
नौकरी के बदले जमीन केस में लालू परिवार पर आरोप तय, लालू-तेजस्वी समेत 41 का नाम
लैंड फॉर जॉब केस में शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव, तेजप्रताप यादव और तेजस्वी समेत 41 लोगों पर आरोप तय किया। अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी।
CBI की चार्जशीट के मुताबिक, लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान रेलवे में नौकरी के बदले जमीनें ली गईं। आरोप है कि करीब 200 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन बेहद कम कीमत पर या गिफ्ट डीड के जरिए लालू परिवार के नाम ट्रांसफर कराई गई।
इस मामले में राबड़ी देवी, मीसा भारती और हेमा यादव की भूमिका को विस्तार से बताया गया है।
राबड़ी देवी की भूमिका क्या है?
CBI ने लालू यादव को डायरेक्ट बेनिफिशियरी बताया है मतलब सीधा लाभ उन्हीं को पहुंचा है। सीबीआई की चार्जशाीट बता रही है किराबड़ी देवी के नाम पर कई कीमती जमीनें कराई गईं।
नौकरी के बदले जमीन के जिन प्रमुख मामलों का सीबीआई की चार्जशीट में जिक्र है, उसके मुताबिक- पटना के किशुन देव राय ने 3,375 वर्गफुट जमीन 3.75 लाख रुपये में राबड़ी देवी के नाम की। बदले में उनके परिवार के राजकुमार सिंह, मिथिलेश कुमार और अजय कुमार को रेलवे में ग्रुप-D की नौकरी मिली।
महुआबाग के संजय राय ने 3.75 लाख रुपये में जमीन दी। बदले में उनके घर के दो लोगों को रेलवे में नौकरी मिली।
पटना के हजारी राय ने 9,527 वर्गफुट जमीन दिल्ली की कंपनी एके इन्फोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को 10.83 लाख रुपये में बेची। बदले में उनके दो भतीजों को वेस्ट सेंट्रल रेलवे जबलपुर और साउथ ईस्टर्न रेलवे कोलकाता में नौकरी मिली।
पटना के लाल बाबू राय ने मई 2015 में 1,360 वर्गफुट जमीन 13 लाख रुपये में राबड़ी देवी के नाम की। उनके बेटे लाल चंद कुमार को 2006 में नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे जयपुर में नौकरी मिल चुकी थी। CBI का कहना है कि यह सौदा नौकरी मिलने के वर्षों बाद कराया गया।
CBI के अनुसार, ये सभी डील राबड़ी देवी ने अपने निजी स्टाफ हृदयनंद चौधरी और ललन चौधरी के जरिए कराईं।
हृदयनंद चौधरी कौन हैं और उनकी भूमिका क्या है?
हृदयनंद चौधरी बिहार के गोपालगंज जिले के इटवा गांव के निवासी हैं। वे लालू यादव के घर गौशाला में काम करते थे और ईस्ट सेंट्रल रेलवे में सब्स्टीट्यूट के तौर पर ग्रुप-D की नौकरी कर चुके हैं।
CBI और ED के मुताबिक, हृदयनंद की भूमिका जमीन ट्रांसफर के मध्यस्थ और लाभार्थी के रूप में सामने आई है।
मार्च 2008 में बृज नंदन राय ने 3,375 वर्गफुट जमीन हृदयनंद को 4.21 लाख रुपये में दी। बाद में 13 फरवरी 2014 को यही जमीन हृदयनंद ने गिफ्ट डीड के जरिए लालू यादव की बेटी हेमा यादव के नाम ट्रांसफर कर दी। उस वक्त जमीन की कीमत करीब 62 लाख रुपये आंकी गई।
CBI का आरोप है कि हृदयनंद ने नौकरी पाने वालों से जमीन सस्ते में ली और बाद में लालू परिवार को ट्रांसफर की, ताकि ट्रेल छिपाई जा सके।
हेमा यादव पर क्या आरोप हैं?
