
हिमंत बिस्वा सरमा को मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से हाईकोर्ट जाने को कहा
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सीधे सुप्रीम कोर्ट आना हाई कोर्ट की भूमिका को कमजोर करने जैसा है और यह न्यायिक ढांचे के लिए हतोत्साहित करने वाला संदेश देता है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बिगड़े बोल के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कोर्ट ने इंकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से हाईकोर्ट का रूख करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद-32 के तहत दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार करते हुए साफ किया है कि संवैधानिक व्यवस्था में पहले संबंधित हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना जरूरी है.
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमालया बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने याचिकाओं पर सुनवाई की. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सीधे सुप्रीम कोर्ट आना हाई कोर्ट की भूमिका को कमजोर करने जैसा है और यह न्यायिक ढांचे के लिए हतोत्साहित करने वाला संदेश देता है. सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी वादी को बिना उपाय के नहीं छोड़ना चाहती, लेकिन हर मामले को सीधे सुप्रीम कोर्ट में लाना “शॉर्टकट” नहीं बन सकता है. अदालत ने कहा कि अनुच्छेद-226 के तहत हाई कोर्ट को व्यापक अधिकार दिए गए हैं और न्याय तक पहुंच की संवैधानिक व्यवस्था वहीं से शुरू होती है.
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति “आदतन अपराधी” है और संवैधानिक पद की शपथ लेने के बावजूद देश के संवैधानिक मूल्यों को कमजोर कर रहा है. उन्होंने कहा, जब इतने गंभीर आरोप हैं तो अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं हुई. उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें एफआईआर दर्ज करानी है तो वे कहां जाएं, क्योंकि जिस राज्य से मामला जुड़ा है वहां निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद नहीं दिखती. उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें असम के अलावा किसी अन्य हाई कोर्ट में जाने की अनुमति दी जाए, ताकि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो सके.
सीजेआई ने कहा कि संवेदनशील मामलों में हाई कोर्ट उचित तंत्र अपनाने में सक्षम हैं और न्यायिक प्रणाली पर भरोसा बनाए रखना जरूरी है. अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि यदि उन्हें हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलती, तो वे बाद में सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं को संबंधित क्षेत्राधिकार वाले हाई कोर्ट में जाने की छूट दे दी और इसी के साथ सुनवाई खत्म हो गई.
दरअसल हिमंता बिस्वा सरमा के हाल ही में कई मौकों पर “मिया मुस्लिम” (बंगाली बोलने वाले मुसलमानों) के बारे में टिप्पणियाँ कीं, जिसपर विवाद गहरा गया है. इसी वर्ष असम में विधानसभा चुनाव भी होने वाला है.

