डिजिटल अरेस्ट कर 75 वर्षीय बुजुर्ग से 1.43 करोड़ की लूट, 8 दिन खौफ
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साइबर ठगी का एक और मामला, करोड़ों की ठगी

'डिजिटल अरेस्ट' कर 75 वर्षीय बुजुर्ग से 1.43 करोड़ की लूट, 8 दिन खौफ

फर्जी अधिकारी बताया दावा किया कि बुजुर्ग के आधार कार्ड पर मुंबई में एक मोबाइल नंबर पंजीकृत है, जिसका उपयोग महिलाओं को अश्लील वीडियो भेजने के लिए किया गया है...


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डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों के बीच अहमदाबाद से एक डरा देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक 75 वर्षीय बुजुर्ग को साइबर ठगों ने न केवल 8 दिनों तक उनके ही घर में 'डिजिटल अरेस्ट' करके रखा। बल्कि डरा-धमकाकर उनसे ₹1.43 करोड़ भी ठग लिए। जब तक पीड़ित को वास्तविकता का अहसास हुआ, तब तक जालसाज अपनी साजिश में कामयाब हो चुके थे।

TRAI अधिकारी बनकर शुरू हुआ ठगी का खेल

ठगी की शुरुआत 2 अप्रैल को हुई, जब बुजुर्ग के पास 'अनुज' नाम के व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को TRAI का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि बुजुर्ग के आधार कार्ड पर मुंबई में एक मोबाइल नंबर पंजीकृत है, जिसका इस्तेमाल महिलाओं को अश्लील वीडियो भेजने के लिए किया गया है। इसके तुरंत बाद, खुद को मुंबई साइबर क्राइम का अधिकारी 'विजय खन्ना' बताने वाले एक अन्य व्यक्ति ने बुजुर्ग को वीडियो कॉल किया।

एजेंसी के लोगो और 'नरेश गोयल केस' का दिखाया डर

जालसाजों ने खुद को असली दिखाने के लिए वीडियो कॉल पर अपना चेहरा नहीं दिखाया और प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए केवल एजेंसी का लोगो प्रदर्शित किया। बुजुर्ग को पूरी तरह डराने के लिए ठगों ने उनके एटीएम कार्ड की जानकारी साझा की और दावा किया कि 'नरेश गोयल मनी लॉन्ड्रिंग' मामले में जो 247 एटीएम कार्ड जब्त हुए हैं, उनमें एक कार्ड पीड़ित का भी है।

ठगों ने आरोप लगाया कि बुजुर्ग ने ₹2 करोड़ के अवैध लेनदेन पर 10% कमीशन लिया है। खौफ पैदा करने के लिए व्हाट्सएप पर एक फर्जी 'अरेस्ट वारंट' भी भेजा गया और गिरफ्तारी की धमकी दी गई।

शेयर बिकवाकर ठगे ₹1.43 करोड़

घबराए हुए बुजुर्ग से ठगों ने उनके बैंक खातों और निवेश की पूरी जानकारी ले ली। इसके बाद अपराधियों ने दबाव डालकर उनके पोर्टफोलियो के सभी शेयर बिकवा दिए और कुल ₹1.43 करोड़ की रकम ट्रांसफर करवा ली। बैंक के अधिकारियों को शक न हो, इसके लिए बुजुर्ग को सलाह दी गई कि वे कहें कि यह पैसा ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले अपने बेटे को भेज रहे हैं। ठगों ने इसके लिए एक फर्जी विदेशी नंबर भी उपलब्ध कराया था।

8 दिन बाद खुला राज

9 अप्रैल को सारी रकम ट्रांसफर होने के बाद आरोपियों ने अपने फोन बंद कर लिए। संपर्क टूटने पर जब बुजुर्ग ने अपने भतीजे को पूरी बात बताई, तब उन्हें समझ आया कि वे एक सोची-समझी साइबर साजिश का शिकार हुए हैं। फिलहाल, अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की सघन जांच जारी है।

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