
इतने वोटर कहां गए? SIR के तहत 12 राज्यों में 5 करोड़ से ज्यादा वोटर लिस्ट से गायब
कुल 66,88,636 मृत मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जिनमें से 25.47 लाख उत्तर प्रदेश से और 24.16 लाख चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल से हैं।
चुनाव आयोग द्वारा किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों की संयुक्त मतदाता सूची में 10.2 प्रतिशत की कटौती हुई है। आयोग और उसके राज्य अधिकारियों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 60 लाख से अधिक मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
जब 27 अक्टूबर को SIR के दूसरे चरण की घोषणा की गई थी, तब इन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल मतदाताओं की संख्या 50.99 करोड़ से अधिक थी। इस प्रक्रिया के बाद अब मतदाता सूची घटकर 45.81 करोड़ रह गई है—यानी 5.18 करोड़ से अधिक की कमी। प्रतिशत के हिसाब से यह 10.2 प्रतिशत की गिरावट है।
कुल 66,88,636 मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 25.47 लाख उत्तर प्रदेश से और 24.16 लाख चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल से हटाए गए।
इसके अलावा, SIR प्रक्रिया के दौरान आपत्तियों और जांच (adjudication) के बाद 63.16 लाख नाम और हटाए गए।
SIR का दूसरा चरण अब पूरा हो चुका है, जिसमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, गुजरात, मध्य प्रदेश और गोवा की अंतिम मतदाता सूचियां अलग-अलग तारीखों पर जारी की गईं।
उत्तर प्रदेश आखिरी राज्य था जिसने शुक्रवार को अपनी अंतिम सूची जारी की। इससे पहले बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। अब इन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (करीब 51 करोड़ मतदाताओं) में दूसरा चरण समाप्त हो गया है।
अब बाकी 40 करोड़ मतदाताओं को 17 राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों में कवर किया जाएगा, जहां SIR की शुरुआत संभवतः इस महीने होने वाले पांच विधानसभा चुनावों के बाद होगी।
इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल हैं: आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली व दमन और दीव, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड।
असम में SIR के बजाय “विशेष पुनरीक्षण” 10 फरवरी को पूरा किया गया था।
विभिन्न कारणों से नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया के दौरान समय-सीमा में कई बार बदलाव किया गया। बिहार की तरह ही, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

