Air Pollution: टैरिफ से ज्यादा प्रदूषण से अर्थव्यवस्था को नुकसान, गीता गोपीनाथ ने दिखाया सरकार को आईना
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Air Pollution: टैरिफ से ज्यादा प्रदूषण से अर्थव्यवस्था को नुकसान, गीता गोपीनाथ ने दिखाया सरकार को आईना

गीता गोपीनाथ ने कहा, विदेशी निवेशकों के नजरिए से भी प्रदूषण बड़ी समस्या है. अगर कोई निवेशक भारत में आकर कारोबार शुरू करना चाहता है, लेकिन उसे लगता है कि यहां का माहौल उसकी सेहत के लिए ठीक नहीं है, तो वह पीछे हट सकता है.


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क्या भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से बड़ा खतरा प्रदूषण है? क्या प्रदूषण भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है? क्या प्रदूषण के चलते विदेशी निवेशक भारत में निवेश करने से कतराते हैं? देश में जो प्रदूषण की समस्या है उसकी चर्चा अब केवल भारत तक ही सीमित नहीं है. बल्कि पूरी दुनिया में इसकी चर्चा हो रही है. डावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में जब देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री निवेश को आकर्षित करने और इंवेस्टमेंट डेस्टीनेशन के तौर पर भारत की मार्केटिंग करने में जुटे तब इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड की पूर्व चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ ने भारत में प्रदूषण की समस्या को लेकर जो कुछ भी कहा, वो देश के पॉलिसी मेकर्स के लिए आंखें खोलने वाला है.

टैरिफ नहीं प्रदूषण है भारत की बड़ी समस्या

गीता गोपीनाथ ने कहा, "भारत में प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है. अगर भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रदूषण के असर को देखा जाए, तो यह अब तक लगाए गए किसी भी टैरिफ से कहीं ज्यादा नुकसानदेह है. इसका असर सिर्फ आर्थिक गतिविधियों पर ही नहीं पड़ता, बल्कि लोगों की जानें भी जाती है." गीता गोपीनाथ ने कहा वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक,

भारत में हर साल करीब 17 लाख लोगों की मौत प्रदूषण की वजह से होती है, जो देश में होने वाली कुल मौतों का लगभग 18 प्रतिशत है. ये आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं.

गीता गोपीनाथ आगे कहती हैं, विदेशी निवेशकों के नजरिए से भी यह एक बड़ी समस्या है. अगर कोई निवेशक भारत में आकर कारोबार शुरू करना चाहता है, लेकिन उसे लगता है कि यहां का माहौल उसकी सेहत के लिए ठीक नहीं है, तो वह पीछे हट सकता है. यही स्थिति उन करोड़ों भारतीयों की भी है, जो रोज़ाना इसी प्रदूषण में जीने को मजबूर हैं. गीता गोपीनाथ ने कहा प्रदूषण से निपटने के लिए भारत को युद्ध स्तर पर लगना होगा. इसे देश के लिए एक सबसे बड़ा मिशन बनाना होगा. जैसे बिज़नेस को आसान बनाने के लिए नियमों में ढील (डि-रेगुलेशन) जरूरी है, वैसे ही प्रदूषण के खिलाफ़ सख़्त और तेज़ कार्रवाई भी उतनी ही ज़रूरी है.

प्रदूषण का अर्थव्यवस्था पर बुरा असर

गीता गोपीनाथ जब ये बातें कह रही थी तब उनके सामने केंद्रीय सूचना प्रसारण, रेल और सूचना प्रोद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मौजूद थे. सवाल उठता है कि क्या सरकार इस चिंता का संज्ञान लेगी? प्रदूषण से होने वाले नुकसान हो लेकर दूसरी एजेंसियां भी काफी कुछ कह चुकी हैं. Lancet ने अपने Analysis में कहा है कि केवल वायु प्रदूषण यानी Air Pollution सालाना 9 फीसदी जीडीपी का नुकसान हो रहा है. इससे स्वास्थ्य और प्रोडक्टिविटी पर असर पड़ रहा है.

Air Pollution का असर बच्चों के शिक्षा पर

एक रिपोर्ट के मुताबिक एक डिपार्टमेंट स्टोर चेन ने कहा कि, वायु प्रदूषण के चलते उत्तर भारत में उसके सेल्स में कमी आई है. इससे पता लगता है कि प्रदूषण का अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ रहा है. बीबीसी की रिपोर्ट कह रही Air Pollution का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ा है वे बीमार पड़ रहे हैं. Air Pollution का असर बच्चों छात्रों के शिक्षा पर भी पड़ा है. स्कूलों को हफ्तों तक बंद करना पड़ा है.

प्रदूषण कर रही बीमार, जेब पर भी भारी

टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के ज़्यादातर डॉक्टरों का मानना है कि प्रदूषण से जुड़ी बीमारियां लोगों की सेहत के साथ-साथ उनकी जेब पर भी भारी पड़ रही है. भारत के कई शहरों में हवा की बिगड़ती गुणवत्ता अब एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है. इस स्टडी के मुताबिक 400 से ज़्यादा डॉक्टरों से चिंता जताई कि भारत खराब हवा के असर से होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है.

रिपोर्ट के मुताबिक, 60 फीसदी से ज़्यादा डॉक्टरों का कहना है कि जब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 200 से ऊपर चला जाता है, तो यह सेहत के लिए गंभीर खतरा बन जाता है. वहीं, करीब 75 प्रतिशत डॉक्टरों ने माना कि खराब होती हवा की वजह से सांस की बीमारियां, दिल से जुड़ी समस्याएँ और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने जैसी पुरानी बीमारियाँ बढ़ रही हैं. लंबे समय तक खराब हवा में रहने का असर अब सिर्फ बच्चों और बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि कामकाजी उम्र के लोग जो घर से बाहर काम करने के लिए दफ्तर जा रहे हैं वे भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं.

संसद में प्रदूषण पर चर्चा नहीं

पर सवाल उठता है कि प्रदूषण को लेकर सरकार कितना गंभीर है. हाल में जो शीतकालीन सत्र हुआ तब देश के कई बड़े शहर वायु प्रदूषण से जुझ रहे थे लोग बीमार पड़ रहे थे लेकिन संसद ने में इस मुद्दे पर चर्चा भी कराना मुनासिब नहीं समझा. लेकिन डावोस से भारत में प्रदूषण को लेकर जो लेकर जो चिंता जाहिर की गई है फिर क्या सरकार की नींद खुलेगी ये देखना होगा क्योंकि प्रदूषण इस देश में अभी तक चुनावी मुद्दा नहीं बना है.

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