
सुला से फ्रातेली तक, कैबर्नेट ने बदली भारत की वाइन पहचान
कैबर्नेट सॉविन्यॉं डे पर भारत ने इतिहास रचा। सुला की वाइन को वैश्विक गोल्ड अवॉर्ड, फ्रातेली और KRSMA जैसी वाइन ने भी विश्वस्तर पर स्थान दिलाया।
हर साल 30 अगस्त को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय कैबर्नेट सॉविन्यॉं डे विश्व की सबसे प्रसिद्ध रेड वाइन अंगूर किस्म के महत्व और इतिहास का उत्सव है। इस बार भारत के पास जश्न मनाने का ठोस कारण है। कभी भारतीय वाइनमेकिंग को कुछ अग्रदूतों की शौकिया पहल और शहरी अभिजात वर्ग का सीमित शौक माना जाता था।लेकिन आज भारत की वाइन कहानी एक प्रयोग भर नहीं रह गई है। यह आत्मविश्वास से भरकर अपनी अलग पहचान बना चुकी है।
शुरुआती दौर में शेनिन ब्लॉ और सॉविन्यॉं ब्लॉ जैसी सफेद वाइन लोकप्रिय हुईं, क्योंकि वे आसान और हल्की थीं। मगर पिछले कुछ वर्षों में रेड वाइन खासतौर पर कैबर्नेट सॉविन्यॉं ने सबका ध्यान खींचा है और भारत को वैश्विक वाइन जगत की गंभीर चर्चाओं में शामिल कर दिया है। यह उपलब्धि वर्षों की मेहनत, अंगूरबागों और वाइनरी में किए धैर्यपूर्ण काम का परिणाम है।
कैबर्नेट सॉविन्यॉं रेड वाइन का राजा
कैबर्नेट सॉविन्यॉं को ‘अंगूरों का राजा’ कहा जाता है। यह दुनिया की सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली रेड अंगूर किस्म है। इसकी खासियत यह है कि यह अलग-अलग जलवायु में आसानी से पनपती है ऑस्ट्रेलिया की गर्म घाटियों से लेकर कैलिफोर्निया के तटीय क्षेत्र, कनाडा के ठंडे पहाड़ी इलाके और लेबनान की उच्च-ऊंचाई वाली बेका वैली तक। हर जगह इसका स्वाद, संरचना और गहराई अलग रूप में सामने आता है।
भारत में यह सबसे पहले महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में लगाया गया, और अब कर्नाटक की हम्पी हिल्स, पुणे और नंदी वैली जैसे इलाकों में भी इसकी खेती होती है। इसकी मोटी खाल और प्राकृतिक टैनिन्स इसे गर्म जलवायु में भी टिकाए रखते हैं। भारतीय मिट्टी और मौसम इसे मुलायम टेक्सचर, पके फलों के स्वाद और संतुलित अम्लता वाली वाइन में बदलते हैं।
भारतीय वाइन का वैश्विक मंच पर प्रवेश
मुंबई की मैजिक सेलर्स की संस्थापक एवं सोमेलियर गर्गी कोठारी बताती हैं, “कैबर्नेट सॉविन्यॉं अंगूर बहुत उम्दा वाइन देते हैं क्योंकि इनमें पॉलीफेनॉल की प्रचुरता होती है और मोटी खाल के कारण संरचना और लंबी उम्र मिलती है।”
पिछले साल भारतीय वाइन उद्योग को बड़ी उपलब्धि तब मिली जब सुला वाइनयार्ड्स की RĀSĀ Cabernet Sauvignon ने लंदन में आयोजित ग्लोबल कैबर्नेट सॉविन्यॉं मास्टर्स 2024 में गोल्ड मेडल जीता। यह पहली बार था जब किसी भारतीय वाइन को इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मिला।
प्रीमियम भारतीय रेड वाइन
RĀSĀ Cabernet Sauvignon (सुला, ₹1850): 14–16 महीने तक फ्रेंच ओक में पकी, इसमें ब्लैककरंट, ऑलिव और वनीला की परतदार खुशबू मिलती है।
J’NOON Red (Fratelli, ₹4500): तीव्र, गहरे स्वाद वाली यह वाइन फ्रांस-अमेरिका के विंटनर जीन-चार्ल्स बॉइस्से के सहयोग से बनी। इसमें कैबर्नेट, सैंजियोवेस और अन्य अंगूर शामिल हैं।
KRSMA Estates Cabernet Sauvignon (हम्पी, ₹1700): मध्यम बॉडी वाली, जिसमें कासिस, लिकोरिस, मोचा और कोको की हल्की झलक मिलती है।
La Réserve (Grover Zampa, ₹1175): 80% कैबर्नेट और 20% शिराज़ का मिश्रण, जिसे भारतीय रेड वाइन का क्लासिक माना जाता है।
Sette (Fratelli, ₹1600): कैबर्नेट और सैंजियोवेस का अनूठा मिश्रण, जिसे भारतीय सुपर-टस्कन कहा जाता है।
भारतीय स्वाद और वैश्विक संदर्भ
भारत की वाइन अब केवल यूरोप की नकल नहीं कर रही, बल्कि अपनी अलग शैली गढ़ रही है। सुला की पुरस्कार विजेता वाइन, फ्रातेली की महत्वाकांक्षी J’NOON और KRSMA की हम्पी से आई अभिव्यक्ति यह साबित करती हैं कि भारतीय अंगूर और मिट्टी से बनी वाइन अब स्थानीय भोजन से लेकर वैश्विक खानपान तक सहजता से मेल खाती है।