समैन के पास अपील की जा सकती है। ओम्बड्समैन अपील को 30 दिन में निपटाने की कोशिश करेगा (पहले 90 दिन का समय था)।

नियम भेदभाव-विरोधी हैं और इसमें धर्म को भी शामिल किया गया है। समिति का जोर जाति समूहों (SC/ST/OBC), महिलाओं और विकलांगों पर है। विशेषज्ञ अरन्या शंकर का कहना है कि यह मुख्यतः जाति-केंद्रित है, लेकिन अपील करने वालों की सीमा व्यापक है।

UGC नियम और HECI/VBSA बिल में अंतर

UGC इक्विटी नियम पहले से लागू हैं। VBSA/HECI एक अलग प्रस्तावित बिल है। VBSA के तहत कई संस्थाओं को एक केंद्रीय आयोग में बदल दिया जाएगा, फंडिंग निर्णय मंत्रालय के पास जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केंद्रीकरण बढ़ाएगा और राज्य प्रतिनिधित्व कम करेगा, जबकि शिक्षा Concurrent List में है।

Read More
Next Story