सुनवाई के लिए हाई कोर्ट पहुंचे केजरीवाल, आबकारी नीति मामले में अपडेट
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पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)

सुनवाई के लिए हाई कोर्ट पहुंचे केजरीवाल, आबकारी नीति मामले में अपडेट

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष दायर रिक्यूजल आवेदन के सिलसिले में दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे...


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दिल्ली उच्च न्यायालय सोमवार को आबकारी नीति मामले में पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य के पक्ष में पारित दोषमुक्ति (डिस्चार्ज) आदेश के खिलाफ सीबीआई द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई फिर से शुरू करेगा। केजरीवाल हाईकोर्ट पहुंच चुके हैं और उम्मीद है कि वह व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष दलील पेश कर मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने (रिक्यूजल) की मांग करेंगे।

रिक्यूजल का अर्थ होता है, जब किसी पक्ष को यह लगता है कि जज निष्पक्ष (न्यूट्रल) नहीं रह पाएंगे, जैसे कि किसी पक्ष से उनका व्यक्तिगत, व्यावसायिक या पूर्व संबंध रहा हो तो वह अदालत में रिक्यूजल आवेदन देता है। किसी न्यायाधीश (जज) से यह अनुरोध करना कि वह किसी विशेष मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लें।

पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?

सीबीआई की ओर से पेश भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पहले तब आपत्ति जताई थी, जब केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा था। "माननीय अदालत एक सप्ताह से अधिक का समय न दे, हमारे पास तात्कालिकता है। यह एक असाधारण आदेश है। हम आदेश पर कड़ी आपत्ति जताते हैं। इसे आवश्यक समय से एक सेकंड भी अधिक रिकॉर्ड पर नहीं रहना चाहिए," एसजी मेहता ने कहा। "उन्हें जवाब दाखिल करने दें", अदालत ने उत्तर दिया।


वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन ने मांगे गए समय के खिलाफ उठाई गई आपत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह समझ नहीं पा रहे हैं कि इससे उन्हें क्या नुकसान होगा। "एक अनुचित आदेश प्राप्त करने के बाद यह एक अनुचित अनुरोध है," एसजी मेहता ने तर्क दिया। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन ने कहा, "यह ठीक नहीं है कि आप अदालत को अनुचित कहें, आप कार्यवाही को अनुचित कहें, सब कुछ अनुचित है।"

हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी के खिलाफ की गई ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों पर रोक लगा दी थी, जिसमें उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश का निर्देश भी शामिल था। कोर्ट ने कहा कि आबकारी नीति मामले में सीबीआई के जांच अधिकारी पर ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां प्रथम दृष्टया मौलिक रूप से गलत थीं। 27 फरवरी को, एक ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया सहित सीबीआई मामले में सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था।

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