
कांग्रेस में दोफाड़, क्यों कर्नाटक की राजनीति का केंद्र बनी दिल्ली?
कर्नाटक कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे होने के साथ ही सियासी हलचल तेज हो गई है। मंत्रियों के फेरबदल की मांग को लेकर विधायकों का एक समूह दिल्ली में डेरा डाले...
नई दिल्ली/बेंगलुरु: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के ढाई साल का कार्यकाल पूरा होते ही मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की मांग जोर पकड़ने लगी है। लगभग 30 विधायक, जो मंत्री पद पाने के इच्छुक हैं, इस समय पार्टी आलाकमान पर दबाव बनाने के लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।
आलाकमान से मिलने की प्रतीक्षा में विधायक
दिल्ली में मौजूद कांग्रेस विधायकों ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और राज्य प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला से मिलने का समय मांगा है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, उन्हें अभी तक मुलाकात के लिए समय नहीं दिया गया है। विधायक पूरी तरह तैयार हैं और जैसे ही आलाकमान उन्हें बुलाएगा, वे अपनी मांगों को उनके सामने मजबूती से पेश करेंगे।
20 मंत्रियों को हटाने की मांग
मंत्रिमंडल में फेरबदल की मांग करने वाले विधायकों का तर्क है कि नए चेहरों के लिए जगह बनाने के उद्देश्य से वर्तमान के 20 से अधिक मंत्रियों को पद से हटाया जाना चाहिए। ये विधायक नेतृत्व के सामने मंत्रियों की निष्क्रियता और विधायकों के काम के प्रति उनकी उदासीनता की शिकायत करने की योजना बना रहे हैं। वे के.सी. वेणुगोपाल द्वारा दिए गए उस पुराने आश्वासन का भी हवाला दे रहे हैं, जिसमें कहा गया था कि ढाई साल के कार्यकाल के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जाएगा।
डीके शिवकुमार गुट की जवाबी रणनीति
जहां एक समूह मंत्रिमंडल में बदलाव के लिए दिल्ली में लॉबिंग कर रहा है। वहीं उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के करीबी माने जाने वाले एक अन्य गुट ने एक अलग मांग के साथ दिल्ली जाने की तैयारी कर ली है। इस गुट की मांग नेतृत्व परिवर्तन यानी 'नया मुख्यमंत्री' बनाने की है। उनका तर्क है कि यदि फेरबदल की मांग करने वाले विधायकों को आलाकमान सुनने का समय देता है। तो उनके गुट की बात भी सुनी जानी चाहिए।
डीके शिवकुमार गुट का दिल्ली जाने का फैसला आज के राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा। यदि पार्टी आलाकमान फेरबदल की मांग करने वाले विधायकों से मिलता है तो केपीसीसी (KPCC) अध्यक्ष का खेमा भी तुरंत दिल्ली के लिए उड़ान भरेगा। संक्षेप में कहें तो कर्नाटक कांग्रेस की राजनीति अब पूरी तरह से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थानांतरित हो गई है। और सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आलाकमान किस पक्ष का समर्थन करता है।
(यह लेख मूल रूप से 'द फेडरल कर्नाटक' में प्रकाशित हुआ था।)

