मोदी ने ट्रंप को कॉल नहीं किया, इसलिए अटक गई भारत-अमेरिका ट्रेड डील!
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'मोदी ने ट्रंप को कॉल नहीं किया', इसलिए अटक गई भारत-अमेरिका ट्रेड डील!

अमेरिका के वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक का कहना है कि मोदी द्वारा ट्रंप को कॉल न किए जाने से भारत-अमेरिका ट्रेड डील अटक गई।


India US Trade Deal: अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने कहा है कि भारत के साथ व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया। 8 जनवरी को ऑल-इन पॉडकास्ट को दिए एक इंटरव्यू में लटनिक ने बताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील अब तक क्यों पूरी नहीं हो सकी है।

ट्रंप की ट्रेड डील रणनीति

लटनिक ने कहा कि वो भारत से जुड़ी एक कहानी बताते हैं। हमने पहला समझौता ब्रिटेन के साथ किया और ब्रिटेन से कहा था कि उन्हें दो शुक्रवार के भीतर डील फाइनल करनी होगी। क्योंकि उसके बाद ट्रेन स्टेशन से निकल जाएगी। हमारे साथ कई अन्य देश भी बातचीत में शामिल थे। जो पहले आगे बढ़ता है, उसे पहले मौका मिलता है। राष्ट्रपति ट्रंप सौदे सीढ़ी की तरह करते हैं।

उन्होंने आगे कहा जो पहली सीढ़ी पर होता है, उसे सबसे अच्छा सौदा मिलता है। पहले आने वाले के बाद आप सबसे अच्छा सौदा नहीं पा सकते। लटनिक के मुताबिक ट्रंप ऐसा इसलिए करते हैं ताकि देश बातचीत की मेज पर जल्दी आएं।

मोदी से कॉल की उम्मीद

लटनिक ने याद किया कि ब्रिटेन के साथ डील के बाद हर कोई ट्रंप से पूछ रहा था कि अगला देश कौन होगा। राष्ट्रपति कई देशों का नाम ले रहे थे, लेकिन सार्वजनिक तौर पर उन्होंने भारत का नाम भी कई बार लिया। उन्होंने कहा हम भारत के साथ बातचीत कर रहे थे और हमने भारत से कहा था कि आपके पास तीन शुक्रवार हैं। उन्हें इस दौरान डील पूरी करनी थी। लटनिक ने बताया कि वे खुद देशों के साथ बातचीत कर शर्तें तय करते हैं, लेकिन अंतिम सौदा ट्रंप ही करते हैं।

मैंने साफ कहा था कि आपको मोदी की जरूरत है। सब कुछ तैयार है, प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति को कॉल करना होगा। लेकिन भारत इसको लेकर असहज था, इसलिए मोदी ने कॉल नहीं किया,” लटनिक ने कहा।

भारत चूक गया मौका

लटनिक के मुताबिक उस शुक्रवार (2 जनवरी) के बाद अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के साथ व्यापार समझौतों की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका अन्य देशों के साथ भी बातचीत कर रहा था और उसे उम्मीद थी कि भारत उनसे पहले डील पूरी कर लेगा। मैंने उन देशों के साथ ज्यादा दरों पर समझौते कर लिए। अब समस्या यह है कि डील्स ज्यादा टैरिफ पर हो गईं। इसके बाद भारत ने कॉल कर कहा कि अब हम तैयार हैं। मैंने कहा किसके लिए तैयार? यह तो तीन हफ्ते बाद हुआ लटनिक ने कहा।

उन्होंने आगे कहा, क्या आप उस ट्रेन के लिए तैयार हैं जो तीन हफ्ते पहले स्टेशन से निकल चुकी है? लटनिक ने कहा कि भारत इस सी-सॉ (झूले) के गलत तरफ रह गया और समय रहते सौदा नहीं कर सका। बाकी देश लगातार डील करते रहे और भारत लाइन में और पीछे चला गया,” उन्होंने कहा।

बढ़ता टैरिफ दबाव

लटनिक ने बताया कि वे चाहते थे कि भारत के साथ व्यापार समझौता ब्रिटेन और वियतनाम के बीच हो जाए, क्योंकि यही उनकी बातचीत की रूपरेखा थी। भारत को यह याद है और मुझे भी याद है। वे कहते हैं कि आपने सहमति दी थी। मैं कहता हूं तब, अब नहीं। उन्होंने कहा कि भारत अंततः इसे सुलझा लेगा, लेकिन दुनिया में कई देश हैं और सभी की अपनी जटिल घरेलू राजनीति होती है। संसद से मंजूरी लेना भी आसान नहीं होता। ये बेहद जटिल प्रक्रियाएं हैं।

ट्रंप की चेतावनी

लटनिक की ये टिप्पणियां उस बयान के कुछ दिन बाद आई हैं, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि वे भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से नाराज हैं और अमेरिका बहुत तेजी से भारत पर टैरिफ बढ़ा सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय आई जब दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। अब तक इस समझौते को लेकर छह दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं। इस प्रस्तावित समझौते में अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर लगने वाले 50 प्रतिशत टैरिफ को सुलझाने के लिए एक फ्रेमवर्क डील भी शामिल है।

(एजेंसी इनपुट्स के साथ)

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