
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता, टैरिफ घटकर 18 फीसद
भारत और अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं। इसके तहत अमेरिकी टैरिफ 18% होंगे, कई उत्पादों पर शून्य शुल्क और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
India America Trade Deal: भारत और अमेरिका ने शनिवार (7 फरवरी) को घोषणा की कि वे एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) के लिए एक ढांचे पर सहमत हो गए हैं, जिसके तहत नई दिल्ली पर लगाए गए टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा। समझौते के अनुसार, भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ को समाप्त करेगा या कम करेगा। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, पशु आहार के लिए रेड सोरघम, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं।
दोनों देशों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया, “अमेरिका और भारत को यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि वे पारस्परिक और परस्पर लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते के ढांचे पर पहुंच गए हैं।” बयान में यह भी जोड़ा गया कि यह ढांचा 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई व्यापक अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Bilateral Trade Agreement – BTA) वार्ताओं के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। इस व्यापक समझौते में अतिरिक्त बाजार पहुंच से जुड़े प्रावधान होंगे और अधिक मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं को समर्थन मिलेगा।
मुख्य शर्तें और टैरिफ में कटौती
समझौते की प्रमुख शर्तों के अनुसार, अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। अगस्त में पिछले वर्ष अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने के कारण 25 प्रतिशत का पारस्परिक टैरिफ और अतिरिक्त 25 प्रतिशत का शुल्क लगाया था। इन 50 प्रतिशत टैरिफ से भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान हुआ था, क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। टैरिफ में कमी से भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे वस्त्र और परिधान, चमड़ा और फुटवियर, प्लास्टिक और रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प उत्पादों और कुछ मशीनरी के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
किन उत्पादों पर शून्य टैरिफ होगा
संयुक्त बयान के अनुसार, अंतरिम समझौते के सफल निष्कर्ष के बाद जेनेरिक दवाओं, रत्न और हीरे, तथा विमान और विमान पुर्जों सहित कई वस्तुओं पर टैरिफ शून्य कर दिया जाएगा। इससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को और मजबूती मिलेगी। अमेरिका भारत से आने वाले कुछ विमानों और विमान पुर्जों पर भी टैरिफ हटाएगा।
बयान में कहा गया, “इसी तरह, अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप, भारत को ऑटोमोटिव पुर्जों के लिए एक तरजीही टैरिफ दर कोटा मिलेगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित खतरों को समाप्त करने के लिए लगाए गए टैरिफ के अधीन होगा।
दोनों देशों ने यह भी प्रतिबद्धता जताई कि वे पारस्परिक रुचि के क्षेत्रों में एक-दूसरे को निरंतर आधार पर तरजीही बाजार पहुंच प्रदान करेंगे। इसके साथ ही, ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ तय किए जाएंगे ताकि समझौते का लाभ मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को ही मिले।
गैर-टैरिफ बाधाओं और व्यापार विस्तार पर सहमति
दोनों देशों ने उन गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने पर भी सहमति जताई है, जो द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करती हैं, जिसका आकार 191 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। बयान के अनुसार, भारत ने अमेरिकी मेडिकल डिवाइसेज के व्यापार में लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करने पर सहमति दी है। इसके अलावा, नई दिल्ली ने उन प्रतिबंधात्मक आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को समाप्त करने पर भी सहमति जताई है, जो अमेरिकी सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उत्पादों की बाजार पहुंच में देरी करती हैं या मात्रात्मक प्रतिबंध लगाती हैं।
बयान में कहा गया, “पुरानी चिंताओं के समाधान के लिए मिलकर काम करने के महत्व को पहचानते हुए, भारत अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों के व्यापार में मौजूद दीर्घकालिक गैर-टैरिफ बाधाओं को भी दूर करने पर सहमत है।”
इसके साथ ही, भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब अमेरिकी डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा जताया है।
प्रौद्योगिकी और डेटा व्यापार को बढ़ावा
प्रौद्योगिकी क्षेत्र में व्यापार बढ़ाने के लिए भारत और अमेरिका ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPU) और डेटा सेंटरों में उपयोग होने वाले अन्य उत्पादों सहित तकनीकी वस्तुओं के व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे। इसके साथ ही, संयुक्त प्रौद्योगिकी सहयोग का विस्तार किया जाएगा।
तकनीकी नियमों के अनुपालन को आसान बनाने के उद्देश्य से, दोनों देश आपसी सहमति वाले क्षेत्रों में अपने-अपने मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर चर्चा करने की योजना बना रहे हैं।
बयान में कहा गया, “यदि किसी भी देश द्वारा सहमत टैरिफ में कोई बदलाव किया जाता है, तो अमेरिका और भारत इस बात पर सहमत हैं कि दूसरा देश अपनी प्रतिबद्धताओं में संशोधन कर सकता है।” साथ ही यह भी कहा गया कि दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तहत वार्ताओं के माध्यम से बाजार पहुंच के अवसरों को और विस्तारित करने की दिशा में काम करेंगे।
अमेरिका ने यह भी पुष्टि की कि वह BTA वार्ताओं के दौरान भारत के उस अनुरोध पर विचार करेगा, जिसमें अमेरिका से भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को और कम करने की अपेक्षा की गई है।
संयुक्त बयान के अनुसार, अमेरिका और भारत ने आर्थिक सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई है, ताकि आपूर्ति शृंखलाओं की मजबूती और नवाचार को बढ़ाया जा सके। इसके लिए तीसरे देशों की गैर-बाजार नीतियों से निपटने, निवेश समीक्षाओं और निर्यात नियंत्रणों पर सहयोग किया जाएगा। दोनों देश डिजिटल व्यापार में भेदभावपूर्ण या बोझिल प्रथाओं और अन्य बाधाओं को भी दूर करेंगे।
बयान में कहा गया कि दोनों देश इस ढांचे को शीघ्र लागू करेंगे और अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे, ताकि तय किए गए रोडमैप के अनुरूप एक परस्पर लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को पूरा किया जा सके।
(एजेंसी इनपुट्स के साथ)

