सिर्फ वोट नहीं, भविष्य का फैसला, 2026 के चुनाव क्यों हैं सबसे अहम?
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सिर्फ वोट नहीं, भविष्य का फैसला, 2026 के चुनाव क्यों हैं सबसे अहम?

2026 भारत और दुनिया के लिए निर्णायक साल है। 5 राज्यों से लेकर 36 देशों तक चुनाव सत्ता, स्थिरता और वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेंगे।


Elections 2026 साल 2026 भारत और दुनिया दोनों के लिए चुनावी लिहाज़ से बेहद अहम होने जा रहा है। भारत के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे, जहां देश की करीब 17% आबादी अपने लिए नई सरकार चुनेगी। इन राज्यों में भाजपा की चुनौतियां, क्षेत्रीय दलों की मजबूती और गठबंधनों की राजनीति निर्णायक भूमिका निभाएगी। इसी साल बांग्लादेश, नेपाल और इजराइल समेत दुनिया के 36 से अधिक देशों में भी आम चुनाव होने हैं, जिनके नतीजे क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति को प्रभावित करेंगे।

भारत के पांच राज्यों में चुनाव

पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी के सामने चौथी जीत की चुनौती

पिछले 14 वर्षों से सत्ता में रहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) के सामने एक बार फिर भाजपा मुख्य चुनौती के रूप में खड़ी है। यदि 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) जीत दर्ज करती है, तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचेंगी। ऐसा करने वाली वे देश की पहली महिला मुख्यमंत्री होंगी।

हालांकि तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता पांच बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं, लेकिन उनका कार्यकाल लगातार नहीं था। ऐसे में बंगाल का चुनाव केवल सत्ता का नहीं, बल्कि रिकॉर्ड का भी चुनाव होगा।

असम: भाजपा बनाम कांग्रेस का महागठबंधन

असम में पिछले 10 वर्षों से भाजपा (BJP) सत्ता में है और पार्टी तीसरी बार सरकार बनाने की तैयारी में जुटी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते छह महीनों में तीन बार असम दौरा कर चुके हैं। भाजपा का लक्ष्य 126 में से 100 से अधिक सीटें जीतने का है।यहां बांग्लादेशी घुसपैठ, सीमा सुरक्षा और असमिया पहचान जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस ने 8 से 10 पार्टियों के साथ गठबंधन बनाया है, जिसमें वामपंथी और क्षेत्रीय दल शामिल हैं।

तमिलनाडु: जहां 60 साल से कांग्रेस-भाजपा सत्ता से बाहर

तमिलनाडु देश का इकलौता राज्य है, जहां पिछले 60 वर्षों से न तो कांग्रेस (Congress) और न ही भाजपा (BJP) की सरकार बनी है। यहां द्रविड़ राजनीति हावी रही है।भाजपा इस बार AIADMK के साथ गठबंधन कर सकती है, जबकि सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK के मैदान में उतरने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

केरल: वामपंथ का आखिरी किला

केरल देश का एकमात्र राज्य है, जहां अभी भी लेफ्ट फ्रंट सत्ता में है। आमतौर पर यहां हर चुनाव में सत्ता बदलने की परंपरा रही है, लेकिन 2021 में वाम मोर्चे ने इस परंपरा को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। कांग्रेस इस बार एंटी-इनकम्बेंसी को भुनाने की कोशिश में है। वहीं भाजपा अब तक केरल में एक भी विधानसभा (Kerala Assembly Elections) सीट नहीं जीत पाई है, हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में त्रिशूर सीट जीतना और दिसंबर 2025 में तिरुवनंतपुरम नगर निगम में जीत दर्ज करना उसके लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

पुडुचेरी: छोटी विधानसभा, बड़ा राजनीतिक संदेश

देश की सबसे कम सीटों वाली विधानसभा पुडुचेरी में 2021 में कांग्रेस सरकार गिरने के बाद AINRC-BJP गठबंधन सत्ता में आया और एन. रंगासामी मुख्यमंत्री बने। यह पहली बार था जब भाजपा सत्ता में सीधे तौर पर भागीदार बनी। अब कांग्रेस DMK के साथ गठबंधन कर वापसी की कोशिश कर रही है और सरकार गिरने के मुद्दे को एंटी-इनकम्बेंसी में बदलना चाहती है।

दुनिया के 36 से ज्यादा देशों में चुनाव

बांग्लादेश: 35 साल बाद नया प्रधानमंत्री?

शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में पहली बार आम चुनाव हो रहे हैं। शेख हसीना भारत आ चुकी हैं और उनकी पार्टी अवामी लीग पर चुनाव लड़ने का प्रतिबंध है।विपक्षी BNP नेता खालिदा जिया के निधन के बाद पार्टी के चुनाव जीतने की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है। माना जा रहा है कि उनके बेटे तारिक रहमान अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। यदि ऐसा हुआ, तो बांग्लादेश को 35 साल बाद नया प्रधानमंत्री मिलेगा।

नेपाल: जेन-जी आंदोलन के बाद पहली वोटिंग

नेपाल में 5 मार्च को मतदान होगा। यह जेन-जी आंदोलन और सत्ता परिवर्तन के बाद पहला चुनाव होगा। आंदोलन के बाद 10 कम्युनिस्ट पार्टियों ने मिलकर नई नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी बनाई है, जो इस चुनाव में सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही है।

इजराइल: गाजा युद्ध के बाद सत्ता की परीक्षा

फिलिस्तीन-गाजा युद्ध के बाद इजराइल में यह पहला आम चुनाव होगा। बीते कई चुनावों से कोई भी पार्टी स्पष्ट बहुमत नहीं ला पाई है, और इस बार भी गठबंधन सरकार बनने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, जो इजराइल के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेता हैं, के राजनीतिक भविष्य का फैसला भी इसी चुनाव में होगा।

2026 केवल चुनावों का साल नहीं, बल्कि सत्ता, स्थिरता और राजनीतिक दिशा तय करने का साल है चाहे वह भारत के राज्य हों या पड़ोसी और वैश्विक शक्तियां। इन चुनावों के नतीजे आने वाले वर्षों की राजनीति की बुनियाद रखेंगे।

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