AI से बने कंटेंट पर सरकार की सख्ती, लेबल अनिवार्य किया,अवैध सामग्री हटाने की मियाद घटाकर 2–3 घंटे की
x
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की गजट अधिसूचना के अनुसार, अब प्लेटफॉर्म्स को सरकार या अदालत के आदेश पर 36 घंटे की बजाय तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी।

AI से बने कंटेंट पर सरकार की सख्ती, लेबल अनिवार्य किया,अवैध सामग्री हटाने की मियाद घटाकर 2–3 घंटे की

सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए आदेश जारी किया कि वे एआई से तैयार सामग्री पर स्पष्ट रूप से लेबल लगाएं ताकि गैरकानूनी, यौन शोषण वाली या धोखाधड़ी वाली एआई सामग्री रोकने में मदद मिल सके। अवैध और संवेदनशील सामग्री हटाने की समयसीमा में बड़ी कटौती की गई है।


Click the Play button to hear this message in audio format

केंद्र सरकार ने ऐसे संशोधनों को नोटिफिकेशन निकाली है , जिनके तहत एआई से बने कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा और गैरकानूनी सामग्री, जिसमें बिना सहमति बनाए गए डीपफेक भी शामिल हैं, को हटाने की समयसीमा को काफी कम कर दिया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2021 के तहत किए गए ये बदलाव 20 फरवरी से लागू होंगे।

संशोधित नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कुछ श्रेणियों की गैरकानूनी सामग्री हटाने के लिए अब 2–3 घंटे का समय मिलेगा, जो पहले 24–36 घंटे था। अदालत या “उपयुक्त सरकार” द्वारा गैरकानूनी घोषित कंटेंट को 3 घंटे के भीतर हटाना होगा, जबकि बिना सहमति वाली नग्नता और डीपफेक जैसे संवेदनशील कंटेंट को 2 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।

“सिंथेटिक” कंटेंट की परिभाषा

सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) संशोधन नियम, 2026 के अनुसार, सिंथेटिक रूप से जनरेटेड कंटेंट वह “ऑडियो, विज़ुअल या ऑडियो-विज़ुअल जानकारी है, जिसे कंप्यूटर संसाधन का उपयोग कर कृत्रिम या एल्गोरिदमिक तरीके से बनाया, जनरेट, संशोधित या बदला गया हो, इस प्रकार कि वह वास्तविक, प्रामाणिक या सत्य प्रतीत हो और किसी व्यक्ति या घटना को इस तरह दर्शाए कि वह प्राकृतिक व्यक्ति या वास्तविक दुनिया की घटना से अलग पहचान में न आए।”

मंगलवार (10 फरवरी 2026) को एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि नियमों में उन मामूली टच-अप्स के लिए छूट दी गई है, जो स्मार्टफोन कैमरे अक्सर अपने आप करते हैं। अंतिम परिभाषा अक्टूबर 2025 में जारी ड्राफ्ट की तुलना में अधिक संकीर्ण रखी गई है।

सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यदि कोई कंटेंट एआई-जनरेटेड है तो उपयोगकर्ताओं से उसका खुलासा (डिस्क्लोज़र) लिया जाए। यदि सिंथेटिक कंटेंट के लिए ऐसा खुलासा नहीं मिलता, तो कंपनियों को या तो उस कंटेंट पर सक्रिय रूप से लेबल लगाना होगा या बिना सहमति वाले डीपफेक के मामलों में उसे हटाना होगा।

नियमों में एआई-जनरेटेड इमेजरी पर प्रमुख रूप से लेबल लगाने का निर्देश है। ड्राफ्ट में यह प्रस्ताव था कि किसी भी इमेज का 10% हिस्सा इस तरह के डिस्क्लोज़र से ढका हो, लेकिन प्लेटफॉर्म्स की आपत्ति के बाद उन्हें कुछ लचीलापन दिया गया है।

सेफ हार्बर

मौजूदा आईटी नियमों की तरह, नए नियमों का पालन न करने पर प्लेटफॉर्म्स को ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा खोनी पड़ सकती है। सेफ हार्बर वह कानूनी सिद्धांत है, जिसके तहत यूज़र-जनरेटेड कंटेंट होस्ट करने वाली साइट्स को पुस्तक या पत्रिका के प्रकाशक की तरह स्वतः जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता।

नियमों में कहा गया है, “यदि कोई सोशल मीडिया इंटरमीडियरी यह जानता है, या यह स्थापित होता है, कि उसने जानबूझकर इन नियमों के उल्लंघन में सिंथेटिक जानकारी को अनुमति दी, बढ़ावा दिया या उस पर कार्रवाई करने में विफल रहा, तो ऐसे इंटरमीडियरी को इस उप-नियम के तहत ‘ड्यू डिलिजेंस’ का पालन न करने वाला माना जाएगा,” जिससे सेफ हार्बर खोने का संकेत मिलता है।

नियम अक्टूबर 2025 में अधिसूचित एक संशोधन को आंशिक रूप से वापस भी लेते हैं, जिसमें प्रत्येक राज्य को केवल एक अधिकृत अधिकारी को ही टेकडाउन आदेश जारी करने का अधिकार दिया गया था। अब राज्य एक से अधिक ऐसे अधिकारियों को नामित कर सकेंगे। यह बड़े राज्यों की प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया कदम बताया गया है।

Read More
Next Story