
Israel Iran War ने बढ़ाई भारत की टेंशन, अब रूस बनेगा 'संकटमोचक'?
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद, केंद्र सरकार फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। सरकार का लक्ष्य आम उपभोक्ताओं को इस अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के प्रभाव से बचाना है।
Israel Iran War : मिडिल-ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मची है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इस बीच, भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ा अपडेट साझा किया है।
क्या है भारत की तैयारी?
पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल देश में तेल का कोई संकट नहीं है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत के पास 8 सप्ताह (लगभग 2 महीने) तक चलने वाला कच्चे तेल और परिवहन ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
कितना है LPG का बैकअप?
घरों में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस का स्टॉक भी करीब एक महीने के लिए पर्याप्त है।सरकार स्थिति पर पैनी नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर चरणबद्ध तरीके से कदम उठाएगी।
क्यों बढ़ी है भारत की चिंता?
ईरान ने इस युद्द के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पर काफी निर्भर है। ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने इस समुद्री मार्ग को जोखिम में डाल दिया है। भारत का अधिकांश कच्चा तेल और एलपीजी इसी रास्ते से आता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो भारत के लिए आपूर्ति की स्थिरता एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
रूस से बढ़ सकती है खरीदारी
इस संकट के बीच भारत एक बार फिर रूस की ओर देख सकता है। रूसी उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने दावा किया है कि भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने में फिर से दिलचस्पी दिखाई है। भारत उन रूसी जहाजों के इस्तेमाल पर भी विचार कर रहा है जो भारतीय तटों के पास समुद्र में खड़े हैं। नोवाक का मानना है कि ऊर्जा संकट को देखते हुए भविष्य में यूरोपीय संघ भी रूस पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे सकता है।
LNG पर मंडराता खतरा
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय सीमित एलएनजी (LNG) भंडार है। कतर, जो भारत का सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता है, उसने हालिया ड्रोन हमलों के बाद उत्पादन रोक दिया है। यदि कतर से आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई, तो भारत को कड़े आपातकालीन उपाय करने पड़ सकते हैं।
आम जनता को राहत
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद, केंद्र सरकार फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। सरकार का लक्ष्य आम उपभोक्ताओं को इस अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के प्रभाव से बचाना है।

