GOBARdhan से ग्रीन एनर्जी तक, राज्यों को केंद्र सरकार का बड़ा संदेश
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GOBARdhan से ग्रीन एनर्जी तक, राज्यों को केंद्र सरकार का बड़ा संदेश

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर बढ़ाया है, GOBARdhan, एथेनॉल, EV और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे विकल्पों को तेजी से काम किया जा रहा है।


पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष थमने के कोई संकेत नहीं दे रहा है, और इसके नकारात्मक प्रभाव अब दुनिया भर के ऊर्जा क्षेत्र में साफ दिखाई देने लगे हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। 27 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की और उन्हें वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों—जैसे बायोफ्यूल, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और GOBARdhan (कंप्रेस्ड बायोगैस) जैसी योजनाओं को बढ़ावा देने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने राज्यों से “टीम इंडिया” के रूप में मिलकर काम करने का आग्रह किया, ताकि आयातित ईंधन पर निर्भरता कम की जा सके और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल हो सके।

GOBARdhan योजना पर फोकस

प्रधानमंत्री की बैठक के बाद कम चर्चित GOBARdhan (Galvanising Organic Bio-Agro Resources Dhan) योजना चर्चा में आई है। यह “वेस्ट टू वेल्थ” कार्यक्रम है, जिसकी घोषणा फरवरी 2018 में की गई थी। इसका उद्देश्य पशुओं के गोबर और कृषि अपशिष्ट को कंपोस्ट, उर्वरक, बायोगैस और बायो-CNG में बदलना है। इसे अप्रैल 2018 में जल शक्ति मंत्रालय के जल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा शुरू किया गया था।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ उसे संसाधन के रूप में उपयोग करना, स्वच्छता को बढ़ावा देना, मीथेन गैस को नियंत्रित करना और बीमारियों को रोकना है। इंदौर का GOBARdhan बायो-CNG प्लांट इसका सफल उदाहरण है, जहां जैविक कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदला जा रहा है।

सरकार सामुदायिक बायोगैस प्लांट लगाने के लिए प्रति जिले 50 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता भी दे रही है। जनवरी 2026 तक देश में 189 CBG प्रोजेक्ट और 979 सामुदायिक बायोगैस प्लांट कार्यरत हैं। उत्तर प्रदेश CBG स्थापना में आगे है, जबकि छत्तीसगढ़ सामुदायिक बायोगैस प्लांट में अग्रणी है। मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा और तमिलनाडु भी इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर जोर

हालिया संघर्ष से पहले ही भारत ने वैकल्पिक ऊर्जा पर जोर बढ़ा दिया था। इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका बायोफ्यूल की है।

एथेनॉल

भारत ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को 2025 तक लगभग 20% तक पहुंचा दिया है। कुछ जगहों पर शुद्ध एथेनॉल (E100) का भी उपयोग हो रहा है। बायोडीजल मिश्रण को भी अगले चार वर्षों में 5% तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

ग्रीन हाइड्रोजन

सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन शुरू किया है, जिसका लक्ष्य 2030 तक सालाना 5 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन करना है, ताकि भारत वैश्विक केंद्र बन सके।

बिजली और इलेक्ट्रिक वाहन

सरकार FAME-II, EMPS और PM E-DRIVE जैसी योजनाओं के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से विकसित कर रही है।

अन्य ऊर्जा विकल्प

इसके अलावा प्राकृतिक गैस, मेथनॉल, सौर और पवन ऊर्जा, और लंबी अवधि में परमाणु ऊर्जा भी महत्वपूर्ण विकल्प हैं।

राज्यों की स्थिति

भारत में कुछ राज्य वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी हैं, जबकि कुछ अभी उभर रहे हैं और कुछ पीछे हैं।

अग्रणी राज्य:

महाराष्ट्र एथेनॉल उत्पादन में आगे है और EV नीति में भी मजबूत है। गुजरात ग्रीन हाइड्रोजन और बायोफ्यूल हब के रूप में उभर रहा है। कर्नाटक EV स्टार्टअप्स और सौर ऊर्जा के एकीकरण के लिए जाना जाता है। तमिलनाडु EV निर्माण, पवन ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन में आगे बढ़ रहा है।

क्षेत्र विशेष में अग्रणी

उत्तर प्रदेश एथेनॉल उत्पादन में नंबर एक है। पंजाब फसल अवशेष से बायोफ्यूल बनाने पर ध्यान दे रहा है। हरियाणा 2G एथेनॉल प्लांट और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर में आगे है। आंध्र प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन हब बनने की दिशा में काम कर रहा है।

उभरते राज्य

राजस्थान, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और केरल तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। असम भी नई नीतियों के जरिए प्रगति कर रहा है। हालांकि बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों को अभी अपनी ऊर्जा संरचना मजबूत करनी होगी। छत्तीसगढ़ अभी भी जीवाश्म ईंधन पर निर्भर है, लेकिन GOBARdhan योजना में अच्छी प्रगति की है। ओडिशा भी ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।

पश्चिम एशिया के तनाव ने भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर फोकस और राज्यों की सक्रिय भागीदारी इस दिशा में अहम साबित हो सकती है।

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