एपस्टीन फाइल्स : हरदीप पुरी पर AAP का संगीन आरोप, इस्तीफे की मांग!
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एपस्टीन फाइल्स : हरदीप पुरी पर AAP का संगीन आरोप, इस्तीफे की मांग!

"अकेले मिलते थे, घर जाते थे और रिपोर्ट देते थे", अनुराग ढांडा ने ईमेल के साथ घेरा; क्या बाल शोषण के अपराधी की सलाह पर मिली मंत्री की कुर्सी? मोदी सरकार से पूछे 5 कड़े सवाल।


AAP On Hardeep Puri : आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और दुनिया के सबसे बदनाम अपराधियों में शुमार रहे जेफरी एपस्टीन के रिश्तों को लेकर एक ऐसा राजनीतिक विस्फोट किया है, जिसने दिल्ली से लेकर वाशिंगटन तक हड़कंप मचा दिया है। गुरुवार को एक हाई-वोल्टेज प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'आप' के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने दावा किया कि हरदीप पुरी ने एपस्टीन से मुलाकातों को लेकर पूरे देश से सफेद झूठ बोला है। पुरी का आधिकारिक बयान था कि वे केवल एक डेलीगेशन का हिस्सा थे, लेकिन ढांडा ने अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी प्रामाणिक ईमेल चैट्स और दस्तावेज पेश कर इस दावे की धज्जियां उड़ा दीं। इन दस्तावेजों के अनुसार, 2014 से 2017 के बीच हरदीप पुरी और एपस्टीन के बीच कई बार 'वन-टू-वन' यानी व्यक्तिगत मुलाकातें हुई थीं। ढांडा ने आरोप लगाया कि पुरी न केवल एपस्टीन के घर जाते थे, बल्कि उनसे सलाह लेकर उसे 'बेहद लाभदायक' भी बताते थे।




प्रतिनिधिमंडल का 'झूठ' और ईमेल का 'कड़वा सच'

अनुराग ढांडा ने दस्तावेजों के जरिए क्रोनोलॉजी पेश करते हुए बताया कि अक्टूबर 2014 में, जब हरदीप पुरी भाजपा के वरिष्ठ नेता बन चुके थे, उनकी पहली व्यक्तिगत बैठक एपस्टीन के साथ हुई। ईमेल रिकॉर्ड्स से खुलासा हुआ कि एपस्टीन ने पुरी से पूछा था कि उसकी सलाह कितनी उपयोगी रही? इस पर पुरी का जवाब था कि वह सलाह "बेहद फायदेमंद" साबित हुई। ढांडा ने तीखा सवाल दागा कि एक पूर्व अंतरराष्ट्रीय नौकरशाह और सत्ताधारी दल का बड़ा नेता आखिर एक ऐसे व्यक्ति से सलाह क्यों ले रहा था, जो नाबालिगों के यौन शोषण जैसे घिनौने अपराधों में सजा काट चुका था? आप नेता ने कहा कि यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक गहरी और सोची-समझी दोस्ती थी।

"क्या एपस्टीन के 'यस मैन' बन गए थे पुरी?"

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेश किए गए ईमेल के मुताबिक, मुलाकातें केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं थीं। जनवरी 2016 और मई 2017 के बीच कई बार एपस्टीन के कार्यालय से संदेश आया कि "जेफरी न्यूयॉर्क में हैं, क्या आप उनके घर आ सकते हैं?" और हरदीप पुरी हर बार तुरंत राजी हो जाते थे। ढांडा ने तंज कसते हुए कहा, "क्या हरदीप पुरी एपस्टीन की नौकरी कर रहे थे? उनका व्यवहार दर्शाता है कि एपस्टीन उन पर पूरी तरह हावी थे।" जब एपस्टीन समय बदलता था, तो पुरी बिना किसी हिचकिचाहट के हामी भर देते थे। ढांडा ने पूछा कि भारत का कौन सा व्यापार या कौन सा गुप्त समझौता इन मुलाकातों का केंद्र था, इसका जवाब हरदीप पुरी को सार्वजनिक रूप से देना ही होगा।

मंत्री पद का 'इनाम' और अंतरराष्ट्रीय दबाव का रहस्य

आम आदमी पार्टी ने इस मामले को सीधे मोदी सरकार की कैबिनेट से जोड़ दिया है। ढांडा ने कहा कि ये सारी बैठकें हरदीप पुरी के केंद्रीय मंत्री बनने से ठीक पहले हुई थीं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि क्या एपस्टीन की सलाह पर किए गए कामों के इनाम के रूप में ही पुरी को मंत्री की कुर्सी मिली? 'आप' का दावा है कि मोदी सरकार के कुछ मंत्री और शायद खुद प्रधानमंत्री भी किसी ऐसे 'डार्क सीक्रेट' के दबाव में हैं, जो अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है।

"प्राइवेट आइलैंड" का राज और इस्तीफे की मांग

ढांडा ने एक और चौंकाने वाली चैट दिखाई, जिसमें पुरी ने लिखा था कि "कृपया मुझे बताएं जब आप अपने द्वीप (Island) से वापस आ जाएं।" यह वही 'पाप का द्वीप' था। आप नेता ने कहा कि पुरी को सब पता था कि एपस्टीन कौन है, फिर भी उन्होंने नजदीकी बढ़ाई। अब 'आप' ने मांग की है कि हरदीप पुरी को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए और भारतीय एजेंसियों को इन अमेरिकी दस्तावेजों की उच्च स्तरीय जांच करनी चाहिए।

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