जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल–30 सितंबर के बीच, पहली बार डिजिटल तरीके से होगी जनगणना
x
दुनिया की सबसे बड़ी प्रशासनिक और सांख्यिकीय कवायद मानी जाने वाली इस जनगणना में लगभग 30 लाख फील्ड कर्मी शामिल होंगे। (AI generated picture)

जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल–30 सितंबर के बीच, पहली बार डिजिटल तरीके से होगी जनगणना

जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी, पहला, हाउस-लिस्टिंग और आवास जनगणना; और दूसरा, जनसंख्या गणना। यह प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से 28 फरवरी 2027 के बीच चलेगी, जबकि संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की रात 12 बजे होगी।


15 साल बाद रही देश की जनगणना में कब, क्या होना है, सरकार ने इसका शेड्यूल तय कर लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को जनगणना 2027 के पहले चरण की समय-सीमा को औपचारिक रूप से नोटिफाई कर दिया है। इसमें आवास गणना और हाउस-लिस्टिंग (मकानों की सूचीकरण) शामिल है। इसके तहत यह चरण इस वर्ष 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच, प्रत्येक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश द्वारा तय किए गए 30 दिनों की अवधि में आयोजित किया जाएगा।

केंद्र सरकार ने अधिसूचना में कहा कि जनगणना 2027 की हाउस-लिस्टिंग प्रक्रिया में स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प होगा। यह स्व-गणना, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में 30 दिनों की घर-घर जाकर की जाने वाली हाउस-लिस्टिंग प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले 15 दिनों की अवधि में कराई जाएगी।

पहली बार डिजिटल रूप में होगी जनगणना

पहले चरण के कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही उस दशकीय प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत हो गई है, जिसे कोविड महामारी के कारण 2021 में टाल दिया गया था। जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी, पहला, हाउस-लिस्टिंग और आवास जनगणना; और दूसरा, जनसंख्या गणना। यह प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से 28 फरवरी 2027 के बीच चलेगी, जबकि संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की रात 12 बजे (00:00 घंटे) होगी। हालांकि, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश, बर्फ से ढके क्षेत्रों तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के गैर-समकालिक क्षेत्रों के लिए अलग प्रावधान होंगे।

पिछले वर्ष 12 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भारत की जनगणना 2027 कराने के प्रस्ताव को 11,718.2 करोड़ रुपये की लागत के साथ मंजूरी दी गई थी। नवीनतम जनगणना के जनसंख्या गणना चरण में जातिगत पहचान से संबंधित विवरण भी दर्ज किए जाएंगे।

दुनिया की सबसे बड़ी प्रशासनिक और सांख्यिकीय कवायद मानी जाने वाली इस जनगणना में लगभग 30 लाख फील्ड कर्मी शामिल होंगे। यह पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप और निगरानी के लिए एक केंद्रीय पोर्टल का उपयोग किया जाएगा, ताकि डेटा की गुणवत्ता बेहतर सुनिश्चित की जा सके।

सरकार ने पिछले महीने कहा था कि जनगणना के आंकड़ों का प्रसार अधिक बेहतर और उपयोगकर्ता-अनुकूल तरीके से किया जाएगा, ताकि नीति-निर्माण के लिए आवश्यक सभी मापदंडों से जुड़े प्रश्नों के उत्तर एक क्लिक में उपलब्ध हों। सेंसस-एज-ए-सर्विस (CaaS) के तहत मंत्रालयों को स्वच्छ, मशीन-रीडेबल और उपयोग योग्य प्रारूप में डेटा उपलब्ध कराया जाएगा।

जनगणना प्रक्रिया के तहत प्रत्येक घर का दौरा किया जाता है और हाउस-लिस्टिंग व आवास जनगणना तथा जनसंख्या गणना के लिए अलग-अलग प्रश्नावली भरी जाती है। गणनाकर्मी, जो आमतौर पर सरकारी शिक्षक होते हैं और जिन्हें राज्य सरकारें नियुक्त करती हैं, अपनी नियमित जिम्मेदारियों के साथ-साथ जनगणना का फील्डवर्क करेंगे।

पूरी प्रक्रिया के प्रबंधन और रियल-टाइम निगरानी के लिए Census Management & Monitoring System (CMMS) नामक एक पोर्टल तैयार किया गया है। आम जनता, अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में 30 दिनों की हाउस-लिस्टिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले के 15 दिनों में, जनगणना ऐप या पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना कर सकती है। डिजिटल जनगणना के लिए उपयुक्त सुरक्षा प्रावधान भी किए गए हैं।

Read More
Next Story