
8 अरब डॉलर का Project-75I: भारतीय नौसेना की ताकत और पड़ोसी देशों पर असर
Indian Navy: कराची की घाटियों से लेकर आज भारतीय महासागर की गहराइयों तक, भारत की समुद्री रणनीति अब क्षमता, आत्मनिर्भरता और लंबे समय की रणनीति के माध्यम से नया रूप ले रही है।
Project-75I: साल 1971 के युद्ध में कराची की घाटियों से लेकर आज भारतीय महासागर की गहराइयों तक भारतीय नौसेना की ताकत अब महज रक्षा की नहीं, बल्कि रणनीति और शक्ति का संदेश भी बन गई है। जर्मनी के चांसलर मर्ज के दौरे के दौरान 'Project-75I' की चर्चाएं सिर्फ नौसेना की खरीद तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि यह भारत की सामरिक महत्वाकांक्षा, आत्मनिर्भरता और भविष्य की ताकत का प्रतीक बन गया है। अगली पीढ़ी की 6 डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन, जिनमें एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) जैसी अत्याधुनिक तकनीक होगी, भारत की समुद्री शक्ति को एक नए स्तर पर ले जाएंगी। इतिहास से मिली सीख, पाकिस्तान के साथ हालिया तनाव और समुद्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति, इन सभी ने भारत को एक निर्णायक कदम उठाने के लिए मजबूर किया है।
क्या है एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन?
AIP सिस्टम वाली सबमरीन बिना सतह पर आए हफ्तों तक पानी के अंदर रह सकती है। इससे उनकी पहचान मुश्किल हो जाती है और ऑपरेशन की क्षमता भी बढ़ जाती है।
क्या है Project-75I ?
Project-75I भारतीय नौसेना का प्रमुख कार्यक्रम है, जिसके तहत 6 आधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन बनाई जाएंगी। इनमें फ्यूल-सेल आधारित AIP, एडवांस्ड सेंसर्स, टॉरपीडो और मिसाइल सिस्टम होंगे। रक्षा मंत्रालय ने जुलाई 2021 में इस परियोजना के लिए “Request for Proposal” जारी किया था। यह भारत में नौसैनिक निर्माण और तकनीक हस्तांतरण के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। परियोजना की अनुमानित लागत आरएफपी के समय 40,000 करोड़ रुपये थी, जबकि वर्तमान आकलन के अनुसार यह लगभग 8 अरब डॉलर (लगभग 72,000 करोड़ रुपये) हो सकती है। इसके साथ ही यह भारतीय नौसेना की बढ़ती जरूरतों को पूरा करेगी, क्योंकि चीन और पाकिस्तान की अंडरसी गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।
जर्मन Type-214NG सबमरीन
भारतीय नौसेना ने जर्मनी की Type-214 नेक्स्ट जनरेशन सबमरीन को चुना, जबकि स्पेन की S-80 Plus को नजरअंदाज किया गया। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय मुख्यतः जर्मनी के फ्यूल-सेल आधारित AIP सिस्टम की परिपक्वता, इसकी ध्वनिक छिपाव क्षमता और कम जीवनचक्र जोखिम के कारण लिया गया। Type-214 की AIP तकनीक को परिचालन में सिद्ध माना जाता है, जबकि अन्य प्रतियोगी सिस्टम अभी टेस्ट में हैं। अंडरसी युद्ध में विश्वसनीयता और टिकाऊपन इनोवेशन अधिक मायने रखते हैं।
मेक इन इंडिया पर जोर
प्रस्तावित ढांचे के तहत सभी 6 सबमरीन भारत में माजगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) में बनाई जाएंगी। TKMS जर्मनी से डिजाइन और तकनीकी सलाह देंगे। शुरुआत में स्वदेशी सामग्री का हिस्सा लगभग 45% होगा, जो अंतिम सबमरीन तक लगभग 60% तक बढ़ जाएगा। यह आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। MDL ने पहले Project-75 के तहत Scorpene क्लास की सबमरीन का निर्माण किया था, जिससे उसका अनुभव और विशेषज्ञता इस परियोजना में अहम भूमिका निभाएगी। रक्षा मंत्रालय बार-बार यह रेखांकित कर चुका है कि Project-75I केवल प्लेटफॉर्म खरीदने का मामला नहीं है, बल्कि जटिल सबमरीन डिजाइन और निर्माण तकनीक को आत्मसात करने का भी अवसर है।
समुद्री रणनीति
भारत की अंडरसी क्षमता पर जोर का ऐतिहासिक कारण है। 1971 के युद्ध में कराची बंदरगाह पर हमलों ने पाकिस्तान की समुद्री रसद और ईंधन आपूर्ति को बाधित किया और उसकी हार में तेजी लाई। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी कराची पाकिस्तान की सबसे कमजोर कड़ी बनकर सामने आया। नए सबमरीन के आने से भारत की धमकी की क्षमता और भी बढ़ जाएगी।
चीन का बढ़ता प्रभाव
चीन की नौसेना तेजी से बढ़ रही है, जिसमें न्यूक्लियर पावर वाली सबमरीन भी शामिल हैं, जो भारतीय महासागर में सक्रिय हैं। पाकिस्तान भी चीन की मदद से अपनी सबमरीन शक्ति बढ़ा रहा है। इन चुनौतियों के बीच Project-75I भारत की अंडरसी निगरानी और समुद्री रोध क्षमता को मजबूत करेगा।
मर्ज की भारत यात्रा और रणनीतिक समय
चांसलर मर्ज का दौरा (12–13 जनवरी) जर्मनी की इंडो-पैसिफिक रणनीति को मजबूत करने का हिस्सा है। भारत और जर्मनी एक संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर भी काम कर रहे हैं। Project-75I के लिए समझौता मर्ज की यात्रा के दौरान नहीं होगा, लेकिन आने वाले तीन महीनों में यह संभव है।
Scorpene फॉलो-ऑन योजना पर रोक
अक्टूबर 2025 में भारत ने तीन अतिरिक्त फ्रेंच-Origin Scorpene सबमरीन बनाने की योजना को रोका, जबकि Project-75I को प्राथमिकता दी। नए Type-214NG सबमरीन में AIP सिस्टम, लैंड अटैक क्रूज मिसाइल और नई तकनीक शामिल होगी।
भारतीय नौसेना ताकत
Type-214NG सबमरीन के शामिल होने के बाद भारतीय नौसेना की गुप्त निगरानी, समुद्री रोध और सटीक स्ट्राइक क्षमता में भारी वृद्धि होगी। इसके साथ ही यह परियोजना भारत को भविष्य के स्वदेशी डिज़ाइन और P-76 जैसे फॉलो-ऑन प्रोजेक्ट्स के लिए तैयार करेगी। Project-75I उन फैसलों में से एक है जो वर्षों में भारतीय नौसेना के लिए सबसे महत्वपूर्ण साबित होंगे। यह 1971 की सीख, पाकिस्तान के साथ हाल की वास्तविकताओं और चीन की अंडरसी चुनौतियों को ध्यान में रखकर लिया गया रणनीतिक निर्णय है।

