क्या ईरान पर भारत की चुप्पी रणनीतिक संयम है या नीति का संकट?
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क्या ईरान पर भारत की चुप्पी रणनीतिक संयम है या नीति का संकट?

ईरान द्वारा मिसाइलों पर “भारत के लोगों का धन्यवाद” लिखने से भारत की विदेश नीति पर बहस शुरू हो गई है। भारत की चुप्पी को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि यह रणनीति है या कमजोरी।


ईरान ने इज़राइल की ओर दागे गए मिसाइलों पर “Thank you people of India” यानी “भारत के लोगों का धन्यवाद” लिखकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस घटना के बाद भारत की विदेश नीति और उसकी चुप्पी पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञ यह सोच रहे हैं कि क्या यह चुप्पी एक रणनीति है या फिर कोई नीति से जुड़ी उलझन।

मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता जा रहा है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने इस मुद्दे को सामने लाकर भारत की स्थिति पर और ध्यान खींचा है।

मिसाइल पर संदेश का मामला

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ तस्वीरों में ईरान के वैज्ञानिक मिसाइलों पर हाथ से लिखे संदेश डालते हुए दिखाई दिए। यह हमला कथित रूप से 83वीं बार किया गया था। इन संदेशों में भारत, स्पेन, पाकिस्तान और जर्मनी के लोगों का धन्यवाद किया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, Islamic Revolutionary Guard Corps ने इन हमलों को अंजाम दिया। हमलों में तेल डिपो और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।

भारत से समर्थन की बात

मुंबई स्थित ईरान के दूतावास ने भी भारत के लोगों के समर्थन के लिए धन्यवाद कहा। रिपोर्ट्स के अनुसार कश्मीर, लद्दाख और कारगिल जैसे इलाकों से लोगों ने ईरान के लिए दान दिया। इसमें सोना, चांदी, पैसे, जानवर और गाड़ियां शामिल थीं।

नीलोफर मसूद ने कहा कि यह मदद सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे भारत में लोग इसमें शामिल थे। उन्होंने कहा कि बिना सरकार की मदद के ऐसी सहायता दूसरे देश तक नहीं पहुंच सकती।

संतुलित नीति

मसूद ने कहा कि ईरान भारत की जनता और सरकार में फर्क नहीं कर रहा है। उनका मानना है कि भारत ने एक संतुलित नीति अपनाई है—जहां वह शांति की बात भी करता है और अपने व्यापार और सुरक्षा हितों का भी ध्यान रखता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि भारत की प्रतिक्रिया में देरी हुई, जिससे लोगों की भावनाएं प्रभावित हुईं।

रणनीतिक चुप्पी

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ केएस दक्षिणा मूर्ति ने कहा कि भारत की नीति “धीमी और शांत भागीदारी” (low-key engagement) की है। उनके अनुसार, अमेरिका के दबाव के कारण भारत खुलकर कोई पक्ष नहीं ले सकता। उन्होंने बताया कि भारत और ईरान के बीच बातचीत जारी है, लेकिन यह सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाई देती।

ट्रंप का प्रभाव

जब Donald Trump ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया, तो मामला और गंभीर हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत से सीधा सवाल है“आप किसके साथ हैं?” ईरान भी यह दिखाना चाहता है कि उसे दुनिया के लोगों का समर्थन मिल रहा है।

नीति संकट

अब भारत के सामने एक कूटनीतिक चुनौती है। उसे अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संबंध बनाए रखने हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत शायद खुलकर कोई बयान नहीं देगा, लेकिन दबाव लगातार बढ़ रहा है।

कश्मीर में भावनाएं

मसूद ने कहा कि कश्मीर और शिया समुदाय वाले इलाकों में लोग इस घटना से भावनात्मक रूप से प्रभावित हुए हैं। ईरान की घटनाओं को लेकर लोगों में चिंता और दुख है।

शांत कूटनीति

दक्षिणा मूर्ति के अनुसार, भारत की “शांत कूटनीति” (quiet diplomacy) असरदार रही है। उदाहरण के तौर पर, ईरान ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया।

आगे का रास्ता

जैसे-जैसे तनाव बढ़ रहा है, भारत की नीति पर बहस भी बढ़ती जाएगी। ईरान का यह संदेश और ट्रंप की प्रतिक्रिया ने भारत की विदेश नीति को और चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि भारत चुप रहता है या खुलकर अपनी बात रखता है।

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