CBI के अनुसार, हेमा यादव ने हृदयनंद चौधरी से जमीन गिफ्ट के रूप में ली। यह जमीन नौकरी के बदले में हासिल की गई थी।
ED का कहना है कि राबड़ी देवी और हेमा यादव ने चार जमीनें नौकरी पाने वालों से बेहद कम कीमत पर लीं। कुछ जमीनें बाद में करोड़ों रुपये में बेची गईं और पैसा अलग-अलग कंपनियों में लगाया गया।
हेमा यादव की भूमिका जमीन के बाद के ट्रांसफर और बिक्री में बताई गई है।
मीसा भारती की भूमिका क्या है?
CBI ने मीसा भारती पर आरोप लगाया है कि उन्होंने रेलवे की नौकरी के बदले जमीनें अपने नाम कराईं। 2007 में किरण देवी ने अपनी जमीन मीसा भारती को बेची और 2008 में उनके बेटे को सेंट्रल रेलवे मुंबई में नौकरी मिल गई।
मीसा भारती ने दावा किया कि जमीनें उन्हें रिश्तेदारों से गिफ्ट में मिली थीं, लेकिन जांच में ये लोग अजनबी पाए गए। CBI का कहना है कि गिफ्ट डीड और शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर जमीन ट्रांसफर को छिपाया गया।
कंपनी के जरिए जमीन ट्रांसफर का तरीका
CBI और ED की जांच के मुताबिक, कुछ जमीनें सीधे राबड़ी देवी के नाम कराई गईं, जबकि कुछ जमीनें पहले निजी कंपनी एके इन्फोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम रजिस्टर्ड की गईं।
यह कंपनी लालू यादव के करीबी अमित कात्याल ने 2006-07 में बनाई थी। कंपनी के नाम पर कोई वास्तविक कारोबार नहीं हुआ, बल्कि इसका इस्तेमाल जमीन जमा करने के लिए किया गया।
2014 तक कंपनी के पास करीब 63 करोड़ रुपये की संपत्ति थी, जिसे सिर्फ 1 लाख रुपये में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को ट्रांसफर कर दिया गया। बाद में राबड़ी देवी कंपनी की डायरेक्टर बनीं।
CBI के तीन मुख्य आरोप
पहला, 2004 से 2009 के बीच 12 लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई और बदले में परिवार के नाम सात जमीनें ट्रांसफर कराई गईं।
दूसरा, इन नौकरियों के लिए कोई विज्ञापन नहीं निकाला गया।
तीसरा, कई मामलों में आवेदन मिलने के तीन दिन के भीतर ही नियुक्ति दे दी गई। कुछ नियुक्तियों में पते और दस्तावेज अधूरे पाए गए।
CBI चार्जशीट में क्या कहा गया?
CBI ने लैंड फॉर जॉब घोटाले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
CBI के मुताबिक, रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले जमीनें सर्कल रेट पर ली गईं, जबकि उस समय जमीन का बाजार मूल्य सर्कल रेट से चार से छह गुना ज्यादा था। जमीन की कीमत जानबूझकर कम दिखाई गई ताकि उसे कम दाम में लालू परिवार के नाम किया जा सके।
क्या है लैंड फॉर जॉब स्कैम?
CBI का आरोप है लालू के रेल मंत्री (2004 से 2009) रहते हुए लैंड फॉर जॉब स्कैम हुआ था। सीबीआई के मुताबिक लालू परिवार के सदस्यों के नाम पर जमीन और प्रॉपर्टी ट्रांसफर कराई गई। जमीनों के बदले ये नौकरियां मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर जोन में दी गई।
सीबीआई के अनुसार, लालू के परिवार ने बिहार में 1 लाख स्क्वायर फीट से ज्यादा जमीन महज 26 लाख रुपये में हासिल कर ली। उस समय के सर्कल रेट के अनुसार जमीन की कीमत करीब 4.39 करोड़ रुपये थी। कम पैसों में जमीन लेने के बाद ज्यादातर केस में जमीन मालिक को कैश में भुगतान किया गया।

