
ईरान युद्ध के बीच सरकार ने बदले नियम, अब पेट्रोल पंप पर मिलेगा मिट्टी का तेल
ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने भारत में केरोसिन वितरण के लिए एक आपातकालीन योजना शुरू की है।
दुनिया भर में गहराते ऊर्जा संकट और ईरान युद्ध के चलते वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं को देखते हुए भारत सरकार ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने देश भर में केरोसिन (मिट्टी के तेल) के वितरण के लिए एक 'इमरजेंसी विंडो' खोलने का ऐलान किया है। 29 मार्च को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, अब चुनिंदा पेट्रोल पंपों के माध्यम से केरोसिन का वितरण किया जाएगा। यह आदेश उन 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू होगा, जिन्हें पहले 'केरोसिन मुक्त' घोषित कर दिया गया था।
क्या है सरकार का नया आदेश?
इस अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य खाना पकाने के ईंधन की कमी को रोकना और आम जनता तक इसकी पहुंच आसान बनाना है। सरकार ने पेट्रोलियम भंडारण और लाइसेंसिंग नियमों में अस्थायी रूप से ढील दी है ताकि केरोसिन की 'लास्ट माइल डिलीवरी' (अंतिम छोर तक पहुंच) तेजी से हो सके।
आदेश की मुख्य बातें
प्रति जिला दो पेट्रोल पंप: हर जिले में अधिकतम दो पेट्रोल पंपों को केरोसिन बेचने के लिए नामांकित किया जा सकता है।
भंडारण क्षमता: इन चिन्हित आउटलेट्स पर 5,000 लीटर तक केरोसिन स्टोर किया जा सकता है।
कंपनी संचालित पंप: प्राथमिकता उन पंपों को दी जाएगी जो तेल कंपनियों (PSU) द्वारा स्वयं संचालित (COCO) किए जाते हैं।
नियमों में ढील: पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 की धारा 12 का उपयोग करते हुए लाइसेंसिंग और परिवहन के नियमों को 60 दिनों के लिए शिथिल कर दिया गया है।
किन राज्यों में होगी वापसी?
पिछले एक दशक में उज्ज्वला योजना और एलपीजी के विस्तार के कारण कई राज्यों में केरोसिन की सप्लाई बंद कर दी गई थी। लेकिन अब दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर जैसे 21 राज्यों/यूटी में यह फिर से उपलब्ध होगा।
सुरक्षा का रखा जाएगा खास ख्याल
भले ही सरकार ने लाइसेंसिंग नियमों में ढील दी है, लेकिन सुरक्षा मानकों (Safety Norms) से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के सभी दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है। जिला अधिकारी और PESO अधिकारी किसी भी समय इन केंद्रों का निरीक्षण कर सकते हैं। साथ ही, यह स्पष्ट किया गया है कि इस केरोसिन का उपयोग केवल खाना पकाने और रोशनी (lighting) के लिए ही किया जा सकेगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार ने इस फैसले के पीछे "मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति" (Geo-political situation) का हवाला दिया है। ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। हालांकि सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर जनता को राहत देने की कोशिश की है, जिससे सरकारी खजाने पर करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ने का अनुमान है। सरकार को अंदेशा है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा, तो एलपीजी (LPG) की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में केरोसिन को एक 'बैकअप फ्यूल' के तौर पर तैयार रखा जा रहा है।
पुराने ईंधन की नई पारी
कभी भारतीय रसोई की जान रहा केरोसिन, एलपीजी के आने के बाद धीरे-धीरे गायब हो गया था। सरकार का यह कदम उस नीति को पलटना नहीं है, बल्कि एक आपातकालीन सुरक्षा कवच तैयार करना है। अगले 60 दिनों तक, केरोसिन राशन की दुकानों के बजाय सीधे पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध होगा, जो भारत के ऊर्जा इतिहास में एक बड़ा बदलाव है।

