
ट्रंप ने मादुरो को उठवाया तो भारत के लोग सोशल मीडिया पर कह रहे– 'शुक्रिया इंदिरा, वाजपेयी और राव!'
वेनेजुएला की घटना ने दुनिया को याद दिलाया कि एक देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए परमाणु शक्ति कितना महत्वपूर्ण है। भारत ने अपने नेताओं की दूरदर्शिता और साहस के दम पर यह शक्ति हासिल की।
जब दुनिया वेनेजुएला में राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी की खबर से दंग थी, भारत के लोग सोशल मीडिया पर इसे देख कर सोच रहे थे कि 'हम सुरक्षित क्यों हैं?' इसका जवाब साफ है, क्योंकि हम 'परमाणु शक्ति' संपन्न देश हैं। 'स्माइलिंग बुद्धा' से लेकर 'पोखरण-II तक', भारत ने अपनी संप्रभुता की डोर ऐसी मजबूत बनाई कि कोई भी ताकत इसे आसानी से चुनौती नहीं दे सकती। वेनेजुएला की घटना ने याद दिला दिया कि न्यूक्लियर पावर सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि राष्ट्र की गरिमा और सुरक्षा की गारंटी है।
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स का कहना है कि अगर वेनेजुएला के पास परमाणु हथियार होते तो अमेरिका शायद इतनी हिम्मत नहीं करता। इसके साथ ही कई लोग भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी का शुक्रगुजार हैं, जिन्होंने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश बनाया। सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा कि भारत की संप्रभुता सुरक्षित होने का कारण न्यूक्लियर हथियार हैं। एक यूजर ने लिखा कि अगर इंदिरा गांधी ने स्माइलिंग बुद्धा परीक्षण नहीं कराया होता तो भारत भी वेनेजुएला जैसी स्थिति में हो सकता था।
भारत का परमाणु सफर
भारत का पहला सफल परमाणु परीक्षण 'स्माइलिंग बुद्धा' था, जिसे 18 मई 1974 को राजस्थान के पोखरण में इंदिरा गांधी की सरकार ने किया। यह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया गया और भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाया। तब अमेरिका ने भारत पर कई प्रतिबंध लगाए, लेकिन भारत ने अपनी स्थिति नहीं बदली।
पोखरण-II
1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के तहत भारत ने पोखरण-II परमाणु परीक्षण किए। यह 'ऑपरेशन शक्ति' के नाम से जाना गया और भारत को पूर्ण परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र घोषित किया। अमेरिका और पाकिस्तान ने इसका विरोध किया और आर्थिक प्रतिबंध लगाए।
भारत के पूर्व नेताओं का योगदान
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने भारत के पूर्व नेताओं के योगदान को याद किया:-
इंदिरा गांधी – भारत को परमाणु क्षमता देने वाली।
एपीजे अब्दुल कलाम और अटल बिहारी वाजपेयी– पोखरण-II परीक्षण को संभव बनाया।
नरसिम्हा राव– 1995 में परीक्षण की तैयारी कराई और वैज्ञानिकों को तैयार रहने के लिए कहा।
मनमोहन सिंह– न्यूक्लियर डील के जरिए भारत की अंतरराष्ट्रीय मान्यता सुनिश्चित की।
यूजर्स का कहना है कि भारत का न्यूक्लियर पावर होना अमेरिका और अन्य ताकतवर देशों के सामने देश की सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है।
सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाएं
एक यूजर्स ने लिखा कि वेनेजुएला को देखकर इंदिरा गांधी के प्रति सम्मान और बढ़ गया। जब अमेरिका हमला करने वाला था, तब भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। दूसरे ने लिखा कि न्यूक्लियर हथियारों की नींव रखने के लिए इंदिरा गांधी को धन्यवाद, पोखरण-II के लिए वाजपेयी को धन्यवाद और न्यूक्लियर डील के लिए मनमोहन सिंह को धन्यवाद। वहीं, तीसरे यूजर ने लिखा कि आज वेनेजुएला को देखकर भारत की शक्ति और सुरक्षा की अहमियत समझ आती है।

