अरावली में रोक के बावजूद अवैध खनन जारी, सुप्रीम कोर्ट ने दी हालात बेकाबू होने की चेतावनी
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सु्प्रीम कोर्ट ने अरावली की 100 मीटर से छोटी पहाड़ियों पर खनन पर पाबंदी का अपना फैसला कायम रखा है

अरावली में रोक के बावजूद अवैध खनन जारी, सुप्रीम कोर्ट ने दी हालात बेकाबू होने की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय एक्सपर्ट कमेटी गठित करने का फैसला किया। कोर्ट ने राजस्थान सरकार से यह भी आश्वासन लिया कि अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह का खनन नहीं होने दिया जाएगा।


सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि खनन पर रोक के बावजूद अरावली क्षेत्र में अवैध गतिविधियां जारी हैं। अगर इसे तत्काल नहीं रोका गया तो ऐसे हालात बन सकते हैं, जिन्हें बाद में सुधारा नहीं जा सकेगा।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय एक्सपर्ट कमेटी गठित करने का फैसला किया। कोर्ट ने राजस्थान सरकार से यह भी आश्वासन लिया कि अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह का खनन नहीं होने दिया जाएगा।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले से जारी अंतरिम आदेश प्रभावी रहेंगे। चीफ जस्टिस ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ अवैध गतिविधियां अब भी चल रही हैं, जो पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। कोर्ट ने इस मामले में नई रिट याचिकाएं दाखिल करने से भी मना किया और कहा कि उसे पता है कि इस तरह की याचिकाएं किस उद्देश्य से दायर की जा रही हैं।

हस्तक्षेप याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अरावली का इतिहास और इसकी वैज्ञानिक परिभाषा बेहद जटिल है और इसमें भूवैज्ञानिक व टेक्टोनिक पहलुओं को समझना जरूरी है। इस पर कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की जरूरत है और सभी पक्ष चरणबद्ध तरीके से एक्सपर्ट्स के नाम सुझाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई प्रतिद्वंद्वी मुकदमा नहीं है, बल्कि अरावली पर्वतमाला के संरक्षण से जुड़ा मामला है। पीठ ने कहा कि 29 दिसंबर 2025 के आदेश में जिन बिंदुओं पर स्वतः संज्ञान लिया गया था, उन्हें ध्यान में रखते हुए अरावली की परिभाषा और उससे जुड़े वैज्ञानिक, पर्यावरणीय, भूवैज्ञानिक और कानूनी पहलुओं की दोबारा समीक्षा जरूरी हो सकती है।

गौरतलब है कि इससे पहले 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने 100 मीटर से छोटी पहाड़ियों पर खनन की अनुमति दी थी, लेकिन देशभर में विवाद बढ़ने के बाद 29 नवंबर को अपने ही आदेश पर रोक लगा दी गई थी। इसके साथ ही केंद्र सरकार और अरावली क्षेत्र के चार राज्यों राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और हरियाणा को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा गया था।

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