गर्मी का अलर्ट: पश्चिमी विक्षोभ हुआ कमजोर, 40 डिग्री के पार जाएगा पारा
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गर्मी का अलर्ट: पश्चिमी विक्षोभ हुआ कमजोर, 40 डिग्री के पार जाएगा पारा

देश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में गर्मी ने दस्तक दे दी है। महाराष्ट्र के अकोला में पारा 42 डिग्री तक पहुंच गया है, वहीं दिल्ली में 15 अप्रैल के बाद भीषण गर्मी का अनुमान है।


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Weather Update : अप्रैल 2026 की शुरुआत भले ही सुहावनी रही हो, लेकिन अब सूरज के तेवर तीखे होने लगे हैं। मध्य और दक्षिण भारत के एक बड़े हिस्से में भीषण गर्मी का दौर शुरू हो चुका है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले दिनों में देश के कई राज्यों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर सकता है। तापमान में यह अचानक बढ़ोतरी पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने के कारण देखी जा रही है। हिमालयी क्षेत्रों में इन प्रणालियों के सक्रिय न होने से मैदानी इलाकों में ठंडी हवाओं का आना रुक गया है। इसके परिणामस्वरूप आसमान साफ है और सूरज की किरणें सीधे सतह को गर्म कर रही हैं।


महाराष्ट्र के अकोला में पारा 42 के पार
बढ़ती गर्मी का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। पिछले 24 घंटों के दौरान महाराष्ट्र के अकोला में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह इस सीजन के सबसे गर्म दिनों में से एक रहा है। मौसम विभाग के मॉडल संकेत दे रहे हैं कि उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में अधिकतम तापमान में अगले कुछ दिनों में तीन से छह डिग्री की और बढ़ोतरी हो सकती है। साफ आसमान और कम नमी की वजह से सतह के गर्म होने की प्रक्रिया काफी तेज हो गई है। ऐसे में लोगों को अभी से चिलचिलाती धूप और लू का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।

दिल्ली में 15 अप्रैल के बाद बढ़ेगी तपिश
राजधानी दिल्ली में फिलहाल तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जो इस सीजन के लिहाज से सामान्य है। हालांकि, यह राहत बहुत कम समय के लिए है। मौसम पूर्वानुमानों के अनुसार, 15 अप्रैल तक दिल्ली का पारा भी 40 डिग्री के करीब पहुंच सकता है। इस बढ़ती गर्मी के पीछे 'हीट डोम' को एक बड़ा कारण माना जा रहा है। यह एक उच्च दबाव वाली प्रणाली है जो गर्म हवा को वायुमंडल के निचले स्तर पर कैद कर लेती है, जिससे तापमान में निरंतर वृद्धि होती रहती है। दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में आने वाले सप्ताह में गर्मी का अहसास काफी बढ़ जाएगा।

वायुमंडलीय ट्रफ और हीट सेटअप
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने मौजूदा परिस्थितियों के लिए कई वायुमंडलीय ट्रफ (यह एक लंबा और संकरा क्षेत्र है जहाँ हवा का दबाव अपने आसपास के क्षेत्रों की तुलना में कम होता है) को जिम्मेदार ठहराया है। एक प्रमुख ट्रफ उत्तरी मध्य प्रदेश से दक्षिणी तमिलनाडु तक फैली हुई है। यह ट्रफ एक स्थिर और गर्मी के अनुकूल सेटअप बना रही है। ट्रफ कम दबाव वाले क्षेत्र होते हैं जो उच्च दबाव वाले क्षेत्रों के बीच स्थित होकर क्षेत्रीय मौसम को प्रभावित करते हैं। इसके प्रभाव से गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ में लू की स्थिति विकसित होने की संभावना है। धीरे-धीरे यह प्रभाव ओडिशा, मध्य प्रदेश और विदर्भ (महाराष्ट्र) तक फैल जाएगा। तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में भी उमस भरी गर्मी लोगों की परेशानी बढ़ाएगी।

किसानों और आम जनता के लिए सलाह
अप्रैल से जून की अवधि में सामान्य से अधिक तापमान रहने के आसार हैं। इसे देखते हुए अधिकारियों ने निवासियों और किसानों को पहले से सावधानी बरतने की सलाह दी है। ओडिशा में किसानों को सलाह दी गई है कि वे बोरो धान और मूंग जैसी ग्रीष्मकालीन फसलों में हल्की सिंचाई करते रहें ताकि मिट्टी की नमी बनी रहे। छत्तीसगढ़ में किसानों को भीषण गर्मी शुरू होने से पहले ही गेहूं और चने की कटाई पूरी करने का सुझाव दिया गया है। मौसम के बदलते और अनिश्चित पैटर्न को देखते हुए स्वास्थ्य और कृषि संबंधी आधिकारिक परामर्शों का पालन करना बेहद जरूरी हो गया है।


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