
ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की फिराक में ED, सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
ED का आरोप है कि आई-PAC के संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के दौरान जांच में बाधा डाली गई, जबकि टीएमसी ने इस कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया
चुनावी साल में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच ठन गई है। केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ममता बनर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। सोमवार (12 जनवरी) को सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए ईडी ने सीएम ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी और कोलकाता पुलिस आयुक्त के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देने की मांग की है। ईडी ने आरोप लगाया है कि आई-PAC से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान जांच में बाधा डाली गई, सबूतों से छेड़छाड़ की गई और महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट किए गए।
सुप्रीम कोर्ट में दी गई अपनी याचिका में ईडी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर, चल रही तलाशी अभियान के दौरान आई-PAC के संस्थापक प्रतीक जैन के आवास में जबरन दाखिल हुईं।
ईडी के एक सूत्र ने याचिका का हवाला देते हुए कहा,“अधिकारियों ने हमारे अधिकारियों को डराया-धमकाया, तलाशी को रोका और महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप और हार्ड डिस्क जब्त कर लिए।”
एजेंसी ने राज्य प्रशासन पर चोरी, अवैध प्रवेश और सबूत नष्ट करने की कोशिशों का भी आरोप लगाया है।
टीएमसी बोली- राजनीतिक बदले की भावना
ईडी इससे पहले शनिवार को भी शीर्ष अदालत पहुंची थी और छापेमारी के दौरान राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा जांच में बाधा और हस्तक्षेप का आरोप लगाया था। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने केंद्रीय एजेंसी पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया।
टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा,“ईडी ने चुनाव से ठीक पहले एक निष्क्रिय पड़े मामले को फिर से जीवित किया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पार्टी की सूचना संपत्तियों की रक्षा के लिए वहां गई थीं। इसी वजह से अब ये आरोप लगाए जा रहे हैं।”
खुद ममता बनर्जी ने पहले कहा था,“मैं अपनी पार्टी की अध्यक्ष के रूप में प्रतीक जैन के आवास पर गई थी,” और इस बात पर जोर दिया था कि उनकी मौजूदगी राजनीतिक थी, न कि जांच में बाधा डालने के लिए।
आई-PAC मामला चुनावी रणनीति परामर्श से जुड़ी कथित अनियमितताओं से संबंधित है, जिसमें 20 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अवैध फंडिंग प्राप्त करने का आरोप है। ईडी ने इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में सीबीआई जांच की मांग की थी। हालांकि, पिछले शुक्रवार को अदालत कक्ष में अत्यधिक भीड़ होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी और न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष को पीठ छोड़नी पड़ी। इसके बाद सुनवाई को 14 जनवरी के लिए पुनर्निर्धारित किया गया।
ईडी ने बार-बार जांच में बाधा का आरोप लगाया
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दोहराया कि इस घटना की सीबीआई जांच का आदेश दिया जाए और मुख्यमंत्री तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। एजेंसी ने यह भी मांग की कि जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों को बरामद कर सुरक्षित किया जाए, कोलकाता पुलिस में ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को स्थगित या रद्द किया जाए, और अदालत यह सुनिश्चित करे कि राज्य पुलिस भविष्य की जांचों में कोई बाधा न डाले।
ईडी का दावा है कि यह हस्तक्षेप एक बार-बार दोहराया जाने वाला पैटर्न है, जो तब सामने आता है जब जांच से मुख्यमंत्री, उनके मंत्रियों या करीबी सहयोगियों से जुड़ी जानकारी उजागर होने की संभावना होती है।
याचिका में ईडी के हवाले से कहा गया,“यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। पश्चिम बंगाल में एक चौंकाने वाली स्थिति पैदा हो गई है, जहां कानून लागू करने की जिम्मेदारी जिन पर है, वे ही आपराधिक गतिविधियों में मदद करते दिखाई दे रहे हैं।”
आई-PAC छापे को लेकर एजेंसी की सफाई
ईडी के अनुसार, जैन के आवास पर की गई छापेमारी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत पूरी तरह जायज थी। हालांकि आरोप है कि मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तलाशी को रोक दिया और सबूतों पर नियंत्रण कर लिया, जिससे संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा व्यवस्थाएं कमजोर पड़ीं।
एजेंसी ने यह भी कहा कि चूंकि राज्य पुलिस मुख्यमंत्री के अधीन आती है, इसलिए स्थानीय स्तर पर एफआईआर दर्ज करना प्रभावी नहीं होगा और इससे प्रभावशाली लोगों को जांच से बच निकलने का मौका मिल सकता है।
कलकत्ता हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान भी ईडी ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के समर्थकों ने जानबूझकर अव्यवस्था पैदा की, ताकि सुनवाई बाधित हो सके।
टीएमसी ने लीक चैट का हवाला दिया
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने ईडी की कार्रवाई के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप के अपने आरोप को मजबूत करने के लिए एक कथित लीक संदेश साझा किया। पार्टी का दावा है कि यह संदेश गृह मंत्रालय के इशारे पर कार्रवाई की पूर्व योजना को दर्शाता है।
टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने रविवार (11 जनवरी) को एक स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें कथित तौर पर “दादा” कहे गए एक व्यक्ति को संबोधित संदेश दिखाया गया है। इसमें लिखा है कि 13 ईडी अधिकारी और एक साइबर विशेषज्ञ कोलकाता भेजे जा रहे हैं, जहां केंद्रीय जांच एजेंसियों के जोनल कार्यालयों वाले सीजीओ कॉम्प्लेक्स में एक आपात बैठक होनी है। संदेश में यह भी दावा किया गया है कि भेजने वाले ने इस तैनाती को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी से बात की थी।
टीएमसी नेताओं ने इस बात की ओर इशारा किया कि संदेश “दादा” यानी बड़े भाई को संबोधित था, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह कोई सामान्य आधिकारिक जांच नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से प्रेरित अभियान था, जिसे अहम चुनावों से पहले पार्टी की चुनावी रणनीति को कमजोर करने के लिए अंजाम दिया गया।
ईडी और गृह मंत्रालय ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और किसी स्वतंत्र एजेंसी ने अब तक इस संदेश की प्रामाणिकता या स्रोत की पुष्टि नहीं की है।